नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और निर्वाचन आयोग (ईसी) के बीच कड़वाहट अपने चरम पर पहुंच गई है। बुधवार को दिल्ली में चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ और टीएमसी प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई महज सात मिनट की मुलाकात एक बड़े विवाद के साथ समाप्त हुई। टीएमसी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, चुनाव आयोग की तरफ से भी सफाई दी गई और टीएमसी नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दरअसल सांसद डेरेक ओ’ब्रायन के नेतृत्व में टीएमसी का प्रतिनिधिमंडल बुधवार सुबह दिल्ली में चुनाव आयोग से मिलने पहुंचा था। डेरेक ने कहा कि हमने एसआईआर के मुद्दे पर समय मांगा था, लेकिन मीटिंग के दौरान हमारे साथ खराब व्यवहार किया गया। मुख्य चुनाव आयुक्त ने हमें सिर्फ पांच मिनट में भगा दिया।
डेरेक ओ’ब्रायन ने दावा किया कि जब प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के अधिकारियों के तबादलों और भाजपा के साथ उनके कथित संबंधों के सबूत सौंपे तो मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने उनसे कहा कि ‘दफा हो जाओ’। टीएमसी का कहना है कि 10:02 बजे शुरू हुई यह बैठक 10:07 बजे ही खत्म हो गई। डेरेक के अनुसार, ज्ञानेश कुमार के अलावा किसी अन्य चुनाव आयुक्त ने एक शब्द भी नहीं बोला। दूसरी ओर, चुनाव आयोग के सूत्रों ने टीएमसी के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे झूठ करार दिया है। आयोग के सूत्रों ने कहा है कि डेरेक चुनाव आयुक्तों पर चिल्ला रहे थे और उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को बोलने तक नहीं दिया। सीईसी ज्ञानेश कुमार ने कथित तौर पर डेरेक से मर्यादा बनाए रखने का अनुरोध किया और कहा कि चीखना-चिल्लाना और अभद्र व्यवहार आयोग के कक्ष में उचित नहीं है।