अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने चेतावनी दी है कि अगर कोई देश ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद करता है, तो उसे भी अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही उन्होंने उन अटकलों को खारिज किया कि भारत और ईरान किसी नए व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ‘द ब्रायन किल्मीड शो’ को दिए एक इंटरव्यू में जब रुबियो से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरानी राष्ट्रपति और अन्य अधिकारियों के साथ हुई मुलाकातों तथा भारत-ईरान व्यापार समझौते की खबरों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने साफ कहा, “मुझे नहीं लगता कि भारत और ईरान के बीच कोई व्यापार समझौता हो रहा है।”
हर देश अपनी विदेश नीति खुद बनाता है
रुबियो ने माना कि दुनिया के कई देश ईरान के साथ संपर्क बनाए रखते हैं और अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के तहत फैसले लेते हैं। उन्होंने कहा, “हर देश अपनी विदेश नीति खुद बनाता है और दुनिया के कई देश ईरानी सरकार से बातचीत करते हैं। हमने भी कुछ चर्चाओं के दौरान ईरानी सरकार के प्रतिनिधियों से संपर्क किया है।” उन्होंने जोर देते हुए कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि किसी भी देश को ईरान को प्रतिबंधों से बचने या उसके लिए राजस्व जुटाने के रास्ते बनाने में मदद नहीं करनी चाहिए।
प्रतिबंधों से बचने में मदद पर सख्त रुख
रुबियो ने चेतावनी देते हुए कहा, “कोई भी देश ईरान को प्रतिबंधों से बचने में मदद न करे। कोई भी देश ऐसे तंत्र बनाने में मदद न करे जिनसे ईरान पैसा कमा सके, जिसका इस्तेमाल वह आतंकवाद को समर्थन देने और परमाणु हथियार बनाने की कोशिशों में कर सके। अगर कोई देश ऐसा करने का फैसला करता है तो हमें उस पर भी प्रतिबंध लगाने पड़ सकते हैं।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। रुबियो ने कहा, “ईरान को कभी परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी, कम से कम तब तक तो बिल्कुल नहीं जब तक राष्ट्रपति ट्रंप पद पर हैं।”
आर्थिक दबाव मुख्य हथियार, सैन्य विकल्प भी खुला
रुबियो ने बताया कि ईरान पर दबाव बनाने का अमेरिका का मुख्य तरीका आर्थिक है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर सैन्य कार्रवाई का विकल्प भी खुला है। उन्होंने कहा कि जब तक ईरान परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश करता रहेगा या ऐसा करने की इच्छा जताता रहेगा, उसे इसकी कीमत चुकानी होगी। यह कीमत मुख्य रूप से आर्थिक होगी। जरूरत पड़ने पर हम सैन्य कार्रवाई का अधिकार भी सुरक्षित रखते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान अपनी आर्थिक संसाधनों का उपयोग आम लोगों की भलाई के बजाय सशस्त्र समूहों को समर्थन देने में करता है। रुबियो ने कहा कि ईरान को पैसे दो चीजों के लिए चाहिए होते हैं—आतंकवाद को समर्थन देने के लिए और अंततः परमाणु हथियार हासिल करने के लिए। और हम ऐसा होने नहीं दे सकते।
होर्मुज स्ट्रेट पर भी टिप्पणी
रुबियो ने कहा कि ईरान व्यापारिक जहाजों पर हमले जारी रखे हुए है, जबकि अमेरिका ने जलडमरूमध्य में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाया है। हम उन सभी चीजों को निशाना बनाना जारी रखेंगे जो हमारी सेनाओं और वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए तत्काल खतरा हैं। होर्मुज स्ट्रेट खुला रहेगा और उस पर ईरान का नियंत्रण नहीं होगा। भारत और ईरान के बीच लंबे समय से राजनयिक और व्यापारिक संबंध रहे हैं। भारत ईरान के चाबहार बंदरगाह के विकास में भी सहयोग कर रहा है। चाबहार बंदरगाह भारत को पाकिस्तान से गुजरे बिना अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक व्यापारिक पहुंच प्रदान करता है, इसलिए इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।