वॉशिंगटन/तेहरान : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच महिला प्रदर्शनकारियों की सजा को लेकर जुबानी जंग छिड़ गई है। ट्रंप ने दावा किया है कि उनके हस्तक्षेप के बाद ईरान ने आठ महिला प्रदर्शनकारियों की फांसी रद्द कर दी है, जबकि ईरान ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए ट्रंप को 'गुमराह' बताया है।
ट्रंप का दावा : 'मेरी अपील पर ईरान ने बदला फैसला' डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट करते हुए इसे एक बड़ी कूटनीतिक जीत बताया। ट्रंप ने लिखा : "यह बहुत अच्छी खबर है। मुझे बताया गया है कि आठ महिला प्रदर्शनकारियों को अब फांसी नहीं दी जाएगी। इनमें से चार को तुरंत रिहा किया जा रहा है और चार एक महीने बाद जेल से बाहर आएंगी। मैं ईरानी नेताओं की सराहना करता हूं कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर मेरी अपील को स्वीकार किया।"
ट्रंप ने आगे कहा कि इन महिलाओं की रिहाई भविष्य की बातचीत के लिए एक सकारात्मक शुरुआत हो सकती है।
ईरान का पलटवार : 'झूठी खबरों के शिकार हुए ट्रंप'
ईरान की आधिकारिक न्यायपालिका समाचार एजेंसी 'मिज़ान' ने ट्रंप के दावों पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्टीकरण जारी किया है। ईरान का कहना है कि ट्रंप को विरोधी मीडिया चैनलों द्वारा फैलाई गई झूठी खबरों ने गुमराह किया है।
ईरान का तर्क : प्रशासन ने साफ किया कि इन महिलाओं पर ऐसे कोई आरोप नहीं थे जिनमें मौत की सजा दी जाए।
वर्तमान स्थिति : ईरान के अनुसार, कुछ महिलाएं पहले ही रिहा हो चुकी हैं और बाकी कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रही हैं, लेकिन उन्हें फांसी देने का कोई इरादा कभी नहीं था।
पृष्ठभूमि: ईरान में प्रदर्शन और फांसी
यह विवाद तब शुरू हुआ जब अंतरराष्ट्रीय मीडिया में खबरें आईं कि जनवरी में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में शामिल रही महिलाओं को मौत की सजा दी जा सकती है। गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में हुए प्रदर्शनों और इजराइल के लिए जासूसी के आरोपों में ईरान अब तक एक दर्जन से ज्यादा लोगों को फांसी दे चुका है, जिससे मानवाधिकारों को लेकर वैश्विक चिंताएं बढ़ गई हैं।