केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में देशभर के किसान संगठनों के शीर्ष नेताओं के साथ प्रस्तावित ‘सीड बिल’ को लेकर व्यापक संवाद किया। बैठक में लगभग सभी राज्यों के किसान प्रतिनिधियों ने कानून के विभिन्न प्रावधानों पर सुझाव दिए, जबकि शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के जमीनी अनुभवों को ध्यानपूर्वक सुना और भरोसा दिलाया कि सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार करने के बाद ही कानून को अंतिम रूप दिया जाएगा।
1966 का कानून अब समय के अनुकूल नहीं
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मौजूदा बीज अधिनियम 1966 में बना था और बीज नियंत्रण आदेश 1983 में लागू हुआ था। समय के साथ कृषि क्षेत्र में बड़े बदलाव आए हैं और नई चुनौतियां सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि खराब या नकली बीज के लिए जिम्मेदारी तय करने की मौजूदा व्यवस्था प्रभावी नहीं है, जिसके कारण ऐसे बीज बाजार में पहुंच जाते हैं।
18 हजार सुझावों के बाद फिर शुरू हुआ संवाद
मंत्री ने बताया कि नवंबर-दिसंबर 2025 में प्रस्तावित बीज बिल के मसौदे पर सार्वजनिक सुझाव मांगे गए थे और किसानों तथा किसान संगठनों से करीब 18,000 सुझाव प्राप्त हुए थे। उन्होंने कहा कि अब किसान संगठनों के साथ सीधे संवाद की प्रक्रिया शुरू की गई है, क्योंकि किसानों के बीच काम करने वाले संगठन उनकी वास्तविक समस्याओं से परिचित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून लाने में कोई जल्दबाजी नहीं की जाएगी और सुझाव लेने की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
70% बीज मौजूदा कानून के दायरे से बाहर
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वर्तमान में करीब 70% बीज मौजूदा बीज अधिनियम के दायरे से बाहर हैं। राज्यों में बीजों को लेकर अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं और मौजूदा कानून में दंड के प्रावधान भी पर्याप्त प्रभावी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इन कमियों को दूर करने के लिए नया और अधिक प्रभावी सीड बिल जरूरी है, ताकि नकली और घटिया बीजों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
किसानों के अधिकारों की पूरी गारंटी
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित कानून से किसानों के अधिकारों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। किसान अपने पारंपरिक और कृषक किस्मों के बीजों का इस्तेमाल, आपस में आदान-प्रदान और विक्रय स्वतंत्र रूप से कर सकेंगे। पारंपरिक बीजों के लिए पंजीकरण अनिवार्य नहीं होगा। यदि कोई किसान अपनी किस्म का पंजीकरण कराना चाहता है तो उसके लिए स्वैच्छिक पंजीकरण की सुविधा होगी।
व्यक्तिगत इस्तेमाल और गांव में बांटने पर पंजीकरण नहीं
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसान को अपने इस्तेमाल के लिए बीज तैयार करने, गांव में बांटने या किसी कंपनी के लिए बीज का उत्पादन करने की स्थिति में अनिवार्य डिजिटल पंजीकरण की जरूरत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि किसानों के पारंपरिक बीजों और उनके अधिकारों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
अपराधों के लिए प्रभावी दंड व्यवस्था का प्रस्ताव
प्रस्तावित सीड बिल में अपराधों को तीन श्रेणियों में बांटने की बात कही गई है। छोटी चूक के मामले में पहली बार चेतावनी और दूसरी बार अधिक जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है। सरकार का उद्देश्य बीज की गुणवत्ता से जुड़े नियमों को अधिक प्रभावी बनाना और किसानों को नकली बीजों से सुरक्षा देना है।
किसान संगठनों के सुझावों पर होगा गंभीरता से विचार
बैठक में भारतीय किसान संघ, बीकेयू के विभिन्न घटक, अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति, किसान महापंचायत, भारतीय कृषक समाज सहित कई राज्यों के किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसान प्रतिनिधियों की ओर से दिए गए सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और जो सुझाव व्यवहारिक एवं किसानों के हित में होंगे, उन्हें अंतिम मसौदे में शामिल किया जाएगा।
किसानों से संवाद और सहमति पर बनेगी नीति
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार हर नीति किसानों से संवाद और सहमति के आधार पर तय करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून का उद्देश्य किसानों के हितों को केंद्र में रखते हुए ऐसा मजबूत तंत्र तैयार करना है, जो नकली और घटिया बीजों की समस्या का प्रभावी समाधान कर सके।
अन्य हितधारकों से भी जारी है चर्चा
अन्य स्टेकहोल्डर्स से बातचीत के सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सभी संबंधित पक्षों के साथ चर्चा की जा रही है, लेकिन इसमें किसान सबसे प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि खेती का आधार किसान है और इसलिए सीड बिल तैयार करते समय किसानों के अनुभव और सुझावों को सर्वोच्च महत्व दिया जा रहा है।
समृद्ध और आत्मनिर्भर किसान के विजन पर जोर
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पीएम मोदी के समृद्ध और आत्मनिर्भर किसान के विजन को आगे बढ़ाते हुए यह कानून तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार किया जाने वाला नया कानून किसानों को नकली बीजों की समस्या से राहत देने और कृषि क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण बीज व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।