चंडीगढ़ : पंजाब यूनिवर्सिटी (Panjab University - PU) की 59 साल पुरानी सीनेट (Senate) और सिंडिकेट (Syndicate) को भंग करने के केंद्र सरकार के फैसले पर अब आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी तीखा हमला बोला है। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा (Harpal Singh Cheema) ने आज (शनिवार) एक प्रेस कॉन्फ्रेंस (press conference) करते हुए केंद्र के इस कदम को "पंजाब विरोधी" और "असंवैधानिक" करार दिया है।
चीमा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का यह फैसला पंजाब के लिए "बेहद खतरनाक" (very dangerous) है और यह पंजाब से उसकी विरासत (heritage) छीनने की एक सोची-समझी साजिश है।
"यह पंजाब पर सीधा हमला है"
वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने BJP के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह फैसला "तानाशाही" (dictatorial) तरीके से लिया गया है।
1. 'गैर-संवैधानिक' कदम: चीमा ने कहा कि केंद्र सरकार का यह फैसला पूरी तरह से 'गैर-संवैधानिक' (unconstitutional) है। उन्होंने कहा कि केंद्र को ऐसा फैसला लेने से पहले पंजाब सरकार के साथ सलाह-मशवरा (consultation) करना चाहिए था।
2. विधानसभा की मंजूरी: उन्होंने याद दिलाया कि मौजूदा सीनेट संरचना (Senate structure) को 'पंजाब यूनिवर्सिटी एक्ट 1947' (Panjab University Act 1947) के तहत पंजाब विधानसभा (Punjab Vidhan Sabha) द्वारा विधिवत मंजूरी दी गई थी, लेकिन केंद्र ने इसे एकतरफा भंग कर दिया। चीमा ने इसे "पंजाब पर सीधा हमला" (direct attack on Punjab) बताया।
"PU पंजाब की विरासत, जिसे छीनने की कोशिश हो रही"
हरपाल चीमा ने कहा कि केंद्र सरकार हमेशा से पंजाब के साथ "धक्का" (अन्याय - injustice) करती आई है और अब पंजाब की विरासत (heritage) को उससे छीनने की कोशिश की जा रही है।
1. उन्होंने कहा, "पंजाब यूनिवर्सिटी पंजाब की विरासत है, जिसे खोने की कोशिश केंद्र सरकार ने शुरू कर दी है।"
2. 18 सदस्यों पर सवाल: उन्होंने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि नए ढांचे में अब सिर्फ 18 सदस्य ही चुने जाएंगे, जो यह साबित करता है कि केंद्र पंजाब के साथ कितना बड़ा अन्याय कर रहा है।
केंद्र को चेतावनी: "फैसला वापस लो, वरना..."
'आप' (AAP) नेता ने केंद्र सरकार को चेतावनी (warning) देते हुए कहा कि वह अपना यह "तानाशाही फैसला" तुरंत वापस ले।
1. चीमा ने कहा, "पंजाब की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। हम चुप नहीं रहेंगे और हम इसका सख्त विरोध (strongly oppose) करेंगे।"
2. उन्होंने ऐलान किया कि इस फैसले के खिलाफ जल्द ही कोई "बड़ा एक्शन" (big action) लिया जाएगा।