केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह असम के गुवाहाटी में केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) के 87वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा, CRPF के महानिदेशक और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। अपने संबोधन में शाह ने कहा कि CRPF ने 86 वर्षों में शौर्य, धैर्य और बलिदान के साथ देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत आधार दिया है।
आंतरिक सुरक्षा में CRPF की निर्णायक भूमिका
अमित शाह ने कहा कि CRPF के बिना देश की आंतरिक सुरक्षा की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि बल के 2,270 जवान देश की सुरक्षा में सर्वोच्च बलिदान दे चुके हैं। कर्तव्यपरायणता और साहस के कारण CRPF देश की सुरक्षा का मजबूत स्तंभ बनकर उभरी है।
हॉटस्पॉट से ग्रोथ स्पॉट तक का सफर
गृह मंत्री ने कहा कि एक समय जम्मू-कश्मीर, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र और नॉर्थईस्ट आंतरिक सुरक्षा के बड़े हॉटस्पॉट थे, लेकिन आज इन क्षेत्रों में शांति स्थापित हुई है और वे विकास के ग्रोथ इंजन बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन CRPF के बलिदान और समर्पण के बिना संभव नहीं था।
नॉर्थईस्ट में पहली बार स्थापना दिवस परेड
उन्होंने बताया कि 2019 में लिए गए निर्णय के तहत CAPF बलों की वार्षिक परेड देश के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित की जा रही है। इसी क्रम में CRPF के इतिहास में पहली बार स्थापना दिवस समारोह नॉर्थईस्ट में आयोजित हुआ, जो पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। समारोह में 14 जवानों को वीरता पदक और 5 जवानों को विशिष्ट सेवा का राष्ट्रपति पुलिस पदक प्रदान किया गया।
छोटी शुरुआत से विश्व का सबसे बड़ा CAPF
अमित शाह ने कहा कि 1939 में 2 बटालियन से शुरू हुआ CRPF आज 248 बटालियन और लगभग 3.25 लाख जवानों के साथ विश्व का सबसे बड़ा CAPF बन चुका है। बल ने संसद हमले और श्रीराम जन्मभूमि पर हमले को विफल करने सहित कई महत्वपूर्ण अभियानों में निर्णायक भूमिका निभाई है।
नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक संघर्ष
गृह मंत्री ने कहा कि देश को नक्सलवाद से मुक्त करने में CRPF और कोबरा फोर्स की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि 31 मार्च 2026 तक देश नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा। ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट में जवानों ने कठिन परिस्थितियों में अदम्य साहस का प्रदर्शन किया।
धार्मिक आयोजनों और राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान
उन्होंने कहा कि CRPF ने अमरनाथ यात्रा, महाकुंभ और अन्य बड़े धार्मिक आयोजनों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। देश की आंतरिक सुरक्षा और सार्वभौमत्व की रक्षा में बल की भूमिका हमेशा निर्णायक रही है।