अयोध्या में चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर रामनवमी का पावन पर्व पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। राम मंदिर में सुबह से ही भगवान रामलला का विशेष शृंगार किया गया और पूरी राम नगरी भक्ति के रंग में रंगी नजर आई।
भोर से खुले मंदिर के पट, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
राम जन्मभूमि परिसर समेत कनक भवन और हनुमानगढ़ी में भी भक्तों की भारी भीड़ देखी जा रही है। भोर से ही रामलला के दर्शन के लिए मंदिर के पट खोल दिए गए, जिसके बाद श्रद्धालुओं का तांता लग गया। देशभर से पहुंचे भक्त भगवान के जन्मोत्सव में शामिल हो रहे हैं।
मंगला आरती और अभिषेक से शुरू हुई विशेष पूजा
रामनवमी की विशेष पूजा की शुरुआत सुबह मंगला आरती से हुई। ब्रह्ममुहूर्त में पट खुलने के बाद रामलला का पंचगव्य, सरयू जल और सुगंधित द्रव्यों से अभिषेक किया गया। इसके बाद उनका आकर्षक शृंगार हुआ और कपूर आरती के साथ पूजा संपन्न हुई।
दोपहर 12 बजे होगा सूर्य तिलक, 4 मिनट रहेगा दिव्य दृश्य
इस पावन अवसर का मुख्य आकर्षण दोपहर 12 बजे होने वाला सूर्य तिलक है। विशेष तकनीक के जरिए सूर्य की किरणें दर्पण और लेंस से होकर रामलला के माथे पर पड़ेंगी। यह अद्भुत दृश्य करीब 4 मिनट तक रहेगा। इस दौरान भगवान को 56 प्रकार के भोग और पंजीरी का प्रसाद अर्पित किया जाएगा।
कड़ी सुरक्षा के बीच भक्ति का माहौल, गूंजेगा बधाई गान
रामलला के जन्मोत्सव पर लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ बधाई गान भी होगा, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।
मंदिर निर्माण के बाद पहली भव्य रामनवमी, श्रद्धालुओं में उत्साह
राम मंदिर निर्माण के बाद इस बार रामनवमी का उत्साह और अधिक बढ़ गया है। दूर-दूर से श्रद्धालु रामलला के दर्शन के साथ सरयू नदी में स्नान करने के लिए पहुंच रहे हैं।
नागर शैली में बना भव्य मंदिर, चारों कोनों पर देवालय
राम मंदिर उत्तर भारत की पारंपरिक नागर शैली में निर्मित है। परिसर के चारों कोनों पर सूर्य देव, देवी भगवती, भगवान गणेश और भगवान शिव को समर्पित मंदिर हैं। दक्षिण-पश्चिम भाग में कुबेर टीला पर जटायु की भव्य मूर्ति भी स्थापित की गई है।