सरकार ने देश में निर्यात को नई गति देने के लिए ‘जिला निर्यात केंद्र’ पहल का विस्तार किया है। लोकसभा में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि इस पहल के जरिए जिला स्तर पर निर्यात क्षमता को मजबूत करने और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
देशभर में संस्थागत ढांचा तैयार
इस पहल के तहत सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्य निर्यात संवर्धन समितियां (SEPC) और जिला निर्यात संवर्धन समितियां (DEPC) गठित की गई हैं। 590 जिलों के लिए जिला निर्यात कार्य योजनाओं (DEAP) के मसौदे तैयार किए जा चुके हैं, जिनमें से 249 को औपचारिक रूप से अधिसूचित भी किया जा चुका है।
जिलों के विशिष्ट उत्पादों की पहचान
सरकार ने विभिन्न जिलों में निर्यात क्षमता वाले खास उत्पादों की पहचान की है। उदाहरण के तौर पर: साबरकांठा (गुजरात): सिरेमिक, टाइल्स और आलू। अरावली (गुजरात): खनिज, कृषि-प्रसंस्करण, कांच व टाइल्स। जलगांव (महाराष्ट्र): केला और भरित बैंगन। मध्य प्रदेश: इंदौर में प्याज और फार्मा, आगर मालवा में संतरा। छत्तीसगढ़: रायपुर में चावल, मक्का, आम; बस्तर में लौह शिल्प। झारखंड: बांस हस्तशिल्प, वन उत्पाद और सब्जियां।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध डेटा
निर्यात से जुड़ा डेटा सार्वजनिक रूप से निर्यात पोर्टल (https://niryat.gov.in) और डीजीसीआईएंडएस (https://www.dgciskol.gov.in) जैसे पोर्टलों पर उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे निर्यातकों को जरूरी जानकारी आसानी से मिल सके।
स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान
इस पहल के तहत सभी जिलों में जीआई उत्पाद, कृषि क्लस्टर और खिलौना क्लस्टर सहित निर्यात योग्य वस्तुओं और सेवाओं की पहचान की गई है। इसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में पहचान दिलाना है।
निर्यातकों को सहयोग और जागरूकता अभियान
सरकार ने निर्यात से जुड़ी बाधाओं को दूर करने के लिए राज्य और जिला स्तर पर संस्थागत व्यवस्था बनाई है। इसके अलावा जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए निर्यातकों की समस्याओं का समाधान और उन्हें नए अवसरों की जानकारी दी जा रही है।
एमएसएमई, किसानों और छोटे उद्योगों को फायदा
‘जिला निर्यात केंद्र’ पहल के माध्यम से स्थानीय निर्यातकों, निर्माताओं, एमएसएमई, किसानों और छोटे उद्योगों को वैश्विक बाजार से जोड़ने में मदद मिल रही है। इससे उन्हें अपने उत्पादों के लिए नए खरीदार और बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ी है।
आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
यह पहल जिला स्तर पर निर्यात को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करती है। विकेंद्रीकृत और केंद्रित रणनीति के जरिए जिलों को निर्यात विकास का केंद्र बनाया जा रहा है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी