केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नई दिल्ली में “खुत्बात-ए-मोदी: लाल किले की फ़सील से” नामक पुस्तक का विमोचन किया। यह पुस्तक पीएम मोदी द्वारा 2014 से 2025 के बीच लाल किले से दिए गए स्वतंत्रता दिवस भाषणों का संकलन है।
उर्दू भाषा में प्रकाशित इस पुस्तक को राष्ट्रीय उर्दू भाषा संवर्धन परिषद (एनसीपीएल), नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित किया गया है, जो शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत एक राष्ट्रीय संस्था है और जिसका उद्देश्य देशभर में उर्दू भाषा का संरक्षण, संवर्धन और प्रसार करना है।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए श्री प्रधान ने उर्दू में “खुत्बात-ए-मोदी” के प्रकाशन पर प्रसन्नता व्यक्त की और इसे भाषाई समावेशन की दिशा में एक सार्थक कदम बताया।केंद्री मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के भाषणों में अंत्योदय (अंतिम व्यक्ति का उत्थान), गरीबों का कल्याण, स्वच्छ भारत, राष्ट्रीय एकता और 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं जैसी पहलों पर बल दिया गया है, जो ‘नए भारत’ के विजन को दर्शाती हैं।
श्री प्रधान ने कहा कि इस प्रकार के प्रकाशन नागरिकों को प्रधानमंत्री के विचारों, विकासात्मक प्राथमिकताओं और विजन से सीधे जोड़ने का एक शक्तिशाली माध्यम हैं, जिससे व्यापक सार्वजनिक जुड़ाव और सूचित विमर्श संभव हो पाता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह पुस्तक देश भर के पुस्तकालयों में अपनी जगह बनाएगी, जिससे छात्रों, विद्वानों और पाठकों को विकसित भारत के विजन पर व्यापक संवाद में शामिल होने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस बात पर जोर दिया कि एनसीपीयूएल को सक्रिय रूप से भारत की विरासत, संस्कृति, जीवनशैली और ज्ञान परंपराओं से संबंधित रचनाओं को उर्दू में प्रकाशित करने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। श्री प्रधान ने इस सराहनीय पहल के लिए एनसीपीयूएल को बधाई दी और भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं दीं।
“खुत्बात-ए-मोदी” नए भारत की परिवर्तनकारी यात्रा को अभिव्यक्त करती है और प्रमुख राष्ट्रीय संबोधनों को उर्दू पाठकों तक पहुंचाकर भाषाई समावेशन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता की पुनःपुष्टि करती है।