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2022 के टेस्ट मैचों में कोहली-राहुल बुरी तरह फ्लॉप:अश्विन ने बना दिए उनसे ज्यादा रन; जानें कौन रहे भारत के बेस्ट बैटर

27 दिसंबर, 2022 12:42 PM

भारत के 2022 में सभी टेस्ट मैच खत्म हो चुके हैं। टीम ने इस साल 7 मैच खेले, 4 जीते और 3 हारे। इनमें भारत के प्रमुख बैटर्स केएल राहुल और विराट कोहली बुरी तरह फेल रहे। इतनी बुरी तरह कि स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने इस साल उनसे ज्यादा रन बना दिए। राहुल ने 4 टेस्ट में 137 और कोहली ने 6 टेस्ट में 265 रन बनाए। वहीं, अश्विन ने 6 टेस्ट में 270 रन बना दिए।

इस दौरान भारत के कप्तान रोहित शर्मा ने भी 90 ही रन बनाए। हालांकि, उन्होंने 2 ही मैच खेले। ऐसे में उन्हें आउट ऑफ फॉर्म नहीं कहा जा सकता। आगे स्टोरी में हम राहुल और विराट के फॉर्म पर आंकड़ों के आधार पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि दोनों के खराब फॉर्म के पीछे क्या कारण रहे और इस साल क्रिकेट के सबसे लंबे फॉर्मेट में भारत के बेस्ट बैटर कौन रहे...

21वीं सदी में भारत के सबसे खराब ओपनर
इस साल राहुल ने भारत के लिए 4 टेस्ट खेले। 2 साउथ अफ्रीका के खिलाफ और 2 बांग्लादेश के खिलाफ, 3 में वह इंजर्ड रहने के कारण प्लेइंग इलेवन से बाहर रहे। 4 टेस्ट में उन्होंने 50, 8, 12, 10, 22, 23, 10 और 2 रन की पारियां खेलीं। यानी कि 8 पारियों में वह एक ही फिफ्टी लगा सके। 137 रन बनाने के दौरान उनका औसत महज 17.12 का रहा।

2000 से 2022 के बीच भारत के ओपनर्स में ये औसत आकाश चोपड़ा और मयंक अग्रवाल के बाद सबसे खराब रहा। आकाश चोपड़ा ने 2004 के 5 टेस्ट में 12.55 की औसत से 113 रन बनाए थे। वहीं, मयंक अग्रवाल ने 2020 के 4 टेस्ट में 16.62 की औसत से 133 रन बनाए थे। इन आंकड़ों में उन्हीं ओपनर्स को लिया गया, जिन्होंने साल में भारत के लिए कम से कम 4 टेस्ट खेले हो।

2015 से 2021 के बीच राहुल ने 37.31 की औसत से 40 मैचों में 2463 रन बनाए थे। इस दौरान उनके बैट से 7 शतक और 12 अर्धशतक आए। 6 शतक तो उन्होंने विदेश में लगा दिए थे। इससे साफ है कि 2022 में ही उनका प्रदर्शन कमजोर हुआ है।

कप्तानी के दबाव में हैं राहुल
कप्तानी करते हुए राहुल ने टेस्ट में 50, 8, 22, 23, 10 और 2 रन के स्कोर बनाए। बैट से तो उन्होंने कुछ खास नहीं किया, लेकिन टीम को 3 में से 2 टेस्ट जीता दिए। तीनों फॉर्मेट के दौरान 11 मैचों में राहुल ने कप्तानी की। इनमें उन्होंने 22.46 की औसत से महज 292 रन बनाए। इस दौरान उनके बैट से 3 ही फिफ्टी आईं। 11 में से 7 में भारत को जीत और 4 में हार मिली।

यानी, कप्तानी के दौरान उनका फोकस बैटिंग से हटकर फील्ड प्लेसमेंट और मैनेजमेंट पर ज्यादा हो रहा है। इस कारण वे बैट से कुछ खास परफॉर्म नहीं कर पा रहे।

विराट को 3 साल से टेस्ट शतक का इंतजार
वनडे और टी-20 इंटरनेशनल में तो विराट ने शतक का सूखा खत्म कर लिया। लेकिन, टेस्ट में वह 22 नवंबर 2019 के बाद से शतक नहीं लगा सके। ये साल तो उनके लिए और भी खराब रहा। साउथ अफ्रीका के खिलाफ जनवरी के दौरान टेस्ट में उन्होंने 79 और 29 रन की पारियां खेलीं। मैच हार जाने के बाद विराट ने भारत की टेस्ट कप्तानी छोड़ दी।

फिर जो दौर टेस्ट में विराट का चला, उसे वह खुद भुलाना चाहेंगे। श्रीलंका के खिलाफ घर में उन्होंने 45, 23 और 13 रन की पारियां खेलीं। फिर, इंग्लैंड के खिलाफ 11, 20 और बांग्लादेश के खिलाफ भी 1, 19*, 24 और 1 रन के स्कोर ही बना सके। 2022 के 6 टेस्ट में उन्होंने 26.50 की औसत से महज 265 रन बनाए। उनके बैट से एक ही फिफ्टी आई।

