पंजाब के लोगों के लिए चिंताजनक खबर सामने आई है। जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें पंजाब में खेतों में रासायनिक खाद, खासकर यूरिया के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले वर्ष संगरूर जिले में करीब 2.82 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उपयोग हुआ, जिससे यह देश में सबसे अधिक यूरिया इस्तेमाल करने वाला जिला बन गया।
केंद्रीय केमिकल और फर्टिलाइजर मंत्रालय की 9 जनवरी को जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के 100 सबसे ज्यादा यूरिया इस्तेमाल करने वाले जिलों में पंजाब के 14 जिले शामिल हैं। इनमें लुधियाना, पटियाला, बठिंडा, मुक्तसर, अमृतसर, फिरोजपुर, जालंधर, गुरदासपुर, बरनाला, फाजिल्का, तरनतारन, मोगा और मानसा का नाम भी सूची में है। डीएपी खाद के इस्तेमाल में भी पंजाब और हरियाणा के कई जिले देश के टॉप 100 में शामिल बताए गए हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि खाद के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता, भूजल और लोगों की सेहत पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। केंद्रीय फर्टिलाइजर विभाग के संयुक्त ने संबंधित जिला प्रशासन को पत्र लिखकर खाद के अनावश्यक इस्तेमाल पर रोक लगाने की जरूरत बताई है। रिपोर्ट के अनुसार देश के सैकड़ों जिलों में भूजल में नाइट्रेट की मात्रा तय सीमा से अधिक पाई गई है।
पंजाब कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कई किसान आसपास के किसानों को देखकर अधिक खाद डाल देते हैं, जबकि इसकी वास्तविक जरूरत नहीं होती। इसे रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। वहीं पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादा खाद डालने से पैदावार बढ़ने की धारणा गलत है और संतुलित उपयोग ही खेती और पर्यावरण के लिए बेहतर है।