चंडीगढ़ : हरियाणा सरकार राज्य की प्रशासनिक और राजस्व व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और गतिशील बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रदेश में अब पटवारियों के लिए 'स्टेट कैडर' (State Cadre) नीति लागू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। इस बड़े बदलाव के बाद अब कोई भी पटवारी लंबे समय तक किसी एक ही जिले में अपनी सेवाएं नहीं दे सकेगा और उनका ट्रांसफर राज्य के किसी भी हिस्से में किया जा सकेगा।
क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
मौजूदा व्यवस्था के तहत पटवारियों की नियुक्ति और उनका कैडर जिला स्तर पर ही सीमित रहता था। इसके कारण कई पटवारी सालों-साल एक ही जिले या अपने पसंदीदा क्षेत्रों में जमे रहते थे, जिससे कई बार प्रशासनिक शिथिलता और स्थानीय स्तर पर मिलीभगत की शिकायतें सामने आती थीं। भ्रष्टाचार पर लगाम कसने, कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने और प्रशासनिक फेरबदल को आसान बनाने के उद्देश्य से सरकार ने स्टेट कैडर व्यवस्था को मंजूरी देने का मन बनाया है।
लागू होने वाले नए नियम और बड़े बदलाव
नए नियमों के लागू होते ही पटवारियों का जिला कैडर समाप्त होकर वे राज्य सरकार के अधीन आ जाएंगे। इससे उनका ट्रांसफर एक जिले से दूसरे जिले में आसानी से हो सकेगा।हाल ही में सरकार ने पटवार सर्किलों का पुनर्गठन (Restructuring) भी शुरू किया है। अब केवल जमीन के रकबे के बजाय आबादी और काम के बोझ के हिसाब से नए सर्कल (करीब 1500 से 2500 एकड़) तय किए जा रहे हैं।प्रदेश में हाल ही में लगभग 2700 नवनियुक्त पटवारियों को ज्वाइन कराया गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पहले ही घोषणा की है कि पटवारियों की ट्रेनिंग की अवधि (1 वर्ष) को भी अब उनकी सर्विस का हिस्सा माना जाएगा और उन्हें समय पर वेतन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए जा चुके हैं।
आम जनता को क्या होगा फायदा?
इस व्यवस्था के लागू होने से भूमि रिकॉर्ड, म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) और अन्य नागरिक सेवाओं से जुड़े सरकारी कामों में तेजी आएगी। पटवारखानों में किसी एक अधिकारी का एकाधिकार खत्म होने से आम जनता को बेवजह के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी और राजस्व विभाग और अधिक मजबूत व तकनीकी रूप से पारदर्शी बनेगा।