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मोदी सरकार के 11 साल: देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था का इंजन बना यूपीआई, 59.6 करोड़ से भी ज़्यादा लेन-देन

09 जून, 2025 05:15 PM

भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की स्थिति रिपोर्ट 2024 से पता चलता है कि भारत अब अर्थव्यवस्था-व्यापी डिजिटलीकरण के मामले में वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा डिजिटल देश है और व्यक्तिगत उपयोगकर्ता डिजिटलीकरण के लिए G20 देशों में 12वें स्थान पर है। वहीं,आज सोमवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत कैशलेस क्रांति को अपना रहा है। प्रतिदिन 70,000 करोड़ रुपए से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन और एक दिन में 59.6 करोड़ लेनदेन के साथ डिजिटल पेमेंट्स अब मानक बन गए हैं।

वित्त मंत्रालय के मुताबिक सबसे अधिक वृद्धि डिजिटल इंटरमीडियरीज और प्लेटफार्मों के विकास से आने की संभावना है, इसके बाद बाकी अर्थव्यवस्था का ज्यादा डिजिटल प्रसार और डिजिटलीकरण होगा।

आपको बता दें, भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था 2029-30 तक राष्ट्रीय आय में लगभग पांचवें हिस्से के बराबर योगदान देगी। इसका मतलब है कि 6 साल से भी कम समय में, देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था का हिस्सा कृषि या विनिर्माण से ज्यादा हो जाएगा। भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था इसकी आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान करने वाले के रूप में उभरी है, जिसकी 2022-23 में जीडीपी (31.64 लाख करोड़ रुपये या 402 बिलियन अमेरिकी डॉलर) में 11.74% हिस्सेदारी थी। 14.67 मिलियन श्रमिकों (कार्यबल का 2.55%) को रोजगार देने वाली डिजिटल अर्थव्यवस्था बाकी अर्थव्यवस्था की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक उत्पादक है।

दरअसल, पिछले 11 वर्षों में भारत के हर सेक्टर में अभूतपूर्व परिवर्तन हुए हैं, भारत आज न केवल सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था है, बल्कि क्लाइमेट एक्शन और डिजिटल इनोवेशन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर एक प्रमुख वैश्विक भागीदार भी है। यूपीआई ने इस वर्ष मई में 18.68 बिलियन ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड कर मजबूत वृद्धि दर्ज की, जो अप्रैल में 17.89 बिलियन थे।

वित्‍त मंत्रालय के अनुसार, जनवरी, 2025 में यूपीआई लेन-देन की संख्या 16.99 बिलियन से अधिक हो गई और मूल्य ₹ 23.48 लाख करोड़ से अधिक हो गया, जो किसी भी महीने में दर्ज किया गया सबसे बड़ा आंकड़ा है।

वित्त वर्ष 2023-24 में, डिजिटल भुगतान परिदृश्य में शानदार प्रगति देखने को मिली। यूपीआई भारत के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम की आधारशिला बना हुआ है, जो देश भर में 80% खुदरा भुगतान में योगदान देता है। वित्त वर्ष 2023-24 के लिए कुल लेन-देन की संख्या 131 बिलियन से अधिक हो गई और मूल्य ₹200 लाख करोड़ से अधिक हो गया।

इसके इस्तेमाल में आसानी, भाग लेने वाले बैंकों और फिनटेक प्लेटफॉर्मों के बढ़ते नेटवर्क के साथ मिलकर, यूपीआई को देश भर के लाखों उपयोगकर्ताओं के लिए वास्तविक समय में भुगतान का पसंदीदा माध्यम बना दिया है।

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के आंकड़ों के अनुसार, यूपीआई ट्रांजैक्शन पिछले वर्ष इसी महीने 14.03 बिलियन ट्रांजैक्शन की तुलना में सालाना आधार पर 33 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है। पिछले महीने मूल्य के हिसाब से यूपीआई ट्रांजैक्शन बढ़कर 25.14 लाख करोड़ रुपए हो गया, जो अप्रैल में 23.95 लाख करोड़ रुपए से 5 प्रतिशत अधिक है।

यह पिछले वर्ष मई में 20.45 लाख करोड़ रुपए से लगभग 23 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। मई में एवरेज डेली ट्रांजैक्शन की मात्रा 602 मिलियन रही, जबकि एवरेज डेली ट्रांजैक्शन अमाउंट 81,106 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।

गौरतलब हो, यूपीआई ने भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम में अपना प्रभुत्व मजबूत किया है और कुल ट्रांजैक्शन की मात्रा में इसकी हिस्सेदारी पिछले वित्त वर्ष के 79.7 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 83.7 प्रतिशत हो गई है।

वहीं, आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट से पता चलता है कि यूपीआई ने 2024-25 के दौरान 185.8 बिलियन ट्रांजैक्शन की सुविधा प्रदान की, जो सालाना 41 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। मूल्य के संदर्भ में, यूपीआई ट्रांजैक्शन वित्त वर्ष 24 में 200 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 261 लाख करोड़ रुपए हो गया।

वित्तीय सेवाएं विभाग (डीएफएस) के आर्थिक सलाहकार ने सुधीर श्याम ने इस वर्ष के फरवरी माह में कहा कि भारत की डिजिटल भुगतान क्रांति अपनी सीमाओं से परे बढ़ रही है। यूपीआई वैश्विक स्तर पर तेजी से विस्तार कर रहा है, जिससे विदेश यात्रा करने वाले भारतीयों के लिए निर्बाध सीमा पार लेन-देन सक्षम हो रहा है।

वर्तमान में, यूपीआई 7 से अधिक देशों में उपलब्ध है, जिसमें [यूएई, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस] जैसे प्रमुख बाजार शामिल हैं, जो भारतीयों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भुगतान करने की अनुमति देते हैं। यह विस्तार रिमिटेंस के प्रवाह को और बढ़ाएगा, वित्तीय समावेशन में सुधार करेगा और वैश्विक वित्तीय परिदृश्य में भारत का कद बढ़ाएगा। सुंदर ने यह भी कहा कि कुछ अन्य देशों ने भी यूपीआई में रुचि दिखाई है।

वहीं, कैम्ब्रिज बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर कार्लोस मोंटेस का कहना है कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) दूसरे देशों को भारतीय अनुभव से सीखने का अवसर देता है।

 
 

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