नई दिल्ली : चुनाव आयोग की ओर से चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत मतदाता सूचियों को बड़े पैमाने पर संशोधित किया जा रहा है. इस बीच चुनाव आयोग की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत फाइनल वोटर रोल के पब्लिश होने के बाद नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वोटरों की संख्या में 1.70 करोड़ से ज्यादा की कमी आई है.
गुजरात, पुडुचेरी, लक्षद्वीप, राजस्थान, छत्तीसगढ़, अंडमान और निकोबार आइलैंड, गोवा और केरल के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर्स द्वारा शनिवार को शेयर किए गए डेटा से पता चला कि पिछले साल 27 अक्टूबर को विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान शुरू होने से पहले उनका कुल वोटर बेस 21.45 करोड़ से ज्यादा था.
इस हफ़्ते फाइनल इलेक्टोरल रोल के पब्लिकेशन के बाद यह घटकर 19.75 करोड़ रह गया, यानी कुल 1.70 करोड़ से ज्यादा वोटर बदले हैं. यह काम जिसने इलेक्शन कमीशन को सुर्खियों में रखा, बिहार में पूरा हो चुका है, लेकिन अभी यह 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहा है, जिसमें लगभग 60 करोड़ वोटर शामिल हैं.
बाकी 40 करोड़ वोटर 17 राज्यों और पाँच केंद्र शासित प्रदेशों में कवर किए जाएँगे. असम में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के बजाय 'स्पेशल रिविजन' 10 फरवरी को पूरा किया गया. कई वजहों से नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के शेड्यूल में बार-बार बदलाव हुए हैं. बिहार की तरह, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में भी राजनीतिक पार्टियों ने इस काम को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.