Wednesday, July 01, 2026
BREAKING
अमित शाह ने लॉन्च किए FCRA 2.0 पोर्टल और e-OCI कार्ड, 50 लाख OCI कार्डधारकों को मिलेगा लाभ जनजातीय समाज के नेतृत्व और आत्मविश्वास का केंद्र बने केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय: राष्ट्रपति मुर्मु स्वस्थ भारत के माध्यम से ही विकसित भारत का सपना साकार हो सकता है: जेपी नड्डा साक्ष्य आधारित शिक्षा सुधारों की ओर बढ़ा उत्तर प्रदेश, कक्षा-कक्ष के अनुभवों से तय होगी नई रणनीति पंजाब: सीएम मान ने संगरूर में ओलंपिक स्तर के स्विमिंग पूल का उद्घाटन किया, कहा-भविष्य में ओलंपियनों की नर्सरी बनेगा मानवता की मिसाल: काफिला रुकवाकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डा. अर्चना गुप्ता ने दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को संभाला राज्यपाल घोष का आह्वान: पूर्व छात्र बढ़ाएं सहयोग, आर्थिक तंगी किसी मेधावी की पढ़ाई में न बने बाधा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हरियाणा एफ.पी.ओ. मिशन-2026 का किया शुभारंभ राम मंदिर ट्रस्ट पर सवाल उठाने पर अजय राय को हाउस अरेस्ट करना असंवैधानिक, विपक्ष की आवाज़ दबाने का प्रयास : राव नरेंद्र सिंह सीबीआई ने IDFC First Bank फंड गबन मामले में दो बैंक अधिकारियों को किया गिरफ्तार

राष्ट्रीय

Covid Vaccine के साइड इफेक्ट्स पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, टीके के गंभीर साइड इफेक्ट्स या मौतों के लिए सरकार को देनी होगी 'नो-फॉल्ट' राहत

14 मार्च, 2026 05:22 PM

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को प्रभावित करने वाला एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह कोविड-19 वैक्सीन के गंभीर दुष्प्रभावों या इसके कारण होने वाली मौतों के लिए एक 'नो-फॉल्ट' मुआवजा नीति (No-Fault Compensation Policy) तैयार करे। इस फैसले की सबसे खास बात यह है कि अब पीड़ित परिवारों को कोर्ट में यह साबित करने की मशक्कत नहीं करनी होगी कि मौत या बीमारी के लिए राज्य सरकार प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार है। अदालत का मानना है कि चूंकि वैक्सीनेशन एक राज्य-प्रायोजित सार्वजनिक अभियान था, इसलिए इसके दौरान होने वाली किसी भी अनहोनी के लिए राहत प्रदान करना राज्य की नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी बनती है। यह निर्णय उन याचिकाओं पर आया है जिनमें वैक्सीन के बाद स्वास्थ्य बिगड़ने या जान गंवाने का दावा किया गया था।

अनुच्छेद 21 और सामाजिक न्याय: क्यों जरूरी है यह फैसला
इस फैसले के पीछे का मुख्य आधार भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 है, जो हर नागरिक को जीवन और स्वास्थ्य का अधिकार देता है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब सरकार जनता की भलाई के लिए बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाती है, तो उसका कर्तव्य केवल वैक्सीन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके जोखिमों को संभालना भी उसी की जिम्मेदारी है। 'नो-फॉल्ट' नीति का सीधा अर्थ है कि बिना किसी का दोष सिद्ध किए पीड़ित को आर्थिक या चिकित्सीय सहायता दी जाए। दुनिया के कई विकसित देशों में ऐसी व्यवस्था पहले से मौजूद है। भारत जैसे देश में, जहां करोड़ों लोगों ने इस अभियान में हिस्सा लेकर महामारी को रोकने में मदद की, वहां उन मुट्ठी भर लोगों के साथ खड़ा होना जरूरी है जिन्होंने इसके लिए व्यक्तिगत कीमत चुकाई है।

कार्यान्वयन की चुनौतियां: क्या भारत का सिस्टम इस बोझ को उठा पाएगा?
हालांकि यह फैसला न्यायपूर्ण है, लेकिन इसे जमीन पर उतारना एक बेहद जटिल काम है। सबसे बड़ी चुनौती यह साबित करने की है कि क्या किसी विशेष स्वास्थ्य समस्या या मौत का सीधा संबंध वैक्सीन से ही था। वैज्ञानिक रूप से इसे लिंक करना आसान नहीं है। इसके अलावा, भारत जैसे विशाल देश में मेडिकल रिकॉर्ड की स्थिति, खासकर ग्रामीण इलाकों में, बहुत सुदृढ़ नहीं है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या सरकार के पास इतने प्रशासनिक संसाधन और विशेषज्ञ पैनल हैं जो हर दावे की बारीकी से जांच कर सकें।

