गुरदासपुर : पंजाब में धान की कटाई के बाद खेतों में पराली जलाने की प्रथा को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल काफी सख्ती कर रहा है। अब अदालतों के आदेशों के बाद जिला गुरदासपुर का प्रशासन भी इस मामले के हल के लिए खुद किसानों के पास गांवों में पहुंच रहा है।
इसी कड़ी में गुरदासपुर के अतिरिक्त डिप्टी कमिश्रर हरजिंदर सिंह बेदी और कृषि अधिकारी गांव नानोवाल जिंदड़ पहुंचे। जहां जिला प्रशासन ने बड़ी संख्या में किसानों और ग्रामीणों को इसके उद्देश्य से अवगत कराया। इस अवसर पर अतिरिक्त डिप्टी हरजिंदर सिंह बेदी ने कहा कि खेतों में पराली जलाने से न केवल बड़े पैमाने पर पर्यावरण प्रदूषण होता है, बल्कि खेतों की उपजाऊ शक्ति भी कम होती है। उन्होंने कहा कि किसानों को सब्सिडी पर आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं ताकि पराली को खेतों में जोता जा सके।
उन्होंने कहा कि उनका एकमात्र उद्देश्य गुरदासपुर जिले को शून्य प्रतिशत पराली जलाने वाला बनाना है। पंचायत की जमीन ठेके पर लेने वाले किसान अगर खेतों में पराली को आग लगाते है तो अगले साल उसे पंचायत की जमीन ठेके पर नहीं मिलेगी। इसके अलावा उन्होंने कहा कि सख्त कार्रवाई में राजस्व विभाग के किसानों के आंकड़ों में पंक्ति प्रविष्टि के अलावा कई अन्य दस्तावेजों पर भी सरकारी कार्रवाई हो सकती है, जिससे किसानों और उनके परिवार के बच्चों का भविष्य भी अंधकारमय हो सकता है।
इस अवसर पर जिला कृषि अधिकारी डॉ. अमरीक सिंह भी अपनी टीम के साथ मौके पर मौजूद थे। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे सरकार द्वारा उपलब्ध करवाए गए बेलर के माध्यम से धान की पराली की गांठें बनाकर खेतों से निकलवा सकते हैं। किसानों ने मुद्दा उठाया कि बेलर द्वारा बनाई गई पराली की गांठें समय पर नहीं उठाई जाती, जिससे उनकी गेहूं और अन्य फसलों की बिजाई में देरी हो रही है। इसके अलावा, उनके पास इस पराली को रखने के लिए आवश्यक जमीन नहीं है और इसकी लागत भी बहुत ज़्यादा है। इस अवसर पर अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर और जिला प्रशासन ने किसानों से कहा कि उनकी हर हाल में मदद की जाएगी।
इस मौके पर गांव के पूर्व ए.डी.ओ. रविंदर सिंह, पूर्व सरपंच हरदीप सिंह, ज्ञानी भूपिंदर सिंह, नंबरदार काबल सिंह, संदीप सिंह, सरवन सिंह, गांव जिंदर के सरपंच परमजीत सिंह सहित गांव के गणमान्य व्यक्ति और किसान मौजूद थे।