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बाज़ार

आईआईटी रुड़की ने भारत के लिए तैयार किया हाई-रिजॉल्यूशन जलवायु डेटासेट, आपदा तैयारी और जलवायु जोखिम आकलन में मिलेगी मदद

15 मई, 2026 04:15 PM

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की के शोधकर्ताओं ने शुक्रवार को भारत के लिए एक ओपन-एक्सेस हाई-रिजॉल्यूशन जलवायु प्रोजेक्शन डेटासेट विकसित और जारी किया। 'इंड्रा-सीएमआईपी6' नाम का यह डेटा सेट भारत में क्षेत्रीय जलवायु अनुकूलन, आपदा तैयारी और जलवायु जोखिम आकलन को मजबूत बनाने में मदद करेगा।

आईआईटी रुड़की के जल विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित इस डेटा सेट को नेचर पोर्टफोलियो की पत्रिका 'साइंटिफिक डेटा' में प्रकाशित किया गया है। यह डेटासेट भारतीय उपमहाद्वीप के लिए लगभग 10 किलोमीटर के स्थानिक रिजॉल्यूशन पर दैनिक वर्षा और तापमान का अनुमान उपलब्ध कराता है।

यह पहल वैश्विक जलवायु मॉडलों से जुड़ी एक बड़ी समस्या को दूर करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। वैश्विक मॉडल अक्सर बड़े पैमाने पर अनुमान देते हैं, जिससे भारत की जटिल भौगोलिक परिस्थितियों, मानसून प्रणाली और क्षेत्रीय मौसम की चरम स्थितियों का सही आकलन नहीं हो पाता।

हाल के वर्षों में भारत में जलवायु परिवर्तन का असर तेजी से बढ़ा है, जिसमें बढ़ता तापमान, अनियमित मानसून, शहरी बाढ़, लू का तनाव और जल संसाधनों पर बढ़ता दबाव शामिल है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि शहरी जल निकासी योजना, तटबंधों को मजबूत करने, बाढ़ की तैयारी और जलवायु-अनुकूल कृषि जैसे कदमों के लिए जिला और नदी बेसिन स्तर पर जलवायु अनुमान जरूरी हैं; केवल महाद्वीपीय औसत आंकड़े पर्याप्त नहीं होते।

इंड्रा-सीएमआईपी6 डेटासेट को 14 सीएमआईपी6 वैश्विक जलवायु मॉडलों के आउटपुट के आधार पर तैयार किया गया है। इसके लिए 'डबल बायस-करेक्टेड कंस्ट्रक्टेड एनालॉग (डीबीसीसीए)' नामक सांख्यिकीय डाउनस्केलिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया।

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह तकनीक भारतीय उपमहाद्वीप में दैनिक मौसम बदलाव, क्षेत्रीय वर्षा वितरण और तापमान की चरम स्थितियों को बेहतर तरीके से दर्शाती है।

इस डेटासेट में 0.1° × 0.1° रिजॉल्यूशन पर दैनिक वर्षा, न्यूनतम तापमान और अधिकतम तापमान के अनुमान शामिल हैं।

शोधकर्ताओं ने अलग-अलग जलवायु मॉडल के आउटपुट के साथ-साथ मल्टी-मॉडल एंसेंबल भी उपलब्ध कराया है, जिससे उपयोगकर्ता विभिन्न अनुमानों की तुलना कर सकते हैं और केवल एक जलवायु अनुमान पर निर्भर रहने के बजाय अनिश्चितताओं का भी आकलन कर सकते हैं।

शोध टीम द्वारा किए गए तकनीकी परीक्षणों में पाया गया कि इंड्रा-सीएमआईपी6 वैश्विक जलवायु मॉडलों में पाई जाने वाली कई सामान्य त्रुटियों को काफी हद तक कम करता है।

यह डेटासेट अत्यधिक वर्षा और तापमान की चरम घटनाओं के आकलन को भी बेहतर बनाता है। यह खासतौर पर उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां स्थानीय भूगोल, मानसून और पहाड़ी संरचना जलवायु जोखिमों को प्रभावित करती है।

आईआईटी रुड़की के जल विज्ञान विभाग के अंकित अग्रवाल ने कहा, "भारत में जलवायु जोखिम काफी हद तक स्थानीय स्तर पर केंद्रित हैं, खासकर मानसून और पहाड़ी क्षेत्रों में। इंड्रा-सीएमआईपी6 जैसे सूक्ष्म स्तर के जलवायु अनुमान वैश्विक जलवायु विज्ञान को योजनाकारों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं के लिए उपयोगी जानकारी में बदलने में बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे डेटासेट को ओपन-एक्सेस में उपलब्ध कराने से वैज्ञानिक सहयोग मजबूत होता है और बेहतर जलवायु अनुकूलन रणनीतियों को समर्थन मिलता है।"

वहीं, कमल किशोर पंत ने कहा, "जलवायु परिवर्तन हमारे समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। ऐसे में वैज्ञानिक संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे समाज के लिए विश्वसनीय और सुलभ ज्ञान संसाधन तैयार करें। इंड्रा-सीएमआईपी6 आईआईटी रुड़की की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत संस्था जलवायु लचीलापन, सतत विकास और प्रमाण-आधारित नीति निर्माण के लिए प्रभावशाली शोध को आगे बढ़ा रही है।"

 

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