आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर आईटी सेक्टर में हलचल है। कई निवेशकों को आशंका है कि ऑटोमेशन और एआई टूल्स के कारण आईटी कंपनियों के पारंपरिक बिजनेस मॉडल पर असर पड़ सकता है। हालांकि एचडीएफसी बैंक के पूर्व सीईओ Aditya Puri का मानना है कि एआई को लेकर जरूरत से ज्यादा डर फैलाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि एआई निश्चित रूप से काम करने के तरीके को बदलेगा लेकिन यह मान लेना कि यह बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म कर देगा, सही नहीं है। उनके मुताबिक, टेक्नोलॉजी के हर बड़े बदलाव की तरह एआई भी कुछ भूमिकाओं को कम करेगा, लेकिन साथ ही नई स्किल्स और नई नौकरियों के अवसर पैदा करेगा। आने वाले वर्षों में इंसान और एआई मिलकर काम करेंगे, न कि एक-दूसरे की जगह लेंगे।
बैंकिंग सेक्टर पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में अब भी बड़ी आबादी औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से पूरी तरह जुड़ी नहीं है। बैंकों के डिपॉजिट का बड़ा हिस्सा अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से आता है। उनका मानना है कि बैंक जमा पूरी तरह से शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड्स की ओर शिफ्ट नहीं हो रहे हैं, क्योंकि देश की कुल आबादी का छोटा हिस्सा ही सीधे इक्विटी में निवेश करता है।
हालांकि, हाल के वर्षों में म्यूचुअल फंड्स, खासकर सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP), में बढ़ती भागीदारी ने बैंक डिपॉजिट ग्रोथ को कुछ हद तक प्रभावित किया है। फिर भी, उनके अनुसार, बैंकिंग सिस्टम की बुनियाद मजबूत बनी हुई है और एआई का असर धीरे-धीरे और संतुलित तरीके से सामने आएगा।