भिवानी : प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (पीएबी) की रिपोर्ट से हरियाणा के सरकारी स्कूलों में शिक्षा और व्यवस्था की पोल खुली है। सरकार जिस तरह के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को लेकर दावे करती रही है, इस रिपोर्ट ने सरकार के दावों को झूठे साबित कर दिया है। इस रिपोर्ट में स्कूलों की हकीकत सामने आने से सरकार की नीति और नीयत पर सवाल खड़े करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक बुवानीवाला ने कहा कि सरकार झूठ के सहारे चल रही है। शिक्षा के मामले में सरकारी तंत्र फेल हो चुकी है।
अशोक बुवानीवाला ने पीएबी की रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि जब प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 28 प्रतिशत पद खाली और 968 स्कूल एक-एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं तो फिर गुणवत्ता की शिक्षा के दावे झूठे हैं। एक तरह से सरकार प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों की बदहाली पर प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (पीएबी) की ताजा रिपोर्ट ने सरकार के दावों की हवा निकाल दी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदेश में 11वीं और 12वीं यानी कक्षा में शिक्षकों के 26.2 प्रतिशत यानी 5,573 पद खाली हैं। एलिमेंट्री स्तर पर 8,449 पद खाली हैं। सबसे बुरे हालात तो प्राइमरी स्कूलों के हैं। प्रदेश में 11 प्रतिशत यानी 968 सरकारी प्राइमरी स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। एक शिक्षक सभी कक्षाओं को कैसे पढ़ा रहा है, कैसे बच्चे निपुण बनेंगें, यह बड़ा सवाल है।
अशोक बुवानीवाला ने आगे कहा कि पीएबी की रिपोर्ट बताती है कि हरियाणा के 215 गांवों में आज तक हायर सेकेंडरी स्कूल ही नहीं खुले हैं। प्रदेश की 63 बस्तियों के बच्चों को प्राइमरी स्कूल तक नसीब नहीं हुआ। शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत 6 से 14 साल तक के बच्चों को 8वीं तक मुफ्त शिक्षा का अधिकार है, लेकिन हकीकत में बच्चे स्कूल से ही वंचित हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों को तैयार करने वाले संस्थानों की हालत भी खराब है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डीआईईटी) में 62 प्रतिशत और एससीईआर में 33 प्रतिशत पद खाली हैं। जब शिक्षक तैयार करने वाले ही नहीं होंगे तो स्कूलों में योग्य शिक्षक कहां से आएंगे। उन्होंने है कि यह गरीब, किसान और आम आदमी के बच्चों को शिक्षा से दूर रखने की साजिश है।
कांग्रेस नेता अशोक बुवानीवाला ने बताया कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों, प्राचार्य और मुख्य अध्यापकों के 30,000 से अधिक पद खाली हैं। सिर्फ शिक्षकों के ही 15,451 पद खाली हैं। इनमें टीजीटी के 7,707, पीजीटी के 3,998 और पीआरटी के 3,746 पद शामिल हैं। 90 प्रतिशत स्कूलों में हेड मास्टर नहीं हैं। प्रशासनिक और वित्तीय जिम्मेदारी सामान्य शिक्षकों पर है, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
1066 स्कूल एक शिक्षक के भरोसे, 43 हजार बच्चे प्रभावितः
अशोक बुवानीवाला ने कहा कि नीति आयोग और प्री-प्राइमरी से लेकर उच्चतर माध्यमिक स्तर तक शिक्षा की गुणवत्ता की निगरानी और मूल्यांकन के लिए एक महत्वपूर्ण प्रणाली- स्कूल शिक्षा पर एकीकृत जिला सूचना (यूडीआईएसई) प्लस की रिपोर्ट में भी हरियाणा केस्कूलों की कमियां उजागर हुई हैं।
रिपोर्ट से पता चलता है कि हरियाणा में 1,066 सरकारी स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। इन स्कूलों में 43,400 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। एक शिक्षक पांच कक्षाओं को एक साथ कैसे पढ़ाए। बच्चों की बुनियाद कैसे मजबूत होगी।
हाईकोर्ट की टिप्पणियों के अनुसार कई स्कूलों में साफ शौचालय और पीने के स्वच्छ पानी तक की व्यवस्था नहीं है। 60 प्रतिशत से ज्यादा सरकारी स्कूलों में चारदीवारी, खेल के मैदान और बिजली-पंखों का इंतजाम नहीं है। साइंस लैब और कंप्यूटर लैब में पुराने-कबाड़ उपकरण पड़े हैं।
राष्ट्रीय औसत 14.7 प्रतिशत की तुलना में हरियाणा सरकार शिक्षा पर कुल खर्च का सिर्फ 13.8 प्रतिशत आवंटित करती है। उसमें भी बड़ा हिस्सा समय पर खर्च नहीं हो पाता और सरेंडर हो जाता है। यह बात सरकार ने खुद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में मानी है।
आरोप है कि नियमित भर्ती की बजाय हरियाणा कौशल रोजगार निगम के जरिए कॉन्ट्रैक्ट पर शिक्षक भेजकर छात्र-शिक्षक अनुपात को ठीक दिखाने का छलावा किया जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि सरकार खाली पदों पर तुरंत भर्ती करे। हर बस्ती में स्कूल खुले और बुनियादी सुविधाएं दी जाएं।