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चंडीगढ़

चंडीगढ़ में ‘एकम न्याय संवाद’

30 अगस्त, 2026 07:32 PM

चंडीगढ़ : “न्याय का कोई लिंग नहीं होता, गरिमा का कोई लिंग नहीं होता और करुणा का कोई लिंग नहीं होता।” राज्यसभा सांसद डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने चंडीगढ़ में रविवार को आयोजित ‘एकम न्याय संवाद’ में पुरुषों से जुड़े मुद्दों पर गंभीर राष्ट्रीय चर्चा की जरूरत बताते हुए राष्ट्रीय पुरुष आयोग की स्थापना की मांग उठाई।


डॉ. मित्तल ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय पुरुष आयोग की मांग ‘पुरुष बनाम महिला’ की सोच पर आधारित नहीं है। इसका उद्देश्य पुरुषों की वास्तविक समस्याओं को समझना, उनके लिए सहायता और कानूनी जागरूकता उपलब्ध कराना तथा इन मुद्दों पर शोध के आधार पर नीतियां तैयार करना है।
कार्यक्रम के दौरान ‘हस्बैंड मर्डर बाइ वाइफ ऐन्ड सूअसाइड बाइ मैन- ए रिसर्च रिपोर्ट ऐन्ड अनैलिसिस ऑन इन्सिडन्ट रिपोर्ट इन द मीडिया इन द यिर्ज़ 2024 ऐन्ड इन्सिडन्ट रिपोर्ट इन मीडिया इन यिर्ज़ 2024 ऐन्ड 2025’नामक शोध रिपोर्ट का भी अनावरण किया गया।


रिपोर्ट के अनुसार, मीडिया में सामने आए मामलों के आधार पर वर्ष 2024 में पतियों/पुरुष अंतरंग साथियों की हत्या के 244 मामले और वर्ष 2025 में 419 मामले दर्ज किए गए। इसी तरह 2024 में 277 और 2025 में 426 पुरुषों से जुड़े पति/अंतरंग साथी आत्महत्या के मामले रिपोर्ट में दर्ज किए गए हैं।
डॉ. मित्तल ने कहा कि ये आंकड़े केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे परिवार, रिश्ते और इंसानी जिंदगी जुड़ी हुई है।


“क्या सच्चा न्याय संभव है, अगर कुछ आवाजें आज भी अनसुनी रह जाएं? महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और अधिकारों की रक्षा के लिए देश ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं और ये प्रयास जारी रहने चाहिए। लेकिन न्याय की इस यात्रा में पुरुषों की वास्तविक चिंताओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब समय आ गया है कि पुरुषों से जुड़े मुद्दों पर गंभीर, संवेदनशील और संस्थागत बातचीत शुरू हो।”


उन्होंने कहा कि पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक समस्याओं को भी गंभीरता से देखने की जरूरत है।
“हर आंकड़े के पीछे एक व्यक्ति, एक परिवार और एक कहानी होती है। हमें यह पूछना होगा कि क्या हमारे बेटे और युवा पुरुष असफलता, रिश्तों की समस्या, आर्थिक दबाव या भावनात्मक तनाव के बारे में खुलकर बात कर सकते हैं? क्या वे बिना डर और किसी तरह के जजमेंट के काउंसलिंग ले सकते हैं? कई बार किसी व्यक्ति को सबसे पहले अदालत की नहीं, बल्कि किसी ऐसे व्यक्ति की जरूरत होती है जो उसकी बात सुन सके।”
डॉ. मित्तल ने कहा कि राष्ट्रीय पुरुष आयोग को केवल शिकायत दर्ज करने वाले मंच तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। इसे सुनने, समझने, सहायता देने, शोध करने और नीतिगत सुधार की सिफारिश करने वाला राष्ट्रीय संस्थान बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आयोग में शोधकर्ता, कानूनी विशेषज्ञ, काउंसलर, सामाजिक कार्यकर्ता और नीति निर्माता मिलकर पुरुषों से जुड़े मुद्दों का व्यवस्थित अध्ययन कर सकते हैं।


“राष्ट्रीय पुरुष आयोग पुरुष बनाम महिला का मंच नहीं होना चाहिए। यह किसी महिला आयोग या महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ नहीं होना चाहिए। इसका उद्देश्य समस्या को सही तरीके से समझना और सही समाधान खोजना होना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि ऐसा आयोग कानूनी जागरूकता, वास्तविक शिकायतों, काउंसलिंग, मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक विवादों, बच्चों और माता-पिता के संबंधों, पुरुषों के खिलाफ घरेलू हिंसा तथा पुरुषों में आत्महत्या के कारणों पर काम कर सकता है।
डॉ. मित्तल ने डेटा की कमी को भी एक बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि पुरुषों से जुड़े मुद्दों पर गंभीर नीति बनाने के लिए विश्वसनीय और व्यवस्थित आंकड़ों की जरूरत है।


“आज पुरुषों को लेकर हमारे पास कई राय हैं, लेकिन हमें गंभीर और विश्वसनीय प्रमाण चाहिए। अगर किसी समस्या को व्यवस्थित रूप से मापा ही नहीं जाएगा तो उसे समझना मुश्किल होगा। और बिना समझे अच्छी नीति बनाना भी मुश्किल है। राष्ट्रीय पुरुष आयोग विश्वसनीय डेटा तैयार करने और शोध को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।”
उन्होंने आयोग के काम में रोकथाम को भी प्राथमिकता देने की बात कही। इसके तहत तनाव की शुरुआती पहचान, काउंसलिंग, परिवार को सहायता, कानूनी मार्गदर्शन, विशेषज्ञों तक पहुंच और उचित मामलों में मध्यस्थता जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।


कार्यक्रम में न्यायपालिका, कानूनी क्षेत्र और अन्य संबंधित पक्षों के प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम की थीम ‘जस्टिस , डायलॉग, रिफॉर्म’ रही। इसमें न्यायमूर्ति राजीव बिंदल ने ‘बैलेंसिंग जस्टिस : प्रोटेक्टिंग द इनसन्ट वाइल इम्पावॉरईग द वल्नरबल’ विषय पर मुख्य संबोधन दिया। इसके बाद पति हत्या और पुरुष आत्महत्या पर आधारित शोध रिपोर्ट का अनावरण किया गया। कार्यक्रम में पेरेंटल एलियनिएशन, बलात्कार कानून, विवाह, हिंसा और पुरुष आत्महत्या जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।

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