चंडीगढ़ : पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल (बादल) के बीच संभावित गठबंधन को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, दोनों दलों के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत आगे बढ़ चुकी है। हालांकि, अभी तक इसका कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। बताया जा रहा है कि गठबंधन की स्थिति में भाजपा इस बार अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। पार्टी 70 से ज्यादा विधानसभा सीटों पर दावेदारी की रणनीति बना रही है, जबकि अकाली दल को 40 से ज्यादा सीटें मिलने की संभावना पर चर्चा चल रही है।
भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों को बनाया आधार
भाजपा की सीटों को लेकर रणनीति के पीछे 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी के प्रदर्शन को महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। पार्टी नेताओं ने अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में मिले वोट और बढ़ी राजनीतिक पकड़ का आकलन शुरू कर दिया है। भाजपा का फोकस खास तौर पर लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, पटियाला और बठिंडा जैसे प्रमुख क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में संगठन मजबूत करने पर है।
बीएल संतोष ने किया पंजाब का दौरा
भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने हाल ही में पंजाब का दो दिवसीय दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कई प्रमुख शहरों में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कीं। बैठकों में संगठन को मजबूत करने, पुराने और नए नेताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए जमीनी स्तर पर तैयारी तेज करने पर चर्चा हुई।
गठबंधन पर सार्वजनिक बयान से बचने के निर्देश
गठबंधन को लेकर चर्चाओं के बीच भाजपा के प्रदेश नेताओं को फिलहाल सार्वजनिक तौर पर केवल पार्टी की आधिकारिक लाइन दोहराने के निर्देश दिए गए हैं। नेताओं से कहा गया है कि आधिकारिक घोषणा होने तक भाजपा के 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी वाले स्टैंड को ही सार्वजनिक रूप से रखा जाए। साथ ही नेताओं को अकाली दल के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी से बचने की सलाह भी दी गई है।
पंजाब भाजपा में संगठन को मजबूत करने और नए-पुराने नेताओं के बीच तालमेल बढ़ाने पर केंद्रीय नेतृत्व का फोकस है। भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने अपने पंजाब दौरे के दौरान पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकों में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की। बैठक के दौरान उन्होंने दूसरे दलों से भाजपा में शामिल हुए नेताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि “दूसरे दलों से आए नेता हमारे परिवार में आई नई बहू की तरह हैं।” उन्होंने समझाया कि जिस तरह शादी के बाद परिवार में नया सदस्य शामिल होता है और धीरे-धीरे परिवार का हिस्सा बन जाता है, उसी तरह बाहर से आए नेताओं को भी सम्मान और सहयोग दिया जाना चाहिए।
बीएल संतोष ने कहा कि नए नेताओं का सम्मान करना जरूरी है, लेकिन साथ ही उन्हें भी पार्टी के पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं का पूरा सम्मान करना चाहिए। उन्होंने पुराने कार्यकर्ताओं को पार्टी की “असली रीढ़” बताते हुए कहा कि उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। उन्होंने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को नए और पुराने नेताओं के बीच किसी भी तरह की गुटबाजी से बचने तथा मिलकर काम करने की हिदायत दी। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि संगठन में एकजुटता बनाए रखना आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
भाजपा नेतृत्व का मानना है कि यदि पुराने कैडर और दूसरे दलों से आए नए नेताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होता है, तो पार्टी की जमीनी स्थिति और मजबूत हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए संगठन स्तर पर नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल बढ़ाने की कवायद तेज की जा रही है।
गांवों में संगठन मजबूत करने की तैयारी
भाजपा अब ग्रामीण पंजाब में अपना संगठन मजबूत करने पर भी जोर दे रही है। कमजोर बूथों की पहचान कर बूथ कमेटियां बनाने और पन्ना प्रमुखों की नियुक्ति पर काम करने के निर्देश दिए गए हैं। पार्टी की रणनीति गांवों में स्थानीय मुद्दों को लेकर छोटे कार्यक्रम आयोजित करने और कार्यकर्ताओं का नेटवर्क बढ़ाने की है। इसके जरिए भाजपा ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करना चाहती है।
सीट बंटवारे पर अंतिम फैसला बाकी
फिलहाल भाजपा और अकाली दल के बीच गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। भाजपा के पंजाब दौरे के दौरान मिले फीडबैक और संगठन की जमीनी रिपोर्ट को केंद्रीय नेतृत्व के सामने रखा जाएगा। इसके बाद ही गठबंधन और सीट बंटवारे को लेकर अंतिम तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।