गुवाहाटी : असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए असम के अपने हालिया दौरे को लेकर हमला किया. उन्होंने कहा कि वह वह राज्य का दौरा करने नहीं बल्कि कलह सुलझाने आई थीं. इस चक्कर में उन्हें तड़के 3 बजे तक जागना पड़ा.
असम में कांग्रेस की नेशनल जनरल सेक्रेटरी और स्क्रीनिंग कमेटी की चेयरपर्सन प्रियंका गांधी के दो दिन के असम दौरे के दौरान सुबह 3 बजे तक काम करने को लेकर हो रही जोरदार चर्चा के दौरान, बीजेपी के सीनियर नेता और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने असम कांग्रेस का एक सीक्रेट अंदरूनी ऑफिशियल डॉक्यूमेंट देखकर इस बारे में टिप्पणी की.
उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रियंका गांधी काम करने नहीं आई थीं बल्कि अपने अंदरूनी झगड़ों को शांत कराने आईं थीं. 19 फरवरी को प्रियंका गांधी एआईसीसी स्क्रीनिंग कमेटी के चेयरमैन के तौर पर 2026 में अगले विधानसभा चुनाव के लिए कैंडिडेट चुनने में हिस्सा लेने के लिए दो दिन के दौरे पर असम आईं थीं.
जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं से मिलने के अलावा, कांग्रेस की टॉप लीडर ने खुद सुबह 3 बजे तक बड़ी संख्या में नेताओं के साथ वन-ऑन-वन मीटिंग की. इस मैराथन मीटिंग चर्चा सोशल मीडिया पर होने लगी. शनिवार रात मीडिया को कांग्रेस का एक सीक्रेट अंदरूनी पेपर दिखाते हुए, हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि प्रियंका गांधी को एआईसीसी के असम के इंचार्ज जनरल सेक्रेटरी भंवर जितेंद्र सिंह के गौरव गोगोई को भेजे गए एक इंस्ट्रक्शन लेटर से शुरू हुए झगड़े को सुलझाने में रात बितानी पड़ी.
मुख्यमंत्री ने कहा, 'जितेंद्र सिंह ने गौरव गोगोई को एक लेटर दिया था जिसमें कहा गया था कि असम में पार्टी को ऑर्गनाइज करने की जिम्मेदारी तीन वर्किंग प्रेसिडेंट में बांटी जानी चाहिए लेकिन, मिस्टर गौरव गोगोई ने जितेंद्र सिंह के निर्देशों का पालन नहीं किया.'
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि असम प्रदेश कांग्रेस प्रेसिडेंट गौरव गोगोई के इन निर्देशों को न मानने के फैसले के बाद कांग्रेस नेताओं के एक ग्रुप के बीच झगड़ा शुरू हो गया. सरमा बताते हैं कि प्रियंका गांधी लड़ाई खत्म करने के लिए सुबह 3 बजे तक राजीव भवन हेडक्वार्टर में रुकीं.
आप कह रहे हैं कि उन्होंने सुबह 3 बजे तक काम किया. वह सुबह 3 बजे तक 'काम' नहीं कर रही थीं. उन्हें अपने अंदरूनी झगड़े सुलझाने में सुबह 3:00 बजे तक का समय लग गया. नहीं तो इन कुछ लोगों से मिलने में सिर्फ आधा घंटा लगता. इसीलिए इतनी देर हो गई. मुझे तो यह भी बुरा लग रहा है कि प्रियंका गांधी को सिर्फ झगड़े सुलझाने के लिए यहां आना पड़ा. यह सही नहीं लगता, 'सरमा ने आगे कहा.