फरीदाबाद : राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की ओर से महिला विधायकों के लिए फरीदाबाद में 'शी इज अ चेंज मेकर' नाम से दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम में 22 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों से महिला जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला का उद्देश्य महिला विधायकों की नेतृत्व क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ उन्हें महिलाओं से जुड़े कानूनों, नीतियों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन की जानकारी देना रहा। राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरपर्सन विजया रहाटकर ने कहा कि देशभर की महिला विधायकों को एक मंच पर लाकर उनके क्षमता संवर्धन के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि महिला जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। क्षेत्र के विकास में केवल इंफ्रास्ट्रक्चर ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि महिलाओं के लिए बनाए गए कानूनों और नीतियों को जमीनी स्तर पर लागू करना भी जरूरी है। कई महिलाएं संकट और कठिन परिस्थितियों से गुजरती हैं। ऐसे में महिला जनप्रतिनिधियों को यह समझना जरूरी है कि वे अपने क्षेत्र की महिलाओं की समस्याओं के समाधान में किस तरह प्रभावी भूमिका निभा सकती हैं।
रहाटकर ने कहा कि लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान हो चुका है और इसका प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है। महिलाओं को केवल राजनीतिक भागीदारी देने तक सीमित नहीं किया जा सकता, बल्कि वे नेतृत्व करने की क्षमता भी रखती हैं। महिला जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र की समस्याओं को अलग दृष्टिकोण से देख सकती हैं। एक महिला प्रतिनिधि अपने क्षेत्र को मां के स्नेह और अधिकार की भावना के साथ देखते हुए विकास की जरूरतों को समझ सकती है। हर क्षेत्र में अलग-अलग चुनौतियां होती हैं और जनप्रतिनिधियों को उन चुनौतियों को स्वीकार करते हुए लगातार अपनी क्षमताओं को विकसित करना चाहिए।
एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष ने बताया कि आयोग संकट में फंसी महिलाओं की शिकायतों पर सुनवाई करता है। इसके साथ ही आयोग अब फील्ड में जाकर भी महिलाओं की समस्याओं को समझने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि 'राष्ट्रीय महिला आयोग आपके द्वार' कार्यक्रम के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर महिलाओं से सीधे संवाद किया जा रहा है। महिलाओं के लिए बनाए गए कानूनों और उनके अधिकारों को लेकर जागरूकता पैदा करने के लिए भी आयोग की ओर से विभिन्न कार्यक्रम चलाए जाते हैं।
रहाटकर ने बताया कि आयोग के पास स्वतः संज्ञान लेने का अधिकार भी है। इसके अलावा महिलाओं से जुड़े विभिन्न विषयों पर शोध किया जाता है और उसके निष्कर्षों के आधार पर केंद्र सरकार को सुझाव दिए जाते हैं। देश में महिलाओं के लिए कई महत्वपूर्ण कानून और नीतियां मौजूद हैं, लेकिन अब जरूरत जागरूकता बढ़ाने की है। उन्होंने देश की बेटियों से अपील की कि पढ़ाई और करियर के साथ उन्हें अपने संरक्षण और अधिकारों के लिए बनाए गए कानूनों और नीतियों की जानकारी भी रखनी चाहिए। कानूनों की जानकारी महिलाओं को अपनी समस्याओं को समझने और जरूरत पड़ने पर उचित सहायता हासिल करने में मदद कर सकती है।
महिलाओं के खिलाफ बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों पर रहाटकर ने कहा कि राष्ट्रीय महिला आयोग ऐसे मामलों को गंभीरता से लेता है और जल्द सुनवाई की जरूरत पर जोर देता है। कई स्थानों पर फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था है, जिसके माध्यम से ऐसे मामलों की सुनवाई में तेजी लाई जा सकती है। हालांकि उन्होंने कहा कि केवल पुलिस और न्यायपालिका की जिम्मेदारी से ऐसे गंभीर मामलों का समाधान नहीं होगा। पुलिस, न्यायपालिका और प्रशासन अपनी-अपनी भूमिका निभाते हैं, लेकिन समाज को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराधों जैसे मुद्दों पर पूरे समाज को मिलकर चर्चा करनी चाहिए और रोकथाम तथा जागरूकता के लिए सामूहिक प्रयास करना चाहिए। महिला सुरक्षा केवल सरकारी व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।