सिरसा। (सतीश बंसल)दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से 5 सितंबर से 11 सितंबर तक। होने वाली श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के प्रचार हेतु संध्या फेरिया की श्रृंखला के अंतर्गत पांचवीं संध्या फेरी निकाली गई। यह संध्या फेरी प्राचीन श्री श्याम मंदिर से प्रारंभ हुई, जिसका आरंभ रोजाना की तरह प्रभु के पूजन और नारियल फोडक़र किया गया। पूजन के दौरान मंदिर कमेटी तारा शर्मा, सुनील कुमार शर्मा, तेजपाल शर्मा, रमन सराफ, राजकुमार सिंघल, मनीष सोनी, हेमंत साहुवाला, दीपक, ललित मोंगा, भारती शर्मा विशेष रूप से शामिल हुए। इस अवसर पर साध्वी संतोष भारती ने बताया कि आज संपूर्ण भारत के अंदर तीज का त्यौहार बड़े धूमधाम से मना रहे हैं। मगर एक ओर समाज में महिलाओं के साथ बढ़ती हिंसा एवं अपराध है, दूसरी ओर बढ़ता मार्केटिंग बाजार एवं उपभोक्तावाद है। ऐसे परिवेश में विज्ञापन चित्रों, चलचित्रों इत्यादि के माध्यम से महिलाओं का वस्तु या पदार्थ रूप में मूल्यांकन अर्थात वास्तुकार पूरे जोरों पर है। यह प्रक्रम प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दोनों ही रूपों में महिलाओं को बार-बार यह अहसास दिलाता है कि तुम मात्र एक भोगने की वस्तु हो। ऐसा समाज जो नारी को उसका अधिकृत स्थान एवं सम्मान प्रदान नहीं करता। इसलिए जब-जब पुरुष प्रधान समाज ने नारी को शौर्य बल विहीन अबला और मात्र कामिनी के रूप में देखकर उसके समर्थ का न्यूनतम आकलन किया। तब-तब समाज में जाग्रति का आगाज हुआ। जागृत महिलाएं परिवर्तन प्रतिनिध बनकर सामने आई। सामाजिक भ्रांतियां की अदृश्य ग्लास सीलिंग को आत्म बल के आधार पर पहले स्वयं उन्होंने पार किया और फिर अग्रणी होकर अन्य महिलाओं को भी इसे पार करवाया। ऐसा आज नहीं वैदिक में भी हुआ। वैदिक युगीन ब्रह्मवादिनी गार्गी ने साधारण महिलाओं, बच्चियों के लिए प्रथम गुरुकुल शुरू किया। त्रेता में देवी सीता ने अपने पति श्री राम के साथ वनवास धारण कर नारियों के सुकोमल तथा निर्बल होने की अवधारणा का प्रयोगात्मक खंडन किया। ऋषि अत्री की पत्नी देवी अनुसूया ने अपनी आत्मिक शक्ति के बल पर वन में सरोवर प्रकट किया। एक समाज सेविका की भूमिका में प्राकृतिक संतुलन के अनुरक्षण हेतु प्रयास किया। द्वापर में सती द्रौपदी ने अपनी आत्मिक शक्ति के बल पर स्वयं के निर्वस्त्र किए जाने के प्रयास को विफल किया। कलयुग में भक्ति मति मीराबाई ने सामाजिक पटल पर सती प्रथा व घूंघट प्रथा का विरोध किया। रानी लक्ष्मीबाई ने स्त्रियों की सेना तैयार कर अंग्रेजों से लोहा लिया। इन सभी दृष्टांतों में नारी ने ससीम देह बल से असीम आत्म बल की यात्रा को तय किया। ऐसे प्रयास स्वयं के लिए ही नहीं समाज के भी कल्याणकारी सिद्ध हुए। साध्वी जी ने बताया कि ऐसे ही तथ्यों से अवगत करवाने के लिए हमारे बीच पहुंच रही है, सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की परम शिष्या साध्वी कालिंदी भारती। इस अवसर पर सुषमा देवी, वेद मान स्वरूप, रतिराम, संदीप सतनाली, राजेश महिपाल, वेद प्रकाश, सुभाष खेमका भी सम्मिलित हुए। इस संध्या फेरी का समापन प्रभु की पावन आरती के साथ किया गया।