Wednesday, July 29, 2026
BREAKING
पंजाब पुलिस ने सीमा सुरक्षा को और मजबूत किया: अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस ने सात महीनों में 111 किलोग्राम से अधिक हेरोइन बरामद की लोकसभा में मीत हेयर ने धर्म और जाति के आधार पर राजनीति करने पर केंद्र सरकार को घेरा पंजाब सरकार की ओर से घनौर विधानसभा क्षेत्र के 42 गांवों के किसानों को बड़ी सौगात, लिफ्ट सिस्टम के माध्यम से मिला नहरी पानी पंजाब कर विभाग ने वैट बकाया वसूली अभियान में लाई तेजी: संपत्ति की नीलामी से 1.21 करोड़ रुपये की वसूली: हरपाल सिंह चीमा भगवंत मान सरकार ने शिक्षा और बिजली विभागों को कर्मचारियों की मांगों के समाधान की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए: हरपाल सिंह चीमा मेरी रसोई राशन किटों के वितरण का आंकड़ा 33 लाख से पार भारत का अफ्रीका में संचयी निवेश बढ़कर 75 अरब डॉलर हुआ, व्यापार करीब 14 गुना बढ़ा : रिपोर्ट रूस ने टेलीग्राम के संस्थापक पावेल डुरोव पर लगाया आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप, जारी किया अंतरराष्ट्रीय अरेस्ट वारंट पीएम मोदी के नेतृत्व वाली एफटीए रणनीति से 60 ट्रिलियन डॉलर के वैश्विक बाजारों तक पहुंच खुलती है: पीयूष गोयल अदाणी पोर्ट्स का मुनाफा पहली तिमाही में 10 प्रतिशत बढ़कर 3,650 करोड़ रुपए रहा, आय में भी उछाल

फीचर

इको-फ्रेंडली प्लास्टिक पैकेजिंग से बढ़ेगी खाने की शेल्फ लाइफ, घटेगा प्रदूषण

22 जुलाई, 2026 11:36 AM

आज के समय में खाने-पीने की चीजों को लंबे समय तक ताजा और सुरक्षित रखने में फूड पैकेजिंग की बहुत बड़ी भूमिका है। दूध, फल, सब्जियां, स्नैक्स या तैयार भोजन हर चीज को ऐसी पैकेजिंग की जरूरत होती है जो हवा और नमी से बचाकर उसकी गुणवत्ता बनाए रखे। लेकिन इसके लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक पर्यावरण के लिए बड़ी समस्या बन चुका है। यह वर्षों तक मिट्टी और पानी में पड़ा रहता है और आसानी से नष्ट नहीं होता। यही वजह है कि दुनिया भर के वैज्ञानिक ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं जो भोजन को सुरक्षित रखने के साथ-साथ पर्यावरण को भी नुकसान न पहुंचाएं।

इसी दिशा में इंडोनेशिया के हसनुद्दीन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एंडी दिरपान और उनकी टीम ने एक नई तरह की बायोडिग्रेडेबल फूड पैकेजिंग फिल्म तैयार की है। यह फिल्म पौधों से बनने वाले प्लास्टिक पॉलीलैक्टिक एसिड (पीएलए) पर आधारित है। खास बात यह है कि इसमें मजबूती बढ़ाने के लिए माइक्रोक्रिस्टलाइन सेल्यूलोज (एमसीसी) और ऑक्सीजन को नियंत्रित करने के लिए ब्यूटाइलेटेड हाइड्रॉक्सीटोल्यून (बीएचटी) का इस्तेमाल किया गया है। इस शोध को 5 मई 2026 को ऑनलाइन प्रकाशित किया गया और मार्च 2027 में आसियान जर्नल फॉर साइंस एंड इंजीनियरिंग इन मैटेरियल्स के वॉल्यूम 6 में प्रकाशित किया जाएगा।

 

सामान्य तौर पर पीएलए को पर्यावरण-अनुकूल प्लास्टिक माना जाता है क्योंकि यह प्राकृतिक स्रोतों से बनता है और समय के साथ नष्ट भी हो जाता है। लेकिन इसकी सबसे बड़ी कमी यह है कि यह सामान्य प्लास्टिक जितना मजबूत नहीं होता और ऑक्सीजन को भी उतनी अच्छी तरह नहीं रोक पाता। ऑक्सीजन के संपर्क में आने से खाने की चीजें जल्दी खराब होने लगती हैं। इसलिए वैज्ञानिक लंबे समय से ऐसा तरीका खोज रहे थे जिससे पीएलए की मजबूती भी बढ़े और वह ऑक्सीजन को भी बेहतर तरीके से नियंत्रित कर सके।

 

इस शोध का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि इसमें प्रयुक्त सेल्यूलोज को लकड़ी या पारंपरिक फसलों के बजाय, फर्मेंटेड (किण्वित) नारियल पानी से तैयार किया गया है। यह वही प्रक्रिया है, जिसके ज़रिए 'नाटा डी कोको' नामक जेलीनुमा खाद्य पदार्थ बनाया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान बैक्टीरिया पूरी तरह शुद्ध और रेशेदार सेल्यूलोज का निर्माण करते हैं। वैज्ञानिकों ने इस सेल्यूलोज को परिष्कृत (साफ) करके 'माइक्रोक्रिस्टलाइन सेल्यूलोज' (एमसीसी) पाउडर में बदला और फिर इसे पीएलए फिल्म में मिलाया। इस फिल्म को तीन बारीक परतों में तैयार किया गया, जबकि बीएचटी को केवल भीतर की दो परतों में रखा गया ताकि वह सीधे भोजन के संपर्क में रहकर ऑक्सीजन के प्रभाव को नियंत्रित कर सके।

