नवाशहर (मनोरंजन कालिया) : चंडीगढ़ से सांसद श्री मनीष तिवारी ने आज लोकसभा में हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के बांधों की डी-सिल्टिंग की स्थिति तथा गाद जमाव के कारण जल भंडारण क्षमता में हो रही चिंताजनक कमी से संबंधित एक गंभीर मुद्दा उठाया।
उनके अन-स्टार्ड प्रश्न क्रमांक 717 के उत्तर में जल शक्ति मंत्रालय ने बताया कि नवीनतम नेशनल रजिस्टर ऑफ स्पेसिफाइड डैम्स (2025) के अनुसार हरियाणा में 3 निर्दिष्ट बांध हैं, पंजाब में 15 और हिमाचल प्रदेश में 24, जिनमें से कुल 24 बांधों की वर्तमान भंडारण क्षमता का आकलन किया गया है।
मंत्रालय ने स्वीकार किया कि भारी गाद जमाव ने कई बड़े बांधों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। हाल ही के सर्वेक्षणों के अनुसार:
* भाखड़ा बांध ने अपनी भंडारण क्षमता का 2,568 एमसीएम खो दिया है।
• ब्यास जलाशय ने 1,190 MCM पानी गंवा दिया है।
• पंजाब के कई मध्य व छोटे बांध – जैसे मैली, ढोलबाहा, दमसाल, मिर्ज़ापुर आदि – की क्षमता में भी भारी कमी दर्ज की गई है।
• हिमाचल प्रदेश में चमेड़ा-I, II, III और बैरा जैसे बड़े परियोजनाओं में भी महत्वपूर्ण गाद जमाव की रिपोर्ट है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जल राज्य का विषय है, फिर भी डैम रिहैबिलिटेशन एंड इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट (DRIP) चरण-II व III के तहत केंद्र राज्यों को तकनीकी व वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रहा है। पंजाब और भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) वर्तमान में डीआरआईपी-II और III लागू कर रहे हैं, जिसके अंतर्गत पंजाब में 12 और बीबीएमबी के 2 बांधों का पुनर्वास शामिल है।
पंजाब में चार बांधों – चोहल, सिसवां, सलेरां और थाना – में डी-सिल्टिंग कार्य प्रगति पर है, जबकि नौ अन्य बांधों के प्रस्ताव स्वीकृति की प्रतीक्षा में हैं।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि बीबीएमबी ने अभी तक भाखड़ा और पोंग जलाशयों में डी-सिल्टिंग शुरू नहीं की है, लेकिन डीआरआईपी के तहत भाखड़ा में डी-सिल्टिंग के लिए एक पायलट परियोजना का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है।
श्री मनीष तिवारी ने जोर देकर कहा कि भंडारण क्षमता की यह कमी सिंचाई सुरक्षा, पेयजल आपूर्ति, बाढ़ प्रबंधन और क्षेत्र के जल संसाधनों की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए सीधा खतरा है। उन्होंने केंद्र सरकार से इन कदमों को तत्काल तेज़ी से लागू करने का आग्रह किया:
* बड़े और मध्यम बांधों में डी-सिल्टिंग कार्य को गति देना
• राज्य सरकारों के साथ मजबूत समन्वय
• DRIP के तहत बेहतर निगरानी और क्रियान्वयन
• भविष्य की पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण जल अवसंरचना की सुरक्षा
उन्होंने पुनः जोर दिया कि उत्तर भारत की जल सुरक्षा के लिए बांधों की सुरक्षा और उनकी प्रभावी कार्यक्षमता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।