अमृतसर : शिक्षा मंत्रालय की ‘युवा संगम’ पहल के तहत इंडियन इंस्टीट्यूटऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर), मोहाली की मेजबानी में गुजरात से आए 47 स्टूडेंट्स ने अमृतसर के दौरे के दौरान पंजाब की आध्यात्मिक विरासत, सांस्कृतिक परंपराओं और देशभक्ति के जज्बे को करीब से अनुभव किया। यह दौरा विद्यार्थियों की यात्रा का अंतिम चरण था।
‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के तहत आयोजित इस दो दिवसीय दौरे ने स्टूडेंट्स को अमृतसर की समृद्ध धार्मिक परंपराओं, इतिहास, वीरता और सेवा भाव से परिचित कराया। इस दौरान उन्हें पंजाब के शैक्षणिक और औद्योगिक विकास के साथ-साथ यहां की सांस्कृतिक विविधता को समझने का अवसर भी मिला।
दौरे का सबसे यादगार अनुभव श्री हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) में मत्था टेकना रहा। गुरुपर्व के अवसर पर विद्यार्थियों ने शाम के समय स्वर्ण मंदिर परिसर का दौरा किया और वहां सजे उत्सवी माहौल तथा आतिशबाजी को करीब से देखा। स्टूडेंट्स ने स्वर्ण मंदिर के आसपास विभिन्न स्थानों पर चल रहे लंगरों को भी उत्सुकता से देखा, जहां चॉकलेट, टिक्की और मैगी तक परोसी जा रही थी। लंगर की यह अनूठी परंपरा उनके लिए खास अनुभव रही। इससे उन्हें सेवा, सहयोग और बिना किसी भेदभाव के लोगों को भोजन कराने की भावना को समझने का अवसर मिला।
स्टूडेंट्स ने अटारी-वाघा जॉइंट चेक पोस्ट का भी दौरा किया। यहां सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की 10वीं बटालियन के कमांडेंट एन.एस. बोपाराय ने उनका स्वागत किया और वाघा बॉर्डर पर होने वाले समारोह के महत्व के बारे में जानकारी दी। विद्यार्थियों ने बीटिंग रिट्रीट समारोह भी देखा, जहां उन्हें सीमा पर तैनात जवानों के अनुशासन, परंपराओं और देशभक्ति के जज्बे को करीब से जानने का अवसर मिला।
अमृतसर में दो रात के प्रवास के दौरान स्टूडेंट्स ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम), अमृतसर का दौरा किया और वहां के फैकल्टी और स्टूडेंट्स से बातचीत की। इस संवाद के जरिए उन्हें संस्थान के शैक्षणिक माहौल और परिसर की गतिविधियों को समझने का अवसर मिला।
आईआईएसईआर मोहाली के डॉ. विशाल भारद्वाज और डॉ. विग्नेश की अगुवाई मे अमृतसर पहुंचने से पहले विद्यार्थियों ने चंडीगढ़, पटियाला, लुधियाना और श्री आनंदपुर साहिब का भी दौरा किया। इन स्थानों पर उन्होंने पंजाब की शिक्षा, औद्योगिक विकास, ग्रामीण परंपराओं और धार्मिक विरासत को करीब से जाना।
आईआईएसईआर मोहाली के निदेशक प्रो. अनिल के. त्रिपाठी ने कहा कि युवा संगम विद्यार्थियों को कक्षा से बाहर निकलकर भारत की सांस्कृतिक विविधता, आध्यात्मिक विरासत और साझा मूल्यों को समझने का अवसर देता है। इस तरह के अनुभव आपसी समझ को बढ़ाते हैं, राष्ट्रीय एकता को मजबूत करते हैं और युवाओं को उन परंपराओं से परिचित कराते हैं जो देश को एक सूत्र में बांधती हैं।