चंडीगढ़. पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने राज्य में नशाखोरी के मुद्दे पर विपक्ष पर तीखा हमला बोला। चीमा ने साफ तौर पर कहा कि पंजाब में नशे की एंट्री अकाली-भाजपा सरकार के समय में हुई थी और उस दौर में "नशा बेचा गया, फैलाया गया और सिस्टम के ज़रिए इसे संरक्षण मिला।" उन्होंने कहा, "आज जो हालात बने हैं, उनकी नींव उसी समय रखी गई थी जब अकाली दल की सरकारें नशे के धंधे को आंख मूंद कर देखती रहीं।"
कैप्टन के गुटका साहिब की कसमें याद दिलाईं
चीमा ने पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर भी निशाना साधते हुए कहा कि 2017 में उन्होंने गुटका साहिब को माथे से लगाकर कसम खाई थी कि 4 हफ्तों में नशा खत्म कर देंगे। “साढ़े चार साल कांग्रेस की सरकार रही, लेकिन नशे के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। फिर चरणजीत सिंह चन्नी को लाया गया लेकिन नतीजा वही रहा।” चीमा बोले कि जब जनता ने बदलाव चाहा तो आम आदमी पार्टी को सत्ता सौंपी, और मुख्यमंत्री भगवंत मान बने।
"हमने नशों के खिलाफ युद्ध शुरू किया"
चीमा ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार आते ही राज्य में "खेड़ा वतन पंजाब" जैसी मुहिम शुरू हुई, स्कूलों–कॉलेजों में प्रतियोगिताएं चलीं और नशे के खिलाफ एक वॉर लेवल एक्शन शुरू हुआ। "हमने पांच मंत्रियों की हाई लेवल कमेटी बनाई। पहले कहा जाता था कि सरकारें मगरमच्छों को नहीं पकड़तीं। लेकिन हमारी पुलिस ने बड़े मगरमच्छ को पकड़ा – तो कांग्रेस को दर्द होने लगा।"
प्रताप सिंह बाजवा से सीधी टक्कर
चर्चा के दौरान नेता विपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने टोका तो चीमा ने कहा, "आप बुजुर्ग हैं बाजवा साहब, आपको बातें भूल जाती हैं। आपने खुद कहा था रस्सा डालो मजीठिया पर। अब जब डाला, तो आपको दिक्कत क्यों है?" बाजवा ने जवाब दिया कि "तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर मत पेश करो" लेकिन चीमा अपने बयान पर कायम रहे।