 

शोधकर्ताओं ने एमसीसी की अलग-अलग मात्रा मिलाकर कई प्रकार की फिल्मों का परीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने नारियल पानी से निर्मित एमसीसी की तुलना बाजार में उपलब्ध सामान्य एमसीसी से भी की। परिणामों से स्पष्ट हुआ कि जैसे-जैसे एमसीसी की मात्रा बढ़ाई गई, फिल्म की मजबूती में वृद्धि होती गई और उससे ऑक्सीजन का रिसाव (पारगम्यता) भी कम होता गया।

 

माइक्रोस्कोपिक जांच में सामने आया कि नारियल पानी से बने एमसीसी वाली फिल्म की संरचना अत्यधिक सुगठित, समान और त्रुटिहीन थी। वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसा इसलिए संभव हुआ क्योंकि बैक्टीरिया द्वारा तैयार सेल्यूलोज कहीं अधिक शुद्ध और उच्च रेशेदार गुणवत्ता वाला था। यही कारण है कि इसने बाजार में मिलने वाले सामान्य एमसीसी की तुलना में बेहतर परिणाम दिए।

 

पर्यावरण के लिहाज से भी इस नई पैकेजिंग ने अच्छे परिणाम दिए। जब इस फिल्म को मिट्टी में दबाकर परीक्षण किया गया तो 25 दिनों में इसका लगभग 28.86 प्रतिशत हिस्सा प्राकृतिक रूप से टूट गया। वैज्ञानिकों के अनुसार यह दर अन्य बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक के बराबर या उससे बेहतर है।

 

हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी माना कि अभी इस तकनीक पर और काम करने की जरूरत है। फिल्म मजबूत और ऑक्सीजन रोकने में प्रभावी जरूर बनी, लेकिन वह ज्यादा लचीली नहीं थी। पैकेजिंग सामग्री को केवल भोजन की सुरक्षा ही नहीं करनी होती, बल्कि फैक्टरी में पैकिंग, परिवहन और रोजमर्रा के इस्तेमाल के दौरान टूटने से भी बचना होता है। इसलिए भविष्य में वैज्ञानिकों का लक्ष्य ऐसी फिल्म तैयार करना होगा जो मजबूती और लचीलेपन दोनों का सही संतुलन बनाए रखे।

 

Have something to say? Post your comment

और फीचर खबरें

भारत ने पहली तिमाही में लगभग 10 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्मार्टफोन का किया निर्यात

भारत ने पहली तिमाही में लगभग 10 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्मार्टफोन का किया निर्यात

‘नशामुक्त युवा, विकसित भारत’: अभियान के तहत जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू

‘नशामुक्त युवा, विकसित भारत’: अभियान के तहत जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू

आत्मनिर्भर भारत को नई मजबूती, स्वदेशी युद्धपोतों से सशक्त हो रहा भारतीय नौसेना बेड़ा

आत्मनिर्भर भारत को नई मजबूती, स्वदेशी युद्धपोतों से सशक्त हो रहा भारतीय नौसेना बेड़ा

विश्व नेत्रदान दिवस: रोशनी बांटने का संकल्प, लाखों लोगों की जिंदगी बदल सकता है एक फैसला

विश्व नेत्रदान दिवस: रोशनी बांटने का संकल्प, लाखों लोगों की जिंदगी बदल सकता है एक फैसला

एआई बना हाथियों का रक्षक, कोयंबटूर रेलवे ट्रैक पर ढाई साल से एक भी मौत नहीं

एआई बना हाथियों का रक्षक, कोयंबटूर रेलवे ट्रैक पर ढाई साल से एक भी मौत नहीं

पोछे के पानी में मिलाएं ये 5 चीजें, फर्श पर आएगी कांच जैसी चमक

पोछे के पानी में मिलाएं ये 5 चीजें, फर्श पर आएगी कांच जैसी चमक

Kitchen Hack: चीनी के डिब्बे के पास भी नहीं आएंगी चींटियां, बस डाल दें ये 1 चीज

Kitchen Hack: चीनी के डिब्बे के पास भी नहीं आएंगी चींटियां, बस डाल दें ये 1 चीज

70% लोग ट्रैवल के दौरान करते हैं ये 6 गलतियां, हो जाते हैं हादसे का शिकार, जानें क्या ना करें

70% लोग ट्रैवल के दौरान करते हैं ये 6 गलतियां, हो जाते हैं हादसे का शिकार, जानें क्या ना करें

क्या 18 डिग्री सेल्सियस पर ही सबसे ज्यादा ठंडक देता है एसी? स्टैंडबाय मोड भी 'चुराता' है बिजली

क्या 18 डिग्री सेल्सियस पर ही सबसे ज्यादा ठंडक देता है एसी? स्टैंडबाय मोड भी 'चुराता' है बिजली

एसी नहीं है... कमरा कैसे रहेगा कूल? नौतपा में भी ठंडा रहेगा घर, अपनाएं ये आसान घरेलू उपाय

एसी नहीं है... कमरा कैसे रहेगा कूल? नौतपा में भी ठंडा रहेगा घर, अपनाएं ये आसान घरेलू उपाय