स्वास्थ्य मंत्रालय के पास पहले से ही एडवर्स इफेक्ट्स फॉलोइंग इम्यूनाइजेशन (AEFI) की निगरानी प्रणाली है, लेकिन वह बहुत धीमी है। नई नीति आने के बाद दावों की एक बाढ़ आ सकती है, जिसमें फर्जी दावों और बिचौलियों के सक्रिय होने का भी डर है, जो सरकारी खजाने और सिस्टम पर भारी दबाव डाल सकते हैं।

भविष्य की सुरक्षा और सार्वजनिक विश्वास का निर्माण
इन तमाम व्यावहारिक और वित्तीय कठिनाइयों के बावजूद, यह फैसला भविष्य की महामारियों से निपटने के लिए एक मजबूत नींव रखता है। यदि नागरिकों को यह भरोसा होगा कि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में राज्य उनके साथ खड़ा है, तो सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों के प्रति उनका विश्वास और बढ़ेगा। यह नीति वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों की जवाबदेही और राज्य के संरक्षण के बीच एक संतुलन बनाने की कोशिश है। अंततः, एक लोकतांत्रिक समाज में राज्य की भूमिका केवल रक्षक की नहीं, बल्कि एक सहायक की भी होती है। गरीब परिवारों को लंबी अदालती लड़ाइयों से मुक्ति दिलाकर यह फैसला यह संदेश देता है कि भारत अपने नागरिकों के स्वास्थ्य अधिकारों के प्रति गंभीर है और न्याय अब केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा।

 

Have something to say? Post your comment

और राष्ट्रीय खबरें

अमित शाह ने लॉन्च किए FCRA 2.0 पोर्टल और e-OCI कार्ड, 50 लाख OCI कार्डधारकों को मिलेगा लाभ

अमित शाह ने लॉन्च किए FCRA 2.0 पोर्टल और e-OCI कार्ड, 50 लाख OCI कार्डधारकों को मिलेगा लाभ

जनजातीय समाज के नेतृत्व और आत्मविश्वास का केंद्र बने केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय: राष्ट्रपति मुर्मु

जनजातीय समाज के नेतृत्व और आत्मविश्वास का केंद्र बने केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय: राष्ट्रपति मुर्मु

स्वस्थ भारत के माध्यम से ही विकसित भारत का सपना साकार हो सकता है: जेपी नड्डा

स्वस्थ भारत के माध्यम से ही विकसित भारत का सपना साकार हो सकता है: जेपी नड्डा

साक्ष्य आधारित शिक्षा सुधारों की ओर बढ़ा उत्तर प्रदेश, कक्षा-कक्ष के अनुभवों से तय होगी नई रणनीति

साक्ष्य आधारित शिक्षा सुधारों की ओर बढ़ा उत्तर प्रदेश, कक्षा-कक्ष के अनुभवों से तय होगी नई रणनीति

CJI सूर्यकांत के पास पहुंचा INDIA गठबंधन, चुनाव आयोग की कर दी शिकायत

CJI सूर्यकांत के पास पहुंचा INDIA गठबंधन, चुनाव आयोग की कर दी शिकायत

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले का राजनीतिकरण करना ठीक नहीं : मायावती

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले का राजनीतिकरण करना ठीक नहीं : मायावती

शिवराज सिंह चौहान आज गुवाहाटी में उच्चस्तरीय बैठक करेंगे, 1 जुलाई को अरुणाचल प्रदेश के बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का करेंगे दौरा

शिवराज सिंह चौहान आज गुवाहाटी में उच्चस्तरीय बैठक करेंगे, 1 जुलाई को अरुणाचल प्रदेश के बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का करेंगे दौरा

तटरक्षक बल का अद्भुत साहसिक अभियान, छह मछुआरों को सुरक्षित बचाया

तटरक्षक बल का अद्भुत साहसिक अभियान, छह मछुआरों को सुरक्षित बचाया

जनरल धीरज सेठ बने भारतीय सेना के नए सेना प्रमुख

जनरल धीरज सेठ बने भारतीय सेना के नए सेना प्रमुख

अंतरराष्ट्रीय संसदीय दिवस पर ओम बिरला ने दी शुभकामनाएं, संसद को बताया लोकतंत्र की सर्वोच्च अभिव्यक्ति

अंतरराष्ट्रीय संसदीय दिवस पर ओम बिरला ने दी शुभकामनाएं, संसद को बताया लोकतंत्र की सर्वोच्च अभिव्यक्ति