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Year Ender 2025: 375 वस्तुओं पर GST घटा, आयकर में छूट बढ़ी—अब कस्टम ड्यूटी की बारी

25 दिसंबर, 2025 06:22 PM

भारत ने 2025 में अपने कर ढांचे में व्यापक सुधार किए हैं, जिनमें जीएसटी दरों में बड़ी कटौती और आयकर छूट में बढ़ोतरी शामिल है। इन कदमों का मकसद चुनौतीपूर्ण वैश्विक आर्थिक माहौल के बीच घरेलू मांग को बढ़ावा देना और आर्थिक वृद्धि को सहारा देना रहा।

अब सरकार की नजर आगामी बजट में सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) के युक्तिकरण और प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर टिकी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पहले ही संकेत दे चुकी हैं कि सीमा शुल्क सुधार सरकार के सुधार एजेंडे का अगला बड़ा चरण होगा।

1 अप्रैल से लागू होगा नया आयकर कानून
एक अप्रैल 2026 से नया सरलीकृत आयकर अधिनियम, 2025 लागू होगा, जो छह दशक पुराने आयकर अधिनियम, 1961 की जगह लेगा। इसके साथ ही सिगरेट पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और पान मसाला पर जीएसटी के ऊपर विशेष उपकर लगाने के लिए दो नए कानून भी तय तारीख से लागू किए जाएंगे।


GST में बड़े बदलाव, उपभोग को बढ़ावा
2025 में कर सुधारों की सबसे बड़ी विशेषता 22 सितंबर से लगभग 375 वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी दरों में कटौती रही। इससे रोजमर्रा की वस्तुओं पर कर का बोझ कम हुआ और लंबे समय से चली आ रही इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर की समस्या को दूर करने में मदद मिली।

इसके अलावा, चार-स्तरीय जीएसटी ढांचे (5%, 12%, 18% और 28%) को दो मुख्य दरों—5% और 18%—में समेटना अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को सरल और तार्किक बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना गया। इन बदलावों का उद्देश्य कर व्यवस्था को अधिक सरल, पारदर्शी और पूर्वानुमान योग्य बनाना था, साथ ही मुकदमेबाजी को कम करना भी।


GST संग्रह पर दिखा असर
दर कटौती का असर जीएसटी राजस्व पर भी दिखा।
अप्रैल में जीएसटी संग्रह रिकॉर्ड 2.37 लाख करोड़ रुपए रहा
चालू वित्त वर्ष 2025-26 में औसत संग्रह 1.9 लाख करोड़ रुपए रहा
हालांकि, व्यापक दर कटौतियों के बाद वृद्धि की रफ्तार धीमी हुई। नवंबर में जीएसटी संग्रह घटकर 1.70 लाख करोड़ रुपए पर आ गया, जो सालाना आधार पर सिर्फ 0.7% की बढ़ोतरी दिखाता है। यह वह पहला महीना था जब सितंबर में हुई दर कटौती का पूरा असर नजर आया।


आयकर छूट से मध्यम वर्ग को राहत
प्रत्यक्ष कर के मोर्चे पर सरकार ने आयकर छूट की सीमा बढ़ाई, जिससे मध्यम आय वर्ग के करदाताओं को राहत मिली और उपभोक्ताओं के हाथों में ज्यादा खर्च करने योग्य आय आई। इसे खासतौर पर शहरी परिवारों में उपभोग बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है, साथ ही इससे सरलीकृत कर व्यवस्था के तहत स्वैच्छिक अनुपालन को भी बढ़ावा मिला है।


अब फोकस सीमा शुल्क सुधारों पर
विशेषज्ञों का मानना है कि अब कर सुधारों का अगला चरण सीमा शुल्क प्रक्रियाओं के सरलीकरण और डिजिटलीकरण पर केंद्रित होना चाहिए।

डेलॉयट इंडिया के पार्टनर और अप्रत्यक्ष कर प्रमुख महेश जयसिंह के मुताबिक, “व्यापार के बदलते स्वरूप, बढ़ती अनुपालन लागत और प्रक्रियात्मक बाधाएं सीमा शुल्क सुधारों के अगले चरण की जरूरत को दर्शाती हैं।”

वहीं, नांगिया ग्लोबल के अप्रत्यक्ष कर साझेदार राहुल शेखर का कहना है कि सीमा शुल्क प्रक्रियाओं का पूरी तरह डिजिटलीकरण, दस्तावेजों में एकरूपता, पूर्वानुमान योग्य वर्गीकरण प्रणाली और जोखिम-आधारित त्वरित मंजूरी से व्यापार सुगमता और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सरकार पुराने सीमा शुल्क विवादों के एकमुश्त निपटान पर विचार कर सकती है, जिससे राजस्व बढ़ाने के साथ मुकदमेबाजी का बोझ कम होगा।

 

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