भारत ने फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद की पूरी तैयारी कर ली है। फ्रांस की कंपनी के साथ 3.25 करोड़ की डील के लिए 'लेटर ऑफ रिक्वेस्ट' जारी कर दिया गया है। इस डील के तहत 94 राफेल विमानों की निर्माण फ्रांसीसी कंपनी 'दसॉल्ट एविएशन' के साथ मिलकर भारत में ही किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि फ्रांस की ओर से इसम मामले में तीन महीने में जवाब आ सकता है और इसके बाद डील फाइनल हो जाएगी।
क्यों खौफ खाते हैं दुश्मन
भारतीय वायुसेना को विमानों की सख्त जरूरत है और यह वायुसेना की जरूरत पूरी करने की ओर बड़ा कदम है। वहीं राफेल विमानों से दुश्मन खौफ भी खाते हैं क्योंकि ये अत्याधुनिक विमान हैं। ये विमान बियॉन्ड विजुअल रेंज तकनीक से लैस होते हैं। इसका मतलब है कि जहां तक देखा नहीं जा सकता है, उससे बहुत आगे जाकर भी वार किया जा सकता है। ऐसे में राफेल से दुश्मन देश पर हमला करना आसान हो जाता है। बिना सीमा में प्रवेश किए ही राफेल दुश्मन के इलाकों को दहला सकता है। इसके अलावा इसकी गजब की मारक क्षमता और आधुनिक तकनीक इसे और भी खास बना देती हैं।
जून में पीएम मोदी का फ्रांस दौरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जून में फ्रांस का दौरा कर सकते हैं। इस दौरान राफेल डील पर भी बातचीत होने की पूरी संभावना है। भारत ने वायुसेना में विमानों की कमी को देखते हुए 4.5 जेनेरेशन प्लस राफेल विमानों को शामिल करने का फैसला किया है। वायुसेना और नौसेना पहले भी 62 विमानों का ऑर्डर दे चुकी है। वहीं 114 राफेल विमानों की डील फाइनल होने के बाद इनकी संख्या 176 हो जाएगी जो कि भारतीय सेना के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।
बीते साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राफेल विमानों ने बहुत ही कम समय में दुश्मन के छक्के छुड़ा दिए। जाहिर सी बात है कि चीन को भी इन विमानों से चुनौती महसूस होती है। अभी राफेल विमानों की संख्या कम है। हालांकि डील फाइनल होने और वायुसेना में पर्याप्त राफेल होने के बाद भारतीय वायुसेना से हर देश खौफ खाएगा।
समंदर में भी राफेल करेंगे सुरक्षा
भारतीय नौसेना ने समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 31 राफेल विमानों को खरीदने की इच्छा जताई थी। अगर ऐसा होता है तो राफेल विमानों की संख्या 200 के भी पार पहुंच जाएगी। खास बात यह है कि इनमें से आधे राफेल विमान भारत में ही निर्मित होंगे। इससे पहले वायुसेना प्रमुख, एयरचीफ मार्शल एपी सिंह दसॉल्ट एविएशन कंपनी का दौरा कर सकते हैं। यहीं राफेल विमानों का निर्माण होता है।
पहली बार है जब राफेल विमानों का निर्माण फ्रांस से बाहर किसी देश में होगा। भारत में यह 50 फीसदी स्वदेशी तकनीक के साथ तैयार किया जाएगा। यह खरीद वायुसेना के मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट कार्यक्रम का हिस्सा है। बता दें कि वायुसेना के पास 29 स्क्वॉड्रन हैं जबकि कम से कम 42.5 स्क्वॉड्रन की जरूरत है। भारत पहले से ही 36 राफेल विमानों के बेड़े में शामलि कर चुका है।
अधिकारियों का कहना है कि इस समझौतेसे राफेल विमानों में स्वदेशी हथियार और तकनीक का इस्तेमाल करने में सहूलियतम मिलेगी। इसके अलावा डील पारदर्शी होगी और कोई बिचौलिया नहीं रहेगा। भविष्य में विमानों के निर्माण और तकनीक की लिहाज से यह डील भारत के लिए बहुत फायदेमंद होने वाली है।