Tuesday, August 18, 2026
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राष्ट्रीय

ऑपरेशन सिंदूर का 1 वर्ष पूरा, इस ऑपरेशन से सेनाओं का शौर्य याद आता है : रक्षामंत्री

04 मई, 2026 03:20 PM

ऑपरेशन सिंदूर का 1 वर्ष पूरा हो चुका है। जब भी ऑपरेशन सिंदूर की बात आती है, तो सेनाओं का शौर्य याद आता है। आतंकियों और उनके सरपरस्तों को जो मुंहतोड़ जवाब हमारे सैनिकों ने दिया, उससे पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा हो गया। ये तो फिर भी अच्छा हुआ कि हमने धैर्य दिखाते हुए, केवल आतंकवादियों को ही नेस्तनाबूत किया, नहीं तो हमारी सेनाएं क्या कुछ करने में सक्षम है, इसका अंदाजा तो पूरी दुनिया को है। सोमवार को यह बात रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कही।  

ऑपरेशन सिंदूर अपने आप में टेक्नोलॉजी वॉरफेयर का एक उदाहरण

उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अपने आप में टेक्नोलॉजी वॉरफेयर का एक उदाहरण था। इस ऑपरेशन में आकाश तीर, आकाश मिसाइल सिस्टम और ब्रह्मोस जैसी एडवांस मिसाइल सिस्टम के साथ-साथ, अनेक आधुनिक उपकरणों का भी उपयोग किया गया। इसने यह साबित किया कि हमारी सेनाएं बदलाव को समझ भी रही हैं और उसे आत्मविश्वास के साथ उपयोग भी कर रही हैं। रक्षामंत्री सोमवार को भारतीय सेना के ‘नॉर्थ टेक सिम्पोजियम’ में बोल रहे थे। इस सिम्पोजियम को आयोजित करने का उद्देश्य रक्षा त्रिवेणी संगम है। यानी जहां तकनीक, उद्योग और सैनिक एक साथ एक मंच पर मिल रहे हैं। यहां बोलते हुए रक्षामंत्री ने कहा कि अगर हम युद्ध प्रणाली को देखें, तो पहले के समय में, कम से कम हमें इस बात का मोटा-मोटा अंदाजा होता था कि सामने वाला क्या कर सकता है। उसकी सैन्य क्षमता, उसके प्लेटफार्म , उसकी डोक्ट्रीन, इन सबका अंदाजा होता था। लेकिन अब, लगातार एक ऐसा चौंकाने वाला तत्व सामने आ रहा है, जिसके बारे में पहले कभी सोचा ही नहीं जा सकता था। जिन चीजों को हम सामान्य नागरिक जीवन का हिस्सा मानते थे, वे अब घातक हथियारों में बदल रही हैं। 

हर प्रकार की स्थिति के लिए तैयार

रक्षामंत्री ने कहा कि हमें सिर्फ एक्टिव ही नहीं रहना है, बल्कि प्रोएक्टिव भी रहना है। हर प्रकार की स्थिति के लिए तैयार भी रहना है उन्होंने बताया कि हमारी सेनाओं ने और हमारी उद्योगों ने बदलती हुई परिस्थितियों का बहुत अच्छे से आकलन किया है। उन्होंने कहा कि इनकी तैयारी बिलकुल सटीक रहती है। इसके सबसे बड़े उदाहरण के रूप में तो ऑपरेशन सिंदूर ही हमारे सामने है। उन्होंने बताया कि रक्षा क्षेत्र में इन प्रयासों का असर दिख भी रहा है। 

घरेलू रक्षा उत्पाद 2025-26 में, 1 लाख 54 हजार करोड़ रुपए के रिकॉर्ड आंकड़े तक पहुंचा 

आकंड़े बताते हैं , हमारा घरेलू रक्षा उत्पाद, वित्त वर्ष 2025-26 में, 1 लाख 54 हजार करोड़ रुपए के रिकॉर्ड आंकड़े तक पहुंच गया। वहीं डिफेंस निर्यात भी, 2025-26 में 38,424 करोड़ रुपए के रिकॉर्ड आंकड़े तक पहुंच गया। इसमें भारत के प्राइवेट सेक्टर का बड़ा अहम योगदान रहा है। राजनाथ सिंह ने कहा कि हम जो इंफ्रा प्रोजेक्ट शुरू कर रहे हैं, वो भी हमारे लिए भविष्य में महत्वपूर्ण साबित होंगे। जैसे अभी उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा, गंगा एक्सप्रेसवे शुरू हुआ है। रक्षा आर एंड डी बजट का 25 प्रतिशत हिस्सा इंडस्ट्री, शिक्षा जगत और स्टार्टअप के लिए आवंटित कर दिया गया है। अब तक इन सभी के द्वारा लगभग 4,500 करोड़ रुपए से अधिक का उपयोग भी किया जा चुका है। 

भविष्य में, युद्ध कैसे लड़े जाएंगे, यह निर्णय आज के लैब्स में हो रहा है

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि आज के समय में, रिसर्च का कोई विकल्प नहीं है। भविष्य में, युद्ध कैसे लड़े जाएंगे, यह निर्णय आज के लैब्स में हो रहा है। सरकार ने डिफेंस रिसर्च को अपनी प्राथमिकता के केंद्र में रखा है। डीआरडीओ के माध्यम से रिसर्च को अगले स्तर तक ले जाने का प्रयास किया है। महत्त्वपूर्ण यह है कि डीआरडीओ अब इस सफर में अकेले ही नहीं चल रहा है। डीआरडीओ अपने साथ बड़ी संख्या में उद्योगों को भी साथ लेकर चल रहा है। 

हमारी इंडस्ट्री की चर्चा अब दुनिया भर में 

रक्षा मंत्री ने कहा कि हमारी इंडस्ट्री की चर्चा अब दुनिया भर में होती है। जब भी वह कहीं बाहर जाते हैं, तो हमारी इंडस्ट्री के प्रति दुनिया में एक सकारात्मक अप्रोच देखने को मिलती है। उन्होंने अब उद्योग जगत के लोगों से कहा कि जिस तरह से हम डिफेंस कॉरिडोर विकसित कर रहे हैं, उसी तर्ज पर आप सभी एक नॉलेज कॉरिडोर तैयार करें, जिससे हम सभी एक दूसरे से सीख सके और आगे बढ़ सकें।

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