सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय गुणवत्ता आधारित और पर्यावरण-अनुकूल विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए MSME Sustainable (Zero Defect, Zero Effect-ZED) Certification Scheme को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। योजना के तहत महिला स्वामित्व वाले MSMEs को ZED सर्टिफिकेशन के लिए 100 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है, जिससे उनके लिए प्रमाणन की लागत पूरी तरह समाप्त हो गई है।
सरकार ने यह सुविधा 11 नवंबर 2023 से लागू की है, ताकि महिला उद्यमी गुणवत्ता, उत्पादकता, सुरक्षा और पर्यावरणीय मानकों को अपनाकर अपने कारोबार को अधिक प्रतिस्पर्धी बना सकें।
MSME मंत्रालय के अनुसार, ZED योजना का उद्देश्य उद्योगों को ‘जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट’ सिद्धांत के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाने और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह योजना MSMEs को तकनीक उन्नयन, उत्पादन प्रक्रिया में सुधार और टिकाऊ विनिर्माण अपनाने में भी मदद करती है।
योजना के तहत MSMEs को ब्रॉन्ज, सिल्वर और गोल्ड श्रेणियों में प्रमाणन दिया जाता है। पात्र इकाइयों को परीक्षण, सिस्टम और उत्पाद प्रमाणन पर 75 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता (अधिकतम 50,000 रुपये), हैंडहोल्डिंग और कंसल्टेंसी के लिए 2 लाख रुपये तक, तथा प्रदूषण नियंत्रण और स्वच्छ तकनीक अपनाने के लिए 3 लाख रुपये तक की सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है।
सरकार के अनुसार, 7 जुलाई 2026 तक करीब 9.49 लाख MSMEs इस योजना के तहत पंजीकृत हो चुके हैं। इनमें 6.67 लाख से अधिक ब्रॉन्ज, 6,700 सिल्वर और 4,800 गोल्ड ZED सर्टिफिकेशन जारी किए गए हैं। योजना के तहत अब तक 913 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता भी प्रदान की जा चुकी है।
योजना का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी औद्योगिक नीतियों में ZED को शामिल कर प्रमाणित MSMEs के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन की व्यवस्था की है। वहीं, 19 वित्तीय संस्थान ZED प्रमाणित इकाइयों को प्रोसेसिंग शुल्क और ब्याज दरों में रियायत जैसी सुविधाएं दे रहे हैं, जिससे उन्हें वित्तीय सहायता प्राप्त करना आसान हो रहा है।
MSME मंत्रालय ने दो सफलता की कहानियां भी साझा की हैं। महाराष्ट्र के नासिक स्थित फाइनेक्स इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड ने ZED सिल्वर सर्टिफिकेशन प्राप्त करने के बाद खराब गुणवत्ता से होने वाली लागत (COPQ) में 11 प्रतिशत, रीवर्क में 10 प्रतिशत और उत्पाद दोषों में 1 प्रतिशत की कमी दर्ज की। वहीं, पंजाब के जालंधर स्थित कॉन्सेप्ट क्लोदिंग प्राइवेट लिमिटेड ने ZED अपनाने के बाद कार्यस्थल दुर्घटनाओं में 80 प्रतिशत, रीवर्क में 7.4 प्रतिशत और रिजेक्शन में 4 प्रतिशत की कमी हासिल की।
सरकार का मानना है कि ZED सर्टिफिकेशन गुणवत्ता, संसाधनों के कुशल उपयोग और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देकर भारतीय MSMEs की घरेलू और वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को और मजबूत करेगा।