चंडीगढ़ : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल पदक जीतना नहीं है, बल्कि ऐसी सशक्त खेल संस्कृति का निर्माण करना है जहां प्रतिभा को अवसर मिले, परिश्रम को सम्मान मिले और प्रत्येक युवा को अपने सपनों को साकार करने का विश्वास प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि सरकार केवल पुरस्कार प्रदान नहीं कर रही, बल्कि विकसित भारत के लिए खेल शक्ति की मजबूत नींव तैयार कर रही है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मंगलवार को पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस, पंचकूला के ऑडिटोरियम सेक्टर-1 में राज्य के उत्कृष्ट खिलाड़ियों के सम्मान में आयोजित नकद पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर खेल राज्य मंत्री श्री गौरव गौतम भी उपस्थित थे। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने राज्य के अंर्तराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख खेल प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले व प्रतिभागिता करने वाले 198 खिलाड़ियों को 20.59 करोड़ रुपये की नकद ईनाम राशि देकर सम्मानित किया। इसमें विश्वस्तरीय प्रतियोगिताओं के 117 खिलाड़ियों को 13.75 करोड़ रुपये, पैरा एशियन खेल 2022 के 3 खिलाड़ियों को 2.32 करोड़ रुपये और राष्ट्रीय स्तर के 78 खिलाड़ियों को 4.52 करोड़ रुपये की ईनाम राशि शामिल है। उन्होंने कहा कि पिछले लगभग 12 वर्षों में प्रदेश के 16 हजार 984 खिलाड़ियों को 709 करोड़ रुपये की नकद पुरस्कार राशि दी गई है। आज की राशि जोड़कर यह लगभग 730 करोड़ रुपये बन जाती है।
मुख्यमंत्री ने सम्मानित हुए खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पदक जीतने का क्षण भले ही कुछ मिनटों का होता है, लेकिन उस क्षण तक पहुँचने की यात्रा वर्षों की तपस्या से होकर गुजरती है।
उन्होंने कहा कि हमारे देश की मिट्टी ने ऐसे खिलाड़ी पैदा किए हैं, जिन्होंने पूरी दुनिया को सिखाया कि हालात चाहे कितने भी कठिन हों, अगर इरादे बुलंद हों तो इतिहास बदला जा सकता है। उन्होंने मिल्खा सिंह जिन्हें फलाईंग सिख के नाम से भी जाना जाता है, मुरलीकांत पेटकर और मैरी काॅम का उदाहरण देते हुए कहा कि इन तीनों की जीवन-यात्रा हमें एक ही बात सिखाती है कि चुनौतियाँ हर किसी के जीवन में आती हैं, लेकिन विजेता वही बनता है जो चुनौतियों के सामने झुकता नहीं, उनसे लड़ता है। इन्होंने विपरीत परिस्थितियों को अपनी मंजिल का अंत नहीं बनने दिया, बल्कि उसी को अपनी सबसे बड़ी ताकत, अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा और अपनी सबसे बड़ी जीत का आधार बना लिया।
नायब सिंह सैनी ने कहा कि उन्हें गर्व है कि हरियाणा ने हमेशा देश को ऐसे खिलाड़ी दिए हैं, जिन्होंने भारत का सिर दुनिया के सामने ऊंचा किया है। देश की आबादी में हमारा हिस्सा भले ही लगभग दो प्रतिशत हो, लेकिन भारत के लिए जीते गए पदकों में हरियाणा का योगदान एक-तिहाई से भी अधिक है। पेरिस ओलंपिक हो, पैरालंपिक हो, एशियन गेम्स हों या कॉमनवेल्थ गेम्स, हर मंच पर हरियाणा के खिलाड़ियों ने भारत का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने उपस्थित खिलाड़ियों से संवाद करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप वर्ष 2028, 2032 और 2036 के ओलंपिक खेलों में पदक जीतने वाले खिलाड़ी आप ही होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया एआई के युग में प्रवेश कर रही है। खेल भी इससे अछूता नहीं है। आज एआई खिलाड़ियों की फिटनेस का विश्लेषण कर रही है। चोट की संभावना का पहले से अनुमान लगा रही है। विपक्षी टीम की रणनीति समझने में मदद कर रही है। प्रशिक्षण को अधिक वैज्ञानिक बना रही है। उन्होंने कहा कि एआई आपकी गति माप सकती है, आपकी हृदय गति बता सकती है, आपकी तकनीक का विश्लेषण कर सकती है। लेकिन, एआई कभी आपके जुनून को नहीं माप सकती, आपकी देशभक्ति को नहीं समझ सकती, कभी उस भावना को नहीं बना सकती, जो तिरंगा कंधों पर लेकर विजय मंच पर खड़े खिलाड़ी की आंखों में दिखाई देती है। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों को संदेश देते हुए कहा कि तकनीक का उपयोग अवश्य करें, लेकिन अपने भीतर के इंसान को हमेशा जीवित रखें क्योंकि, भविष्य उन्हीं का होगा, जो तकनीक और मानवीय मूल्यों, दोनों को साथ लेकर चलेंगे।
प्रदेश में खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से उठाए गए विभिन्न महत्वपूर्ण कदमों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा उत्कृष्ट खिलाड़ी भर्ती नियमों के तहत 260 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियां दी गई हैं। हाल ही में खेल ग्रेडेशन नीति में संशोधन किया है जिससे अब हरियाणा स्टेट गेम्स के खिलाड़ियों को भी खेल ग्रेडेशन का लाभ मिलेगा। इसके अलावा अवार्ड विजेता खिलाड़ियों के मासिक मानदेय में बढ़ोतरी की है। इसके तहत खेलरत्न, द्रोणाचार्य, अर्जुन, ध्यानचंद और तेनजिंग नोर्गे विजेताओं को प्रतिमाह 20 हजार रुपये, और भीम अवॉर्ड विजेताओं को प्रतिमाह 5 हजार रुपये का मानदेय मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हर चैंपियन की शुरुआत गांव की मिट्टी और स्कूल के मैदान से होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने 2 हजार खेल नर्सरियां खोली हैं, 8 से 19 वर्ष के खिलाड़ियों को 1500 से 2 हजार रुपये मासिक छात्रवृत्ति दी है, और 25 आवासीय खेल अकादमियों में 500 रुपये प्रतिदिन डाइट मनी दी जा रही है। खेल बुनियादी ढांचे पर 12 वर्षों में 1,100 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, और खेल विभाग का बजट 2013-14 के 163 करोड़ रुपये से बढ़कर आज 668 करोड़ 42 लाख रुपये हो गया है। उन्होंने कहा कि पंचकूला के ताऊ देवीलाल खेल परिसर में 10 करोड़ रुपये की लागत से उत्तर भारत का पहला ए-स्टार वैज्ञानिक प्रशिक्षण एवं पुनर्वास केंद्र भी स्थापित किया गया है।
इस अवसर पर संबोधित करते हुए खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा खेलों के हब के रूप में उभरा है। खिलाड़ियों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं, ताकि वे कड़ी मेहनत कर विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए देश और प्रदेश का नाम रोशन कर सकें।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में मिशन-2036 शुरू किया गया है, जिसके तहत हरियाणा ने 36 पदक जीतने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए खिलाड़ियों को आधुनिक खेल सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत से खेल स्टेडियमों के बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को सुदृढ़ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज हरियाणा की खेल नीति की पूरे देश में सराहना हो रही है। हरियाणा की खेल नीति और खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत के परिणामस्वरूप प्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं।
इस अवसर पर विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता, मेयर शाम लाल बंसल, जिला अध्यक्ष अजय मितल, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बंतो कटारिया, खेल विभाग के निदेशक पार्थ गुप्ता सहित खिलाड़ी और कोच मौजूद थे।