कोहली के खराब फॉर्म के पीछे क्या वजह?
नवंबर 2019 में 27वें टेस्ट शतक के बाद से विराट कोहली ने 20 टेस्ट खेले। इनमें 26.20 की औसत से 917 रन बनाए। उनके बैट से 6 ही फिफ्टी आईं। यानी, पिछले 3 साल से उनकी परफॉर्मेंस कुछ खास नहीं रही। हालांकि, विराट ने 104 टेस्ट के करियर में 48.90 की औसत से 8,119 रन बनाए हैं। इनमें 27 शतक और 28 अर्धशतक शामिल हैं।

टीम इंडिया के पूर्व बैटिंग कोच संजय बांगर ने विराट के फॉर्म पर कहा था कि वह छोटे स्कोर को बड़ी पारियों में कन्वर्ट नहीं कर पा रहे हैं। लगातार क्रिकेट खेलने की वजह से उनका फोकस जल्दी ब्रेक हो जा रहा है। ऐसे में मुमकिन है कि विराट आने वाले समय में टेस्ट के मुकाबले वनडे और टी-20 में ज्यादा बड़े स्कोर करते नजर आएंगे। वे टेस्ट में भी शतक बना देंगे। लेकिन, लंबे समय तक उनके लिए टिके रहना अब थोड़ा मुश्किल होगा।

रोहित ने इस साल 2 ही टेस्ट खेले
राहुल और विराट के साथ रोहित शर्मा ने भी इस साल रविचंद्रन अश्विन से कम रन बनाए। उन्होंने 2 ही मैच खेले, लेकिन टेस्ट में उनका ओवरऑल प्रदर्शन कैसा रहा है ये जानना भी जरूरी है। इस साल श्रीलंका के खिलाफ रोहित ने 29, 15 और 40 रन की पारियां खेलीं। लेकिन, 2021 के 11 टेस्ट में उन्होंने 47.68 की औसत से 906 रन बनाए थे। इनमें 2 शतक और 4 अर्धशतक भी लगाए।

इन दोनों सालों को मिलाएं तो रोहित ने 45.27 की औसत से रन बनाए हैं। यानी कि टेस्ट में उन्हें आउट ऑफ फॉर्म नहीं कहा जा सकता। ओवरऑल टेस्ट करियर की बात करें तो 45 टेस्ट में 46.13 की औसत से उन्होंने 3,137 रन बनाए हैं। इस दौरान उन्होंने 8 सेंचुरी और 14 हाफ सेंचुरी भी जमाईं।

विदेश में फॉर्म सुधरा
टेस्ट डेब्यू के बाद से 2020 तक रोहित शर्मा ने 32 मैच खेले। इनमें उन्होंने 46.54 की औसत से 2,141 रन बनाए। इनमें 6 शतक और 10 अर्धशतक आए। इस दौरान उन्होंने विदेश में 18 टेस्ट खेले। जिनमें 26.32 की औसत से महज 816 रन बनाए। यानी कि विदेश में उनका फॉर्म चिंताजनक था। लेकिन, पिछले 2 साल में उन्होंने इंग्लैंड में 48 की औसत से 432 रन और ऑस्ट्रेलिया में 32.25 की औसत से रन बनाए। इससे साफ है कि विदेश में उनका प्रदर्शन बेहतर होने लगा है।

बेस्ट बॉलर से बेस्ट बैटर कैसे बनें अश्विन?
रविचंद्रन अश्विन ने इस साल विराट के बराबर 6 टेस्ट खेले। वे 7 और 8 नंबर पर बैटिंग करने आते हैं, यानी कि टॉप ऑर्डर बैटर के मुकाबले उन्हें बैटिंग करने के कम चांस मिलते हैं। बावजूद इसके उन्होंने इस साल 46,16, 2, 7, 61, 13, 13, 58, 12 और 42* रन की अहम पारियां खेलीं। उन्होंने 30 की औसत से 270 रन बनाए।

इनमें 2 फिफ्टी और दो 40+ की अहम पारियां शामिल हैं। यानी कि उन्होंने वाकई बल्ले से बेहतर परफॉर्म किया है। ओवरऑल 88 टेस्ट में उन्होंने 27.41 की औसत से 3,043 रन बनाए हैं। इनमें 5 शतक और 13 अर्धशतक शामिल हैं। इससे साफ है कि वह टेस्ट में ठीक-ठाक बैटिंग कर लेते हैं। ऐसे में उनका इतने रन बनाना नया नहीं है। लेकिन, राहुल और विराट का स्कोर नहीं कर पाना जरूर चिंताजनक है।

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