मुंबई । अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव तथा कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के चलते हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में खुला। कारोबार की शुरुआत में निफ्टी 50 22.55 अंकों यानी 0.09 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,343.45 पर खुला। वहीं बीएसई सेंसेक्स 100 अंकों से अधिक टूटकर 77,892.92 के स्तर पर खुला, जो पिछले बंद स्तर से लगभग 0.15 प्रतिशत कम था।
व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप क्रमशः 0.36 प्रतिशत और 0.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। सेक्टरवार देखें तो, बाजार में सबसे अधिक कमजोरी निफ्टी मिडस्मॉल फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स में रही, जो 0.98 प्रतिशत तक फिसल गया। इसके अलावा, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी एफएमसीजी में भी 0.9 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। रियल्टी, सीमेंट, आईटी, ऊर्जा और निजी बैंकिंग शेयरों में भी बिकवाली का दबाव देखा गया।
हालांकि कुछ सेक्टरों में खरीदारी भी देखने को मिली। निफ्टी केमिकल्स इंडेक्स में 0.48 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी मिडस्मॉल हेल्थकेयर इंडेक्स लगभग 0.45 प्रतिशत मजबूत हुआ। निफ्टी50 इंडेक्स में एचसीएलटेक, इंफोसिस, टीएमपीवी, टीसीएस, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज और विप्रो के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई, जबकि इसके विपरीत, एचडीएफसी लाइफ, हिंडाल्को, मैक्स हेल्थ, ओएनजीसी, आयशर मोटर्स और टाइटन के शेयर बढ़त के साथ ट्रेड करते हुए नजर आए।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निकट अवधि में निफ्टी 24,000 से 24,600 अंकों के दायरे में कारोबार कर सकता है। उनका कहना है कि जब तक कोई नया सकारात्मक ट्रिगर सामने नहीं आता, तब तक बाजार सीमित दायरे में रह सकता है। विश्लेषकों के अनुसार, कच्चे तेल का भाव करीब 89 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ है और अमेरिका-ईरान संघर्ष के जल्द समाप्त होने की कोई स्पष्ट संभावना नहीं दिख रही है। ऐसे में ऊंचे तेल भाव बाजार में तेजी की संभावनाओं को सीमित कर सकते हैं। इसके अलावा, आईटी कंपनियों और बड़े बैंकिंग शेयरों का कमजोर प्रदर्शन भी सूचकांकों पर दबाव बनाए हुए है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक फिलहाल निफ्टी 50 के बाहर अवसर तलाश सकते हैं। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में स्टॉक-विशिष्ट गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं और पहली तिमाही के नतीजों के दौरान भी व्यापक बाजार ने बेहतर प्रदर्शन किया है। उनका कहना है कि यदि कॉरपोरेट आय में सुधार जारी रहता है, तो ऊंचे कच्चे तेल जैसी बाहरी चुनौतियों के बावजूद भारतीय शेयर बाजार को समर्थन मिल सकता है।
तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, पिछले सप्ताह 24,329 से 24,240 का स्तर निफ्टी के लिए मजबूत सपोर्ट साबित हुआ था और इस स्तर पर गिरावट थमती रही। हालांकि, बाजार की गति अभी भी कमजोर बनी हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि निफ्टी में किसी भी तेजी के प्रयास को 24,540 से 24,666 के बीच प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) का सामना करना पड़ सकता है। वहीं यदि सूचकांक 24,170 अंक के नीचे फिसलता है, तो गिरावट बढ़कर 23,575 अंक तक जा सकती है।
इस बीच, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पिछले सप्ताह की तेजी के बाद उच्च स्तरों पर बनी हुई हैं। अमेरिका-ईरान तनाव को लेकर चिंताओं के चलते निवेशक फिलहाल ऊर्जा बाजार की गतिविधियों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।