राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी की जांच की आंच से अब ट्रस्ट और मंदिर निर्माण समिति के बीच दूरियां बढ़ गई हैं। उधर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के तेवरों से भी खलबली मची है। नृपेंद्र मिश्रा ने खुलकर ट्रस्ट की कायैशली पर सवाल उठाया है। चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद से ही नृपेंद्र असलियत की जांच परखने में जुटे हैं। माना जा रहा है कि नृपेंद्र ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की पूरी जानकारी पीएमओ तक पहुंचा दी है। जिसके बाद वहां से हरी झंडी मिलने के बाद उनका साक्षात्कार चैनलों पर प्रसारित होने लगा। उन्होंने आपराधिक जांच और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए और व्यवस्थागत सुधार का संकेत दिया।
उनका मानना था कि जब तक दोनों पक्षों पर समान गंभीरता से काम नहीं होगा, तब तक श्रद्धालुओं का विश्वास पुनर्स्थापित नहीं किया जा सकेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि उन्होंने मंदिर प्रशासन में अनुभवी और कुशल सीईओ की नियुक्ति को जरूरी बताया। उनका कहना था कि राम मंदिर अब केवल स्थानीय धार्मिक संस्था नहीं रहा बल्कि विशाल राष्ट्रीय संस्थान एवं छोटे से शहर का रूप ले चुका है, इसलिए संचालन के लिए आधुनिक प्रबंधन प्रणाली को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि मंदिर केवल पूजा के केंद्र नहीं होते, वे समाज के नैतिक जीवन का आधार भी होते हैं। जब श्रद्धालु मंदिर में दान देता है तो केवल पैसा नहीं देता, बल्कि विश्वास भी सौंपता है।
राम मंदिर निर्माण के लिए हजारों कार्यकर्ताओं ने किया त्याग
उन्होंने कहा था कि किसी मंदिर में एक रुपये की भी गड़बड़ी होती है, तो उसका प्रभाव हजारों करोड़ रुपये की आर्थिक हानि से अधिक गंभीर होता है, क्योंकि इससे श्रद्धा को आघात पहुंचता है। राम मंदिर के मामले में यह संवेदनशीलता और बढ़ जाती है क्योंकि इस मंदिर के निर्माण के लिए दशकों तक संघर्ष चला। लाखों लोगों ने आंदोलन किया, हजारों कार्यकर्ताओं ने त्याग किया और करोड़ों लोगों ने आर्थिक सहयोग दिया। ऐसे में चढ़ावे के प्रबंधन में कोई भी अनियमितता सिद्ध होती है, तो दोषियों को केवल कानूनी नहीं, बल्कि नैतिक रूप से भी कठोर दंड मिलना चाहिए।
ट्रस्ट के पदाधिकारियों से खफा हैं निर्माण समिति के अध्यक्ष
सूत्र बताते हैं कि निर्माण समिति अध्यक्ष के बयान से ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारी अंदर ही अंदर खफा हो गए। उनका मानना था कि संकट के समय उनका साथ नही मिला और आरोप लगाने वाले कतारबद्ध हो गए। इससे श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और असहज मुद्रा में पहुंच गया। सूत्रों की मानें तो कई आरोप इस तरह के थे, जिनका खंडन ट्रस्ट कर सकता था लेकिन दिन प्रतिदिन जाल घना होता चला गया और समाज के सामने अपनी बात कहने का समय नहीं मिला।
अध्यक्ष ने पहले ही व्यापक फेरबदल का दिया था संकेत
वर्तमान परिदृश्य देखा जाय तो निर्माण समिति अध्यक्ष की कही गई बातें चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई के रूप में सामने आ रही हैं। केस दर्ज होने से लेकर आरोपियों की गिरफ्तारी तक हो चुकी हैं। यहां तक कि ट्रस्ट के प्रमुख लोगों के इस्तीफे तक की खबरें सोशल मीडिया पर तैर रही हैं, हालाकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। बताया तो यह भी जा रहा है कि अब कुछ में इनका दायित्व किसी अन्य को सौंपने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जल्द ही राम जन्मभूमि परिसर की व्यवस्थाओं में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।