केंद्र सरकार ने असंगठित क्षेत्र के मजदूरों और गरीब तबके को बड़ी राहत देते हुए अटल पेंशन योजना को लेकर अहम फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में इस योजना को वर्ष 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी गई, जिससे करोड़ों लोगों को रिटायरमेंट के बाद पक्की मासिक पेंशन मिलती रहेगी।
इस फैसले के तहत सरकार योजना के प्रचार-प्रसार, विस्तार और वित्तीय मजबूती के लिए आगे भी आवश्यक सहयोग देती रहेगी। इसका सीधा लाभ उन करोड़ों मजदूरों को मिलेगा जिनके पास रिटायरमेंट के बाद नियमित पेंशन का कोई साधन नहीं है। योजना के अंतर्गत 60 वर्ष की आयु के बाद लाभार्थियों को उनके योगदान के आधार पर हर महीने 1,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक की गारंटीशुदा पेंशन मिलेगी।
क्या है अटल पेंशन योजना
अटल पेंशन योजना बुढ़ापे में आय की सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से चलाई जा रही है। यह खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में रहने वाले असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने में मदद करती है। कैबिनेट ने यह भी स्पष्ट किया है कि लोगों में जागरूकता बढ़ाने, योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और इसे दीर्घकाल तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए सरकार निरंतर सहायता प्रदान करती रहेगी।
2015 में हुई थी शुरुआत
अटल पेंशन योजना की शुरुआत 9 मई 2015 को की गई थी। इसका उद्देश्य उन कामगारों को पेंशन सुविधा उपलब्ध कराना है जो किसी औपचारिक पेंशन प्रणाली से जुड़े नहीं हैं। यह योजना लोगों को नियमित रूप से छोटी-छोटी बचत करने के लिए प्रोत्साहित करती है, ताकि सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिल सके। आज यह योजना भारत के सामाजिक सुरक्षा ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 19 जनवरी 2026 तक अटल पेंशन योजना से 8.66 करोड़ से अधिक लोग जुड़ चुके हैं। सरकार का मानना है कि योजना की निरंतर सफलता के लिए जन-जागरूकता, प्रभावी संचालन और दीर्घकालिक वित्तीय समर्थन बेहद जरूरी है, इसलिए भविष्य में भी इसका सहयोग जारी रहेगा।