करनाल : धान घोटाले के बाद अब प्रदेश में सरसों खरीद को लेकर घोटाले की बिसात बिछाई जा रही है। बड़े आकाओं के संरक्षण में घोटाले को सुनियोजित तरीके से अंजाम तक पहुंचाने का मसौदा तैयार हो चुका है।
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रतनमान ने कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा रबी सीजन की फसलों की सरकारी खरीद की घोषणा के बाद अब प्रदेश में सरसों घोटाले की आशंका बढऩे लगी है। उन्होंने कहा कि 3 मार्च को हरियाणा के मुख्य सचिव द्वारा जारी पत्र के अनुसार मसूर की सरकारी खरीद 20 मार्च से तथा सरसों, गेहूं सहित अन्य रबी फसलों की खरीद 28 मार्च से शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
रतनमान ने कहा कि यह फैसला किसानों के हितों के विपरीत और पूरी तरह अव्यावहारिक है। इस वर्ष प्रदेश में सामान्य से लगभग 20 दिन पहले गर्मी पडऩे के कारण फसलें भी समय से पहले तैयार हो रही हैं। ऐसी स्थिति में 28 मार्च तक किसानों की करीब 90 प्रतिशत सरसों मंडियों में समर्थन मूल्य से कम कीमत पर बिक जाएंगी, जबकि अन्य रबी फसलें भी सामान्य समय से पहले तैयार हो जाएंगी। उन्होंने बताया कि अगेती गर्मी के कारण घरौंडा (करनाल) सहित प्रदेश की कई मंडियों में 28 फरवरी 2026 तक औसतन तीन हजार क्विंटल से अधिक सरसों बिक्री के लिए पहुंच चुकी थी। सरकारी खरीद शुरू न होने के कारण किसानों को मजबूर होकर अपनी फसल बिचौलियों और आढ़तियों को समर्थन मूल्य से 800 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है। भाकियू प्रदेश अध्यक्ष रतनमान ने आशंका जताते हुए कहा कि पहले धान घोटाले में जिन बिचौलियों और आढ़तियों की भूमिका सामने आई थी वही तत्व अब सरकारी तंत्र की मिलीभगत से किसानों से सस्ती कीमत पर खरीदी गई सरसों को बाद में सरकारी खरीद में समर्थन मूल्य पर बेचकर हजारों करोड़ रुपये का नया घोटाला करने की तैयारी में हैं। उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए अगेती गर्मी की स्थिति को देखते हुए सरसों की सरकारी खरीद तुरंत 7 मार्च से और गेहूं सहित अन्य रबी फसलों की खरीद 20 मार्च से शुरू की जानी चाहिए, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।
अवैध कच्ची पर्ची प्रणाली पर सख्ती से लगे रोक
रतनमान ने आगे कहा कि हाईकोर्ट के 27 जनवरी 2026 के आदेश के अनुसार सरकार को एपीएमसी एक्ट 1961 तथा एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट बोर्ड नियम 1962 के तहत प्रदेश की सभी मंडियों में चल रही अवैध कच्ची पर्ची प्रणाली पर सख्ती से रोक लगानी चाहिए। उन्होंने कहा कि आढ़तियों को लिखित आदेश जारी कर यह सुनिश्चित किया जाए कि फसल की बिक्री और तुलाई के तुरंत बाद किसानों को जे-फार्म (डिजिटल या हार्ड कॉपी) उपलब्ध कराया जाए और उनकी फसल का पूरा भुगतान भी तुरंत किया जाए। इसके साथ ही मंडियों में कार्यरत आढ़तियों को यह आदेश दिया जाए कि वे इन निर्देशों की प्रति पोस्टर के रूप में अपनी दुकानों पर प्रदर्शित करें, ताकि किसानों के साथ किसी भी प्रकार की अनियमितता या धोखाधड़ी न हो सके।