चंडीगढ़ : शिरोमणि अकाली दल के नेता दलजीत सिंह चीमा ने कांग्रेस के लोकसभा सीटों को अगले 25 साल तक फ्रीज करने के प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे गलत, अतार्किक और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की भावना के खिलाफ बताया। दलजीत सिंह चीमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए कहा कि देश में लोकसभा सीटें पहले से ही लगभग 55 साल से फ्रीज हैं। 1971 में जब सीटें फ्रीज की गई थीं, तब भारत की आबादी केवल 54.8 करोड़ थी, जबकि आज आबादी लगभग 140 करोड़ के आसपास पहुंच गई है। ऐसे में संसदीय क्षेत्र बहुत बड़े और संभालने में मुश्किल हो गए हैं, जिससे प्रभावी प्रतिनिधित्व में दिक्कत आ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अगले 25 साल तक और फ्रीज रखा गया तो यह संकट और गहरा हो जाएगा।
दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि परिसीमन के बाद पंजाब और दक्षिण भारत के उन राज्यों को नुकसान होगा जिन्होंने जनसंख्या को नियंत्रित किया है। इन राज्यों की सीटें घट सकती हैं, जबकि मध्य और उत्तर भारत के ज्यादा आबादी वाले राज्यों की सीटें बढ़ जाएंगी। इससे देश के संघीय संतुलन पर बुरा असर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि सीटों को कृत्रिम रूप से सीमित रखने से युवा पीढ़ी के लिए राजनीतिक अवसर भी कम हो जाएंगे। एक और पीढ़ी तक सीटों की संख्या को रोकना युवा नेतृत्व के रास्ते बंद करने जैसा होगा। भारत को युवा नेतृत्व के लिए ज्यादा दरवाजे खोलने चाहिए, न कि बंद करने चाहिए।
दलजीत चीमा ने इसका समाधान भी सुझाया। उन्होंने कहा कि न तो अनिश्चितकाल तक सीटों को फ्रीज रखना सही है और न ही उन राज्यों को सजा देना सही है जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता हासिल की है।
उन्होंने कहा कि लोकसभा की कुल ताकत को एक समान रूप से 50 प्रतिशत बढ़ा दिया जाए और फिर परिसीमन किया जाए, जिसमें सभी राज्यों की सीटें एक समान रूप से 50 प्रतिशत बढ़ाई जाएं। इससे प्रतिनिधित्व बेहतर होगा, बढ़ती आबादी को जगह मिलेगी, युवा नेताओं के लिए ज्यादा मौके बनेंगे और देश का संघीय संतुलन भी बना रहेगा।