वर्ष 2025 में वैश्विक द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का व्यापार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (ईआईए) की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक एलएनजी व्यापार 5.4 प्रतिशत बढ़कर 56.3 अरब घन फीट प्रतिदिन (बीसीएफ/डी) हो गया। इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए अमेरिका की एलएनजी निर्यात क्षमता का विस्तार रही।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका का LNG निर्यात 2025 में 26 प्रतिशत बढ़कर 15.1 बीसीएफ/डी पहुंच गया, जो वर्ष के दौरान किसी भी देश द्वारा दर्ज की गई सबसे बड़ी वृद्धि है।
ईआईए ने अनुमान जताया है कि अमेरिका का एलएनजी निर्यात आगे भी बढ़ेगा और 2026 में 17.4 बीसीएफ/डी तथा 2027 में 18.6 बीसीएफ/डी तक पहुंच सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका, कतर और ऑस्ट्रेलिया 2025 में दुनिया के तीन सबसे बड़े एलएनजी निर्यातक रहे। इन तीनों देशों की हिस्सेदारी वैश्विक एलएनजी निर्यात में बढ़कर 63 प्रतिशत हो गई, जो 2024 में 60 प्रतिशत थी। वहीं, कनाडा भी जून 2025 में एलएनजी कनाडा परियोजना शुरू होने के बाद पहली बार एलएनजी निर्यातक देशों की सूची में शामिल हुआ और उसने 0.3 बीसीएफ/डी एलएनजी का निर्यात किया।
कतर का एलएनजी निर्यात 3 प्रतिशत बढ़कर 10.6 बीसीएफ/डी रहा, जो किसी भी देश में दूसरी सबसे बड़ी वृद्धि थी। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 में हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के बाद कतर का एलएनजी निर्यात प्रभावित हुआ है। इससे वैश्विक एलएनजी आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा बाधित हुआ।
ईआईए के अनुसार, जब तक हॉर्मुज जलडमरूमध्य से एलएनजी आपूर्ति सामान्य नहीं होती, तब तक एशियाई और यूरोपीय खरीदार वैश्विक हाजिर बाजार में एलएनजी खरीद के लिए प्रतिस्पर्धा करते रहेंगे। वर्ष 2025 में कतर के कुल एलएनजी निर्यात का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा एशियाई देशों ने आयात किया था, जबकि यूरोप अपने गैस भंडार को भरने के लिए अतिरिक्त एलएनजी खरीद रहा है।
रिपोर्ट में बताया गया कि मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया और नॉर्वे का एलएनजी निर्यात रखरखाव कार्यों के कारण घटा। वहीं, रूस का एलएनजी निर्यात 8 प्रतिशत यानी 0.4 बीसीएफ/डी कम हुआ, जो यूक्रेन संघर्ष के चलते यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों का असर माना गया है।
मांग के मोर्चे पर यूरोप में एलएनजी आयात सबसे तेजी से बढ़ा। वर्ष 2025 में यूरोपीय देशों ने एलएनजी आयात में 29 प्रतिशत यानी 3.8 बीसीएफ/डी की वृद्धि दर्ज की, जो सभी क्षेत्रों में सबसे अधिक रही।
रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप के सात सबसे बड़े एलएनजी आयातक देशों ने अपने आयात में 0.4 से 0.6 बीसीएफ/डी तक की बढ़ोतरी की। इसकी प्रमुख वजह 2024 के अंत में यूक्रेन-रूस गैस पारगमन समझौते की समाप्ति रही, जिससे पाइपलाइन गैस की आपूर्ति कम हो गई और यूरोप की एलएनजी पर निर्भरता बढ़ गई।
इसके विपरीत, एशियाई देशों का एलएनजी आयात 4 प्रतिशत घटकर 35.7 बीसीएफ/डी रह गया। इसका मुख्य कारण चीन का एलएनजी आयात 15 प्रतिशत यानी 1.5 बीसीएफ/डी कम होना रहा, क्योंकि उसने पाइपलाइन गैस आयात बढ़ाने के साथ घरेलू प्राकृतिक गैस उत्पादन में भी वृद्धि की।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मिस्र ने घरेलू गैस आपूर्ति की कमी के कारण एलएनजी आयात बढ़ाकर 1.2 बीसीएफ/डी कर दिया, जबकि 2024 में यह 0.3 बीसीएफ/डी था। वहीं, बहरीन और सेनेगल ने 2025 में पहली बार एलएनजी का आयात किया। दोनों देशों ने 0.1 बीसीएफ/डी से कम एलएनजी आयात किया। रिपोर्ट के अनुसार, इनके अलावा पश्चिम एशिया और अफ्रीका में एलएनजी आयात लगभग स्थिर रहा, जबकि अमेरिका महाद्वीप में एलएनजी आयात 0.3 बीसीएफ/डी घट गया।