चंडीगढ़ : स्वामी दयानंद ने अपना संपूर्ण जीवन समाज सुधार और ज्ञान से उजाला करने को समर्पित कर दिया। उनकी सुधारवादी विचारधारा से ही स्वदेशी और स्वराज का मंत्र मिला। स्वामी जी के इसी मंत्र से प्रेरित होकर देश की आजादी के लिए अनेक देशवासियों ने त्याग और बलिदान दिया। स्वामी जी विचारधारा आज भी हमें नवाचार की ओर अग्रसर करती है। भारत वर्ष की इस समृद्ध परंपरा को गुरुकुल आगे बढ़ा रहे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव औमप्रकाश धनखड़ ने गुरुकुल झज्जर के 110 वें वार्षिक समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि झज्जर गुरुकुल ने इस क्षेत्र में सनातनी परंपरा और नैतिकता की शिक्षा को निरंतर आगे बढ़ाने का सराहनीय कार्य किया है। -- सनातनी शिक्षा के नवाचार से भारत हुआ मजबूत धनखड़ ने कहा कि ओमानंद सरस्वती जी ने स्वामी दयानंद जी की विचारधारा के प्रचार प्रसार में अपना जीवन समर्पित कर दिया। ओमानंद जी ने विपरित परिस्थितियों में भी सनातनी परपंरा को आगे बढ़ाने का काम किया। उन्होंने कहा कि मैकाले शिक्षा नीति दूसरों के पीछे-पीछे चलना सिखाती है। हमारे वेद व सनातनी शिक्षा नवाचार और सुधार की ओर अग्रसर करती है। हमारी सरकार केे डिपार्टमेंट ऑफ फ्यूचर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देने के लिए विश्वस्तरीय सम्मेलन कराने जैसे निर्णय हमें नई तकनीक और नये ज्ञान के साथ आगे बढ़ने को प्रेरित करते हैं।
धनखड़ ने कहा कि सनातनी शिक्षा की बदौलत ही दुनिया के शक्तिशाली देश अब भारत की ओर उम्मीद भरी नजरों से देखने लगे हैं। पश्चिम एशिया युद्ध को रोकने के लिए कई बड़े देश भारत को आगे आने की बात कर रहे हैं। यह आगे बढ़ते भारत की ताकत है।
संस्कृति, संस्कार और नवाचार हमारी ताकत -बोले धनखड़
धनखड़ ने कहा कि भारत के युवा अपनी संस्कृति और संस्कारों को तकनीक के साथ समावेश करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। भाजपा की रीति और नीति में सनातनी संस्कृति के साथ राष्ट्र विकास सर्वोपरि है । आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर उभरा है। पीएम मोदी के सशक्त नेतृत्व में हर भारतीय का सपना वर्ष 2047 तक विकसित भारत हो अपना। इसके लिए जरूरी है कि हम अपने संस्कारों और संस्कृति के साथ नवाचार को अपनाएं। गुरुकुल महाविद्यालय पहुंचने पर आचार्य विजयपाल जी ने भाजपा राष्ट्रीय सचिव औमप्रकाश धनखड़ का वैदिक परंपरा से स्वागत किया।
इस अवसर पर आचार्य विजयपाल , स्वामी प्रद्युम्न ,स्वामी देवव्रत , स्वामी पूर्णानंद डॉ योगानंद शास्त्री,आचार्य विजयानंद, महेंद्र धनखड़,आनंद सागर, चेयरमैन जगदीप छिकारा,संदीप हसनपुर, रामबीर सिलानी,उमेद आर्य, सुरेंद्र छपार,मनीष सिलानी, प्रकाश धनखड़ सहित सैकड़ों की संख्या में आचार्य ,शिक्षाविद् और छात्र मौजूद रहे।