भिवानी : जयपुर से पहुंचे भजन सम्राट गिरधर दास ने ऐसा समां बांधा की छोटी कांशी के श्रद्धालु भक्तिमय माहौल में ओत प्रोत हो गए। मौका था भिवानी के दादरी गेट राजश्री बैंकेट हाल में आयोजित भव्य भजन संध्या का।
अग्रवाल वैश्य समाज भिवानी के तत्वाधान में आयोजित नवरात्रि महोत्सव भव्य भजन संध्या का शुभारंभ व्रन्दावन बांके बिहारी मंदिर के प्रमुख गोंसाई कन्हैया लाल ने दीप प्रज्वलन के साथ किया।भजन संध्या में महोत्सव की अध्यक्षता मुख्यातिथि के तौर पर कलकत्ता से पहुंचे मोहन कुमार चिड़ीपाल ने की।
मुख्यातिथि चिड़ीपाल ने भिवानी में अग्रवाल वैश्य समाज की तरफ से चल रहे विभिन्न प्रोजेक्ट्स के कार्यो को अच्छे तरीके से समझा व सुना,इसके पश्चात उन्होंने कहा कि समर्पित भाव से किये जा रहे कार्य प्रशंसा के योग्य हैं,जो कि अविरल चलना बेहद आवश्यक हैं।
भजन संध्या में साक्षी के रूप में संत रामझुलन दास महाराज, श्री दादू सेवक समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला, अग्रवाल वैश्य समाज भिवानी के अध्यक्ष सतीश वैध, महासचिव आशीष मितल, कोषाध्यक्ष अखिल मितल, ललित मितल, उमेश बंसल, महिला प्रधान मनीषा बंसल, प्रवीण अग्रवाल, मनोज गर्ग, सुमित डालमिया रहे। तत्पश्चात भजन सम्राट गिरधर दास ने ऐसा भक्तिमय मर्म छेड़ा की क्या महिला-क्या पुरूष सब हो गए ओत प्रोत।
भजन सम्राट की पवित्र वाणी से
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गयी मगन।
वो तो गली गली हरी गुण गाने लगी।
महलों में पली, बन के जोगन चली।
मीरा रानी दीवानी कहाने लगी।
राणा ने विष दिया मानो अमृत पिया।
मीरा सागर मे सरिता सामने लगी।
दुख लाखो सहे मुंह से गोविंदा कहे।
मीरा गोविंद गोपाला गाने लगी।
वहीं राधा और मीरा की पिपासा के स्वर छेड़ते हुए एक राधा, एक मीरा, दोनों ने श्याम को चाहा। अंतर क्या दोनों की चाह में बोलो, एक प्रेम दीवानी, एक दरस दीवानी। इस अवसर पर भजन संध्या के अंतिम पलों में अग्रवाल वैश्य समाज की तरफ से समर्पित व निष्ठाभाव से निभाये जा रहे कार्यो को आये हुए मेहमानों ने शपथ के साथ आगे बढ़ाने का भी प्रण लिया।