नई दिल्ली : भारत के पूर्व चीफ जस्टिस (EX CJI) बी.आर.गवई ने वन नेशन वन इलेक्शन वाले बिल का समर्थन किया है। पूर्व सीजेआई ने इस विधेयक की पड़ताल कर रही संयुक्त संसदीय समिति से गुरुवार को कहा कि वन नेशन वन इलेक्शन बिल न तो संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन करता है और न ही इससे संघवाद या लोकतांत्रिक शासन वाले ढांचे पर ही कोई प्रभाव पड़ेगा। एक देश एक चुनाव विधेयक भारत में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक ही साथ करवाने के लिए लाया गया है।
वन नेशन वन इलेक्शन क्या बोले जस्टि गवई
जानकारी के मुताबिक बीजेपी सांसद पी.पी.चौधरी की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति ( JPC ) के सामने जस्टिस गवई ने कहा कि देश में एक साथ चुनाव करवाने के लिए लोकसभा और विधानसभा चुनावों के सिर्फ एक चुनावी साइकिल को दुरुस्त करना पड़ेगा।
संवैधानिक वैद्यता को लेकर क्या बोले जस्टिस गवई
जानकारी के अनुसार उन्होंने वन नेशन वन इलेक्शन विधेयक की संवैधानिक वैध्यता का समर्थन करते हुए कहा, 'इस विधेयक के लागू होने से इनमें से कोई भी न बदलेगा या न ही प्रभावित होगा।' बैठक के बाद जेपीसी चेयरमैन ने जस्टिस गवई का हवाला देते हुए कहा कि प्रस्ताव 'संसद की क्षमता के तहत है' और इससे 'बहुत बड़ा चुनाव सुधार होगा।' चौधरी के अनुसार ज्यादातर सदस्यों की चिंता संवैधानिक वैद्यता को लेकर ही थी।
एक देश एक चुनाव पर क्या बोले पूर्व सीजेआई
अभी तक भारत के 6 पूर्व सीजेआई जेपीसी के सामने 129वें संविधान संशोधन विधेयक, 2024 पर अपनी राय दे चुके हैं। 6 में से 4 पूर्व सीजेआई जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस डी.वाई.चंद्रचूड़, जस्टिस जे.एस.केहर और अब जस्टिस गवई का कहना है कि यह विधेयक संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन नहीं करता। हालांकि, जस्टिस यू. यू. ललित और जस्टिस संजीव खन्ना ने केशवानंद भारती फैसले का हवाला देकर इसपर सवाल उठा चुके हैं।