रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर उच्च स्तरीय चर्चा के लिए गुरुवार तड़के नई दिल्ली पहुंचे। पालम हवाई अड्डे पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया।
विदेश मंत्रालय ने किया स्वागत
विदेश मंत्रालय ने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “रूसी संघ के प्रथम उपाध्यक्ष और भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी एवं सांस्कृतिक सहयोग) के सह-अध्यक्ष डेनिस मंटुरोव का नई दिल्ली में हार्दिक स्वागत। इस यात्रा के दौरान वे विदेश मंत्री एस. जयशंकर से परामर्श करेंगे और अन्य द्विपक्षीय बैठकों में भाग लेंगे।”
द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर जोर
अधिकारियों के अनुसार, इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से जुड़े घटनाक्रम भी चर्चा का प्रमुख विषय रह सकते हैं।
अहम नेताओं से होगी मुलाकात
विदेश मंत्रालय के अनुसार, मंटुरोव अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी मुलाकात करेंगे। इस दौरान रक्षा, सुरक्षा, ऊर्जा और व्यापार जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर फोकस रहेगा।
तेल आपूर्ति में रूस की बढ़ती भूमिका
अमेरिकी प्रतिबंधों में एक महीने की छूट के बाद हाल के हफ्तों में रूस एक बार फिर भारत को कच्चे तेल का सबसे बड़ा सप्लायर बनकर उभरा है। इससे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई गति मिलने की संभावना है।
हालिया बैठकों में भी हुई समीक्षा
इससे पहले विदेश सचिव विक्रम मिसरी और रूसी उप विदेश मंत्री एंड्री रुडेंको ने 30 मार्च को नई दिल्ली में विदेश कार्यालय परामर्श की सह-अध्यक्षता की थी। इस दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की और क्षेत्रीय व वैश्विक घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श किया।
शिखर सम्मेलन के निर्णयों पर प्रगति की समीक्षा
दोनों पक्षों ने पिछले दिसंबर में नई दिल्ली में आयोजित भारत-रूस शिखर सम्मेलन के दौरान लिए गए निर्णयों के कार्यान्वयन में हुई प्रगति का भी आकलन किया। इस शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना था।
ऊर्जा आपूर्ति पर भी होगी चर्चा
भारत में मंटुरोव की बैठकों के दौरान पश्चिम एशिया संघर्ष के व्यापक आर्थिक प्रभाव, खासकर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में संभावित व्यवधान और दोनों देशों पर उसके असर पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।