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बजट 2026: देश में बनेंगी 5 यूनिवर्सिटी टाउनशिप, शिक्षा-रिसर्च और स्किल का होगा एकीकृत मॉडल

01 फ़रवरी, 2026 07:24 PM

केंद्रीय बजट 2026-27 में शिक्षा को लेकर एक बड़ी और दूरगामी घोषणा की गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में बताया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप बनाई जाएंगी। खास बात यह है कि ये सभी यूनिवर्सिटी टाउनशिप प्रमुख औद्योगिक और लॉजिस्टिक कॉरिडोर के आसपास विकसित की जाएंगी। ऐसे में इसका सीधा लाभ यहां पढ़ने वाले छात्रों को मिलेगा। यह पहल इसलिए की जा रही है ताकि इंडस्ट्री और रोजगार सीधे उच्च शिक्षा के साथ जुड़ सकें।

सरकार ने साफ किया है कि इन यूनिवर्सिटी टाउनशिप को बनाने में केंद्र सरकार विभिन्न राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करेगी। यानी यूनिवर्सिटी बनाने, ढांचा खड़ा करने और सुविधाएं विकसित करने में राज्यों को केंद्र की मदद मिलेगी। इस पूरी योजना का मकसद यह है कि हर क्षेत्र की जरूरत के हिसाब से आधुनिक और मजबूत शिक्षा संस्थान तैयार किए जाएं। इन यूनिवर्सिटी टाउनशिप में छात्रों के लिए हर तरह की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यहां रहने के लिए बड़े रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स होंगे, ताकि बाहर से आने वाले छात्रों को किसी तरह की परेशानी न हो।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि इसके साथ-साथ इन विश्वविद्यालयों में स्किल सेंटर बनाए जाएंगे, जहां पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा टाउनशिप यूनिवर्सिटी में हाईटेक लेबोरेटरी, आधुनिक कॉलेज, रिसर्च सेंटर और इनोवेशन हब भी होंगे। छात्रों और शोधार्थियों को अत्याधुनिक तकनीक और सुविधाएं मिलेंगी, जिससे रिसर्च, स्टार्ट-अप और नए आइडियाज को बढ़ावा मिलेगा। यहां सरकार का फोकस सिर्फ डिग्री देने पर नहीं होगा, बल्कि छात्रों को इंडस्ट्री-रेडी बनाने पर ध्यान केंद्रित करना है।

सरकार का मानना है कि ये पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप न सिर्फ शिक्षा की गुणवत्ता सुधारेंगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए मौके भी पैदा करेंगी। आसपास के इलाकों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और युवाओं को अपने ही क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। कुल मिलाकर, बजट में की गई यह घोषणा शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, जो आने वाले वर्षों में देश की युवा शक्ति को मजबूत करने और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगी। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में यह भी बताया कि पूर्वी भारत में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (एनआईडी) खोला जाएगा।

इसका सीधा मकसद है कि इस क्षेत्र में डिजाइन की पढ़ाई, क्रिएटिव सोच और इनोवेशन को मजबूती मिले। अभी तक डिजाइन से जुड़े अधिकांश बड़े और नामी संस्थान देश के कुछ चुनिंदा हिस्सों तक ही सीमित रहे हैं। ऐसे में पूर्वी भारत के छात्रों को या तो बाहर जाना पड़ता है या अच्छे मौके नहीं मिल पाते। नया एनआईडी खुलने से स्थानीय छात्रों को अपने ही इलाके में विश्वस्तरीय डिजाइनिंग की शिक्षा मिल सकेगी। इस संस्थान में प्रोडक्ट डिजाइन, फैशन, ग्राफिक डिजाइनिंग, इंडस्ट्रियल डिजाइनिंग और डिजिटल डिजाइनिंग जैसे कोर्स कराए जाने की उम्मीद है। यहां से निकलने वाले युवा न सिर्फ नौकरी के लिए तैयार होंगे, बल्कि स्टार्ट-अप शुरू करने और नए प्रोडक्ट विकसित करने में भी सक्षम होंगे।

सरकार का मानना है कि डिजाइन आज सिर्फ कला तक सीमित नहीं है, बल्कि मेक इन इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों का अहम हिस्सा बन चुका है। अच्छा डिजाइन होने से भारतीय प्रोडक्ट अंतरराष्ट्रीय बाजार में ज्यादा पसंद किए जाते हैं। नया एनआईडी इस दिशा में बड़ा सहारा बनेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इसके साथ ही, इस संस्थान से पूर्वी भारत के औद्योगिक और आर्थिक विकास को भी रफ्तार मिलेगी। स्थानीय उद्योगों को बेहतर डिजाइन सपोर्ट मिलेगा, रोजगार के नए मौके बनेंगे और क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने में मदद मिलेगी। शिक्षाविदों के मुताबिक पूर्वी भारत में एनआईडी की स्थापना को क्रिएटिव इंडस्ट्री को बढ़ावा देने, युवाओं को नए अवसर देने और देश के संतुलित विकास की दिशा में एक अहम कदम माना जा सकता है।

 

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