बीजेपी संगठन में बदलाव के बाद अब चर्चा है कि संघ में भी बड़े बदलाव हो सकते हैं। जेन-अल्फा और जेन-जी को ध्यान में रखते हुए संघ खुद को युवाओं के हिसाब से ढाल रहा है और संपर्क भी बढ़ा रहा है। भाजपा ने अपने संगठन की नई टीम के जरिए देश की बदली हुई राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों में पार्टी को पुराने ढांचे से नए स्वरूप में बदलना शुरू कर दिया है। इसमें सबसे बड़ा बदलाव नए नेतृत्व को फैसले लेने की पूरी छूट देने का है। पार्टी के वरिष्ठ नेता एक तरह से मार्गदर्शन की भूमिका में रहेंगे। संगठन चाहेगा तो उनसे जरूरी सलाह और मदद ले सकेगा। राजनीतिक दलों में समय-समय पर पीढ़ीगत बदलाव होते रहते हैं। इसके बाद संघ में भी अहम बदलाव हो सकते हैं। हालांकि संघ प्रमुख के बदलाव की कोई चर्चा नहीं है।
आम तौर पर विपक्षी भूमिका को इसके लिए सबसे अनुकूल माना जाता है। सत्ता में रहते हुए ज्यादा प्रयोगों से बचा जाता है, लेकिन भाजपा जो लंबे लक्ष्य को लेकर चल रही है, उसने केंद्र में एक दशक से ज्यादा समय से जारी शासन के साथ इस बदलाव की शुरूआत की है। पार्टी के युवा अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी टीम में युवाओं के साथ अनुभवी नेताओं को भी रखा है, लेकिन फैसलों में स्वतंत्र भूमिका रखी है।
हर दशक में भाजपा में हुए हैं बदलाव
भाजपा के वर्ष 1980 में गठन के बाद लगभग हर दशक बाद बदलाव होते रहे हैं। बीसवीं शताब्दी के आखिरी दशक में तब पार्टी संगठन का नेतृत्व कर रहे लालकृष्ण आडवाणी ने भी 1992 से 1995 के बीच बड़ी संख्या में युवाओं को केंद्रीय भूमिका में शामिल किया था, जिसमें मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रमुख चेहरे हैं। 21वीं सदी के पहले और दूसरे दशक में भी ऐसे ही बदलाव होते रहे। तब वरिष्ठ नेताओं का दखल काफी ज्यादा रहा और वह नई टीमों को नेतृत्व के साथ निर्देशन भी देते रहे, लेकिन अब स्थितियां बदली गई हैं।
युवा नेतृत्व के फैसलों को मजबूती देंगे वरिष्ठ नेता : सूत्रों का कहना है कि इस बार नेतृत्व भी युवा है और फैसले लेने की शक्ति भी उसमें निहित की गई है। संगठन को मजबूती देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद आगे रहेंगे।
संघ में भी अगले साल अहम बदलाव संभव
भाजपा के इस बदलाव के साथ उसकी संगठनात्मक शक्ति के केंद्र राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में भी अगले साल काफी बदलाव होने की संभावना है। कॉकरोच प्रोटेस्ट के बाद Gem-Z पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है। संघ ने अपने शताब्दी वर्ष के बाद इस बारे में संकेत भी दिए हैं। यानी नई पीढ़ी के सामने भाजपा भी नई पीढ़ी के साथ सामने रहेगी। जेन जी और जेन अल्फा को लेकर जो माहौल बना है उसमें भाजपा भी अपने नेतृत्व तथा कार्यकर्ताओं में जेन जी एवं जेन अल्फा को लेकर ही खड़ी रहेगी। हालांकि संघ प्रमुख के बदलाव को लेकर कोई चर्चा नहीं है। मौजूदा संघ प्रमुख मोहन भागवत 2009 से इस पद पर हैं। आपको बता दें कि संघ में सरसंघचालक के लिए कोई चुनाव नहीं होता है। यह पूरी तरह से आम सहमति पर निर्भर रहता है। मौजूदा संघ प्रमुख अगर किसी का नाम सुझाते हैं तो उसी पर आम सहमति बनाई जा सकती है। (हिन्दुस्तान प्रिंट से इनपुट्स के साथ)