सहारा इंडिया के निवेशक बेसब्री से अपनी मेहनत की कमाई का इंतजार कर रहे हैं। लंबे इंतजार के बाद भी निवेशकों को उनकी मेहनत की कमाई वापिस नहीं मिल रही है। वहीं इस बीच सहारा इंडिया को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई। बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह की कंपनी की ओर से दायर याचिका जिसमें अदाणी समूह को अपनी कुछ संपत्तियां बेचने की अनुमति मांगी गई है.. को लेकर सुनवाई छह सप्ताह के लिए टाल दी है,,, अदालत ने मामले में केंद्र सरकार से भी जवाब मांगा है। इस बीच केंद्र सरकार ने वित्तीय संकट से जूझ रही सहारा इंडिया कमर्शियल कारपोरेशन लिमिटेड की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए और समय मांगा है।
मामले की सुनवाई छह हफ्ते के लिए टली
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश की पीठ के सामने समय की मांग का अनुरोध किया था। अदालत ने अनुरोध स्वीकार कर लिया और मामले की सुनवाई छह हफ्ते के लिए टाल दी गई है। इसके अलावा सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह भी अनुरोध किया कि वित्त मंत्रालय और सहकारिता मंत्रालय को भी कार्यवाही में पक्षकार बनाया जाए, क्योंकि उन्होंने सहारा समूह की संस्थाओं में निवेश किया था या उनसे आर्थिक रूप से संबद्ध थीं। सरकार का तर्क है कि सहारा ग्रुप की कई सहकारी समितियों का पैसा इसमें फंसा हुआ है। इसका सीधा संबंध आम निवेशकों से है।
सहारा कर्मचारियों द्वारा लंबित वेतन जारी करने की मांग वाली याचिका पर भी सुनवाई टली
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सहारा कर्मचारियों द्वारा लंबित वेतन जारी करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई भी टाल दी है। इस मामले में न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर नफड़े ने अदालत को बताया कि, उन्हें सहारा की ओर से बेची जाने वाली संपत्तियों को लेकर कई आपत्तियां मिली हैं, उन्होंने विशेष रूप से 34 संपत्तियों पर आपत्ति दर्ज कराई है, कंपनी को अपनी संपत्तियों की एक विस्तृत सूची अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करने का निर्देश दिया जाए। हालांकि, अदालत ने इस पर कोई आदेश नहीं दिया है। सहारा समूह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि, वे न्यायामित्र के नोट पर अपना जवाब दाखिल करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई संपत्तियां जाली दस्तावेजों के आधार पर बेची या लीज पर दी गई थीं.. इस पर पीठ ने स्पष्ट किया कि बिक्री या लीज के दस्तावेजों की जांच का उपयुक्त मंच ट्रायल कोर्ट या कोई नियुक्त समिति होगी। बता दें कि सहारा ग्रुप अपनी आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए अपनी बेशकीमती संपत्तियां अडानी ग्रुप को बेचना चाहता है.. इसके लिए SICCL ने महाराष्ट्र में एंबी वैली और लखनऊ में सहारा शहर सहित 88 संपत्तियों को 12,000 करोड़ रुपये में बेचने के लिये सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मांगी थी। गौरतलब है कि, सहारा की प्रॉपर्टी डील हजारों करोड़ रुपये की है।