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दिल धडक़ने की उम्र में दगा देने लगी धडक़न, खोज निकाला बड़ी बीमारी का बड़ा कारण

20 सितंबर, 2025 08:46 PM

भारत में तेजी से पांव पसार रहे मोटापा, मधुमेह, रक्तचाप जैसे विकारों से बचने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने योग और आयुर्वेद को नियमित जीवनशैली का हिस्सा बनाने की सलाह दी है। चिकित्सकों का मानना है कि अनियमित दिनचर्या और पिज्जा, बर्गर, मैक्रोनी, पास्ता व चाऊमीन जैसे फास्ट फूड के बढ़ते प्रचलन ने लोगों को युवावस्था में ही गंभीर बीमारियों की चपेट में लेना शुरु कर दिया है। खासकर बच्चों में पैकेटबंद खाद्य पदार्थ और शीतल पेय की संस्कृति तेजी से पांव फैला रही है, नतीजतन 20-25 वर्ष की उम्र तक पहुंचते पहुंचते कई युवा श्वांस रोग, हृदयरोग और मधुमेह जैसी बीमारी से ग्रसित होने लगे हैं।

2030 तक 27 मिलियन बच्चे होंगे मोटापे का शिकार
मोटापे को परिभाषित करने के लिए एक मानक बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) का उपयोग किया जाता है। बीएमआई 25 से 29.9 के बीच होने पर व्यक्ति अधिक वजन वाला माना जाता है, जबकि 30 से अधिक बीएमआई होने पर व्यक्ति मोटापे से ग्रस्त होता है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस 5) के आंकड़ों के अनुसार भारत में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में अधिक वजन और मोटापे में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है और अनुमान है कि 2030 तक भारत में 27 मिलियन से अधिक बच्चे और किशोर (5 से 19) मोटापे से ग्रस्त होंगे।

सुबह जल्दी उठकर सैर करें
चेस्ट रोग विभाग के पूर्व अध्यक्ष डा. अशोक यादव का कहना है कि सुबह की शुरुआत मार्निंग वॉक, हल्का व्यायाम के बाद अंकुरित अनाज एवं बादाम के सेवन से करनी चाहिए जबकि दोपहर और शाम का भोजन सुपाच्य और पौष्टिक हो तो स्वास्थ्य संबंधी तमाम परेशानियों से बचा जा सकता है। आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. मधुमिता कृष्णन का कहना है कि सुबह का समय पूरे दिन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाता है। आयुर्वेद में ‘दिनचर्या’ का विशेष महत्व है। यह एक दैनिक अनुशासन है, जो आत्म-देखभाल को बढ़ावा देता है। इस दिनचर्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, प्रात:काल जल्दी उठना और एक निश्चित सुबह की दिनचर्या का पालन करना। प्रकृति की लय के अनुरूप चलकर, यह दिनचर्या हमारी जैविक घड़ी (बायोलॉजिकल क्लॉक) को संतुलित करती है, आत्म-जागरूकता को बढ़ाती है और शरीर एवं मन के बीच सामंजस्य स्थापित करती है। सरल आयुर्वेदिक आदतें जैसे ब्रह्म मुहूर्त में उठना, योग, ध्यान, प्राणायाम (सजग श्वास तकनीक), ऑयल पुलिंग (तेल कुल्ला), गुनगुना पानी पीना और सुबह के समय बादाम का सेवन ये सभी मिलकर आपकी सुबह को सकारात्मक रूप से रूपांतरित कर सकते हैं और दिनभर के लिए बेहतर स्वास्थ्य की नींव रख सकते हैं।

ऐसे खाएं बादाम
मैक्स हेल्थकेयर में रीजनल हेड डायटेटिक्स ऋतिका समद्दार ने कहा कि सुबह का भोजन सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि शरीर को पोषण और दिनभर की स्थिर ऊर्जा देने के लिए होता है और इसमें सही आहार की भूमिका बेहद अहम है। सुबह के समय सही पोषण न केवल ऊर्जा और एकाग्रता को बढ़ाता है, बल्कि दिन की अच्छी शुरुआत के लिए भी आवश्यक है। मैं अकसर लोगों को इसकी अहमियत याद दिलाती हूं। बादाम विशेष रूप से लगभग 15 पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, जिनमें प्रोटीन, डायटरी फाइबर, हेल्दी फैट्स, मैग्नीशियम और जिंक शामिल हैं। ये पोषक तत्व ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने, भूख को नियंत्रित करने और लंबे समय तक अच्छे स्वास्थ्य को सहयोग देने में मदद करते हैं। सुबह की शुरुआत बादाम के साथ करने से लंबे समय तक पेट भरा महसूस होता है और समग्र सेहत को भी लाभ मिलता है। इन्हें अपने नाश्ते में शामिल करना बेहद आसान है जैसे ओट्स, दलिया या पॉरिज पर कटे हुए बादाम डालकर क्रंच और प्रोटीन बढ़ाना या फलों व सब्जियों की स्मूदी में बादाम या बादाम बटर मिलाना। आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी जैसे प्राचीन चिकित्सा ग्रंथों में भी बादाम को त्वचा की सेहत और प्राकृतिक चमक को बढ़ाने वाला बताया गया है। ये पारंपरिक अभ्यास आज भी अत्यंत प्रासंगिक हैं और इन्हें रोज़मर्रा की दिनचर्या में आसानी से शामिल किया जा सकता है। आयुर्वेद में आहार को संपूर्ण स्वास्थ्य का आधार माना गया है।

 

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