भारत ने बुधवार को रूस के मॉस्को में रशियन एकेडमी ऑफ साइंसेज के ए.एन. सेवरत्सोव इंस्टीट्यूट ऑफ इकोलॉजी एंड इवोल्यूशन में आयोजित स्नो लेपर्ड (हिम तेंदुए) के अध्ययन और संरक्षण पर रूस-भारत राउंडटेबल बैठक में भाग लिया।
पार्टनरशिप एग्रीमेंट के तहत हुई बैठक
यह बैठक इंटररिजनल एसोसिएशन ‘Irbis’ और इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) के बीच दिसंबर 2025 में हुए साझेदारी समझौते के तहत आयोजित की गई। समझौते का उद्देश्य स्नो लेपर्ड पर अनुसंधान और संरक्षण के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना है।
भारत ने विज्ञान-आधारित प्रगति पेश की
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के प्रतिनिधिमंडल ने विज्ञान-आधारित पहलों के माध्यम से स्नो लेपर्ड संरक्षण में भारत की प्रगति को रेखांकित किया। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) के अधिकारियों ने आबादी अनुमान, रेडियो टेलीमेट्री और जेनेटिक एनालिसिस में हुई उपलब्धियों को प्रस्तुत किया। उन्होंने संरक्षण रणनीतियों को बेहतर बनाने और प्रजाति की प्रभावी निगरानी के लिए वैज्ञानिक उपकरणों व आधुनिक तकनीकों के बढ़ते महत्व पर जोर दिया।
विभिन्न रूसी संगठनों की भागीदारी
राउंडटेबल में रूसी संघ के प्राकृतिक संसाधन और पर्यावरण मंत्रालय, ए.एन. सेवरत्सोव इंस्टीट्यूट, मॉस्को चिड़ियाघर, रोस्प्रीरोडनादज़ोर (Rosprirodnadzor) तथा स्नो लेपर्ड अनुसंधान व संरक्षण से जुड़े प्रमुख विशेषज्ञ शामिल हुए।
ज्ञान आदान-प्रदान और सहयोग के अवसर
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने चर्चाओं और विशेष सत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इन सत्रों में स्नो लेपर्ड संरक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन के लिए संयुक्त कार्य के तरीकों पर फोकस किया गया। बैठक ने भारत और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के बीच ज्ञान का आदान-प्रदान, अनुभव साझा करने तथा अनुसंधान, आबादी निगरानी और संरक्षण प्रयासों में बेहतर सहयोग के अवसरों को तलाशने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।
यह बैठक स्नो लेपर्ड की सुरक्षा के प्रति भाग लेने वाले देशों और संगठनों की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है। यह प्रजाति दीर्घकालिक संरक्षण के लिए समन्वित वैश्विक प्रयासों की मांग करती है।