तेल अवीव/तेहरान। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल ने ईरान के कई शहरों पर समानांतर हवाई हमले किए। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई। इसकी पुष्टि ईरानी मीडिया तसनीम और फार्स ने की। इस हमले में उनके परिवार के कई सदस्य भी मारे गए। जिनमें बेटी, दामाद, पोती और बहू शामिल हैं।
ईरान ने 40 दिन का राजकीय शोक और सात दिन की सार्वजनिक छुट्टियां घोषित की हैं। IRGC ने खामेनेई की मौत पर शोक जताते हुए कहा कि, हमने एक महान नेता खो दिया है और पूरा देश उनका शोक मना रहा है।
ईरानी सेना और IRGC की प्रतिक्रिया
ईरानी इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने हमले के तुरंत बाद जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी। फार्स एजेंसी के मुताबिक IRGC ने कहा कि, दुश्मनों ने उन्हें निशाना बनाया और इसका जवाब लिया जाएगा। ईरानी सेना ने भी घोषणा की है कि, खतरनाक अभियान की शुरुआत जल्द होगी और अमेरिकी ठिकानों, कब्जे वाले क्षेत्रों और इजराइल पर हमले किए जाएंगे।
क्यों हो रहे हमले
ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ था। इस हमले के मुख्य कारण हैं-
न्यूक्लियर प्रोग्राम: अमेरिका को शक था कि ईरान परमाणु हथियार विकसित कर सकता है। ईरान ने बार-बार कहा कि इसका उद्देश्य केवल ऊर्जा उत्पादन और शोध है।
बैलिस्टिक मिसाइल: ईरान का कहना है कि उसकी मिसाइलें उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। अमेरिका इसे लेकर दबाव डालता रहा।
मिडिल ईस्ट में प्रभाव: ईरान अपने समर्थक गुटों को इराक, सीरिया, लेबनान और यमन में मदद करता है।
आर्थिक प्रतिबंध: अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, जिससे तनाव बढ़ा।
खामेनेई के बारे में जानें
अयातुल्लाह अली खामेनेई का जन्म 19 अप्रैल 1939 को ईरान के धार्मिक शहर मशहद में एक मौलवी परिवार में हुआ था। 1963 में उन्होंने शाह के खिलाफ भाषण दिया, जिसके चलते उन्हें गिरफ्तार किया गया था। 1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति के बाद खामेनेई क्रांतिकारी परिषद में शामिल हुए। 1981 में एक बम हमले के बावजूद वे राष्ट्रपति बने। 1989 में, खोमैनी के निधन के बाद, उन्हें ईरान का सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया और इसके लिए संविधान में बदलाव भी किया गया। उनके समर्थक उन्हें इस्लामी व्यवस्था का मजबूत रक्षक मानते हैं, जबकि आलोचक उन पर सख्त और कट्टर शासन चलाने का आरोप लगाते हैं।