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पंजाब

पंजाब सरकार ने अवैध माइनिंग पर रोक लगाने, आपूर्ति और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए माइनिंग क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार किए

07 जनवरी, 2026 07:26 PM

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने प्रदेश के माइनिंग क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार किए हैं। इसके तहत पंजाब माइनर मिनरल पॉलिसी में महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दी गई है, जिसका उद्देश्य कच्चे माल की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना, अवैध खनन और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना, उपभोक्ताओं के लिए कीमतों में कटौती करना, प्रदेश का राजस्व बढ़ाना और एकाधिकार को खत्म करना है।

विभिन्न स्तरों पर हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद मंत्रिमंडल ने इन संशोधनों को मंजूरी दी है, जिनके तहत नई माइनिंग श्रेणियां शामिल की गई हैं, नीलामी प्रणाली को आधुनिक बनाया गया है और रेगुलेटरी प्रक्रियाओं को सरल किया गया है। ये महत्वपूर्ण सुधार माइनिंग क्षेत्र में पारदर्शिता, निष्पक्षता और नागरिक-हितैषी शासन की दिशा में ऐतिहासिक बदलाव के गवाह हैं। इन सुधारों पर बोलते हुए खनन एवं भू-विज्ञान मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि हमारी सरकार खनन क्षेत्र की जटिलताओं को खत्म करने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग लोगों के हित में किया जाए। उन्होंने कहा कि हम पारदर्शी ऑनलाइन नीलामी प्रक्रियाओं की ओर कदम बढ़ाकर राज्य के राजस्व को बढ़ा रहे हैं और वास्तविक ऑपरेटरों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करते हुए अवैध खनन पर अंकुश लगा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि वर्षों से पंजाब के माइनिंग क्षेत्र को अधिकृत खनन साइटों की बड़ी कमी का सामना करना पड़ा। प्रदेश भर में केवल 35 के करीब खदानें कार्यशील होने के कारण सड़कों, आवासीय कार्यों और बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्टों के लिए आवश्यक निर्माण सामग्री की मांग की तुलना में कानूनी आपूर्ति बहुत कम रही। इस अंतर ने एक खालीपन पैदा किया, जिसके कारण अवैध खनन और गैर-रैगूलेटिड सप्लाई चैनों ने पैर पसार लिये। इस संरचनात्मक समस्या के समाधान के लिए पंजाब सरकार ने एक स्पष्ट रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाया। अवैध गतिविधियों के बजाय सरकार ने खनन आपूर्ति को धीरे-धीरे कानूनी दायरे में लाने का फैसला किया। इसके तहत ऑपरेटरों को आगे आकर मौजूदा खनन गतिविधियों की जानकारी देने, आवश्यक दस्तावेजी कार्य पूरा करने और निर्धारित रेगुलेटरी ढांचे के भीतर सख्ती से काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि माइनिंग जारी रहेगी, लेकिन केवल तभी जब यह कानूनी रूप से पारदर्शी तरीके से और उचित मंजूरियों के साथ की जाएगी।


स्थानीय उद्योग की मजबूती के लिए क्रशर माइनिंग साइटें
संशोधित नीति के तहत एक बड़ा सुधार क्रशर उद्योग को लंबे समय से पेश मुद्दों के समाधान के लिये क्रशर माइनिंग साइटों (सी.आर.एम.एस.) की शुरुआत है। पहले खनन सामग्री की नीलामी विभाग द्वारा वाणिज्यिक माइनिंग साइटों तक सीमित थी, जिसके कारण कच्चे माल की निरंतर कमी बनी रही। क्रशर मालिकों के पास बजरी के भंडार वाली जमीन होने के बावजूद इसका उपयोग करने की अनुमति न होने से क्रशर मालिक सी.एम.एस. आऊटपुट पर निर्भर थे या अन्य राज्यों से अक्सर ऊंची कीमतों पर सामग्री लेने को मजबूर थे।

सी.आर.एम.एस. ढांचे के तहत क्रशर मालिक जिनके पास बजरी के भंडार वाली जमीन है, अब अपने कार्य के लिए माइनिंग लीज़ और खनन सामग्री प्राप्त कर सकते हैं। यह उम्मीद की जा रही है कि इस सुधार से बजरी और रेत की उपलब्धता में काफी वृद्धि होने के साथ-साथ पंजाब भर में विकास कार्यों में तेजी आएगी, अन्य राज्यों पर निर्भरता कम होगी जिससे प्रदेश भर में विकास कार्यों को मजबूती मिलेगी। इससे अन्य राज्यों पर निर्भरता घटेगी, अवैध अंतर-राज्यीय खनिज आवाजाही पर रोक लगेगी, प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, क्रशर उद्योग की कार्यक्षमता में सुधार आएगा, राज्य की आय में वृद्धि होगी और उपभोक्ताओं के लिए कीमतों में कमी आएगी।


किसानों को सशक्त बनाने और एकाधिकार समाप्त करने के लिए लैंड-ओनर माइनिंग साइटें
सरकार ने रेत माइनिंग के संबंध में मौजूदा वाणिज्यिक माइनिंग साइटों और सार्वजनिक माइनिंग साइटों के अलावा लैंड-ओनर माइनिंग साइटें (एलएमएस) भी शुरू की हैं। पहले रेत माइनिंग कार्यों में अक्सर बाधाएं आ जाती थीं क्योंकि भूमि मालिक अनजान ऑपरेटरों को अपनी जमीन पर आने की अनुमति देने से हिचकिचाते थे। इसके अतिरिक्त, वास्तविक भूमि मालिक अपनी जमीन पर स्वयं माइनिंग की अनुमति लेने के लिए बार-बार सरकार से संपर्क भी करते रहते थे।

एलएमएस ढांचा अब राज्य सरकार को रॉयल्टी का भुगतान करने पर भूमि मालिकों को स्वयं या अधिकृत व्यक्तियों के माध्यम से अपनी जमीन से रेत माइनिंग की अनुमति देता है। यह सुधार कानूनी माइनिंग साइटों की संख्या बढ़ा रहा है, जिससे रेत की आपूर्ति और राज्य का राजस्व बढ़ेगा, उपभोक्ताओं की कीमतें घटेंगी और पंजाबियों के लिए व्यापार के नए अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा, यह भी सुनिश्चित होगा कि प्रत्येक योग्य भूमि मालिक माइनिंग लीज़ प्राप्त कर सके और माइनिंग सामग्री को खुले बाजार में बेच सके, जिससे एकाधिकार को समाप्त करने में बड़ी मदद मिलेगी।


सुचारु मंजूरियां और उद्योग द्वारा मज़बूत समर्थन
यह नीति माइनिंग सेक्टर में आम तौर पर आने वाली बाधाओं, जैसे रेगुलेटरी देरी की समस्या से भी प्रभावी ढंग से निपट रही है। पहले स्टेट एनवायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (एसईआईएए) जैसी संस्थाओं के माध्यम से माइनिंग से संबंधित सर्टीफिकेशन और पर्यावरणीय मंजूरियों में अक्सर सात से नौ महीने लग जाते थे और कुछ मामलों में तो कई वर्ष भी लग जाते थे। अब इन प्रक्रियाओं को मिशन मोड में लाया गया है और कई मंजूरियों का निपटारा एक साथ किया जा रहा है, ताकि रेगुलेटरी ढांचे से कोई समझौता किए बिना समयबद्ध निर्णय सुनिश्चित किए जा सकें।

इन सुधारों से माइनिंग सेक्टर को बड़ा प्रोत्साहन मिला है और सरकार को सीआरएमएस और एलएमएस श्रेणियों के तहत 290 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इन आवेदनों की प्रक्रिया प्रगति पर है, जिनमें से 26 इरादा पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) पहले ही जारी किए जा चुके हैं। जिला सर्वेक्षण रिपोर्टों में साइटों को शामिल करने सहित आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद शेष आवेदनों पर भी शीघ्र कार्रवाई की जाएगी।

जिलों में 200 से अधिक नई माइनिंग साइटों की पहचान की गई है, जिनके सर्वेक्षण, तकनीकी जांच, जन परामर्श और पर्यावरण प्रभाव आकलन अध्ययन इस समय जारी हैं। इनमें से अधिकांश खदानों के दिसंबर 2025 और मार्च 2026 के बीच चालू होने की उम्मीद है, जिससे आपूर्ति में आ रही बाधाएं काफी हद तक कम होंगी और मौजूदा साइटों पर बोझ भी घटेगा।

अधिकारियों ने कहा कि प्रारंभिक मंजूरियां माइनिंग सप्लाई चेन में योजनाबद्ध सुधारों की पेशकश को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि जहां भी माइनिंग कार्य जारी रहते हैं, वे कानूनी, दस्तावेजी प्रक्रियाओं और रेगुलेटरी मंजूरियों के अनुरूप होने चाहिए। इस ढांचे से बाहर किसी भी प्रकार की गतिविधि के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि माइनिंग की अनुमति है, लेकिन अवैध गतिविधियों के प्रति किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


पिछले तीन वर्षों में पहली पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया और बड़े सुधार
सुचारू और सुशासन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए पंजाब सरकार ने माइनिंग साइटों के लिए नई नीलामी प्रक्रिया शुरू की है, जो पिछले तीन वर्षों में शुरू की गई पहली ऐसी प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया के पहले चरण में 29 स्थलों को एक खुली और प्रतिस्पर्धी ऑनलाइन बोली प्रक्रिया के माध्यम से वाणिज्यिक माइनिंग साइटों के रूप में नीलाम किया गया था, जिसमें 16 सफल बोलियाँ प्राप्त हुईं और इससे 11.61 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।

पुरानी नीलामी मॉडल में मौजूद प्रणालीगत कमियों को दूर करने के लिए, जिनके कारण अक्सर लॉटरी के जरिए ड्रॉ, नकली बोलीदाताओं की भागीदारी, राजस्व हानि और देरी जैसी समस्याएं उत्पन्न होती थीं, कैबिनेट ने राष्ट्रीय स्तर की सर्वाेत्तम प्रथाओं के अनुरूप व्यापक सुधारों को मंजूरी दी है। इन सुधारों में मूल्य-आधारित बोली प्रणाली को अपनाना, बोलीदाताओं से पूर्व-निर्धारित उपयुक्त भुगतान सुनिश्चित करना, स्थिर राजस्व प्रवाह के लिए अग्रिम रॉयल्टी भुगतान, पर्यावरणीय स्वीकृतियों के लिये बोलीदाताओं को जिम्मेदारी के तबादले की सुविधा, सट्टेबाजी पर रोक लगाने के लिए स्पष्ट डेड रेंट प्रावधान तथा संचालन में अधिक स्थिरता के लिए लीज़ अवधि को तीन वर्ष से बढ़ाकर पाँच वर्ष करना शामिल है।

लगभग 100 और साइटों को चरणबद्ध तरीके से नीलामी के दायरे में लाने के साथ, इन सुधारों से उद्योग के लिए कच्चे माल की बेहतर उपलब्धता, राज्य के राजस्व में वृद्धि, खदानों का तेज संचालन तथा मजबूत रेगुलेटरी स्पष्टता और पारदर्शिता सुनिश्चित होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने कहा कि सीआरएमएस और एलएमएस की शुरुआत, सुचारु स्वीकृतियाँ और नई नीलामी प्रणालियाँ पंजाब के माइनिंग क्षेत्र में व्यापक सुधारों को दर्शाती हैं, जिनका उद्देश्य अवैध माइनिंग को समाप्त करना, राजस्व बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना है कि प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन स्वच्छ, निष्पक्ष और जन-केंद्रित तरीके से किया जाए